कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर हैरानी जताई और कहा कि इस विवाद से लाखों भक्त निराश महसूस कर रहे हैं.
एक न्यूज एजेंसी के अनुसार मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने भोपाल में पत्रकारों से कहा, "हम सभी ने राम मंदिर के लिए दान दिया था, वहां हो रहे भ्रष्टाचार को देखकर हैरान और स्तब्ध हैं."
उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण में आर्थिक रूप से सहयोग करने वाले लाखों भक्त इस विवाद से बहुत निराश हैं.
प्रेस से बातचीत के दौरान, विवादित बयान देने के लिए पहचाने जाने वाले सिंह ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अभी भी ट्रस्ट के सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं. हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट की जांच से पता चलता है कि CEC कुमार का नाम वर्तमान में 15-ट्रस्टी वाले पैनल के सदस्यों की सूची में नहीं है.
रिटायर्ड IAS अधिकारी कुमार, गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल के दौरान ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे के समन्वय में शामिल थे. हालांकि, बोर्ड में उनके पास कोई सक्रिय पद नहीं है.
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी पुष्टि की कि CEC कुमार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य नहीं हैं.
अखिलेश यादव ने उठाया सवाल
मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला 7 जून को सामने आया, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि राम मंदिर के लिए दान किए गए करोड़ों रुपये गायब हो गए हैं. उन्होंने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया.
SIT जांच जारी
इसके बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को दान की रकम की चोरी और वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया.
राज्य सरकार के अनुसार, ट्रस्ट ने तथ्यों का पता लगाने और राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशों की जांच के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की थी.
SIT ने बुधवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की. जांच टीम के सदस्यों ने दान की गिनती और ट्रस्ट का रिकॉर्ड रखने में शामिल लोगों से भी पूछताछ की.
इस विवाद के बाद, तीन लोगों ने अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में शिकायतें दर्ज कराईं और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की. हालांकि, अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है.
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