धार भोजशाला ग्राउंड रिपोर्ट: कल बसंत पंचमी और जुमे की नमाज; 8000 जवानों का पहरा, सड़क पर मलबा और टायर रखने पर भी बैन

DHAR Ground Report: धार की भोजशाला में 23 जनवरी को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ होने के कारण भारी तनाव है. प्रशासन ने 8000 जवान तैनात किए हैं और इलाके को नो-फ्लाई जोन घोषित किया है.

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चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी और पुलिस का पहरा.(Photo:ITG) चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी और पुलिस का पहरा.(Photo:ITG)

रवीश पाल सिंह

  • धार ,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला एक बार फिर सियासी और धार्मिक बहस के केंद्र में आ गई है. 23 जनवरी को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के कारण यह पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है.

हिंदू संगठनों की मांग है कि बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए. वहीं, मुस्लिम पक्ष शुक्रवार की नमाज को लेकर अपनी परंपरा में किसी भी तरह की रुकावट के खिलाफ है और यथावत व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है.

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दो अलग-अलग धार्मिक आयोजनों के एक ही दिन होने से इलाके में तनाव का माहौल बन गया है. स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है. सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. यह विवाद वर्षों से इतिहास, आस्था और कानून के बीच उलझा हुआ चला आ रहा है.

धार शहर में स्थित भोजशाला एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने संरक्षित स्मारक घोषित किया हुआ है. मान्यता है कि 11वीं शताब्दी में परमार शासक राजा भोज के काल में यह स्थल शिक्षा और विद्या का प्रमुख केंद्र था, जहां देवी सरस्वती की आराधना होती थी.

दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है और लंबे समय से यहां नमाज अदा करता आ रहा है.

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भोजशाला विवाद की जड़ इसकी धार्मिक पहचान को लेकर है. हिंदू पक्ष का कहना है कि यह स्थान मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे एक ऐतिहासिक मस्जिद बताते हुए नमाज के अधिकार पर जोर देता है.

एक ही परिसर पर दो धार्मिक दावों के चलते यह मामला दशकों से विवादित बना हुआ है. वर्ष 2003 में प्रशासन ने व्यवस्था तय की थी, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई.

कब आया नया मोड़?
साल 2024 में यह विवाद तब और गहराया, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ASI को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने के निर्देश दिए. इस सर्वे का मकसद स्थल की ऐतिहासिक और वास्तुशिल्पीय सच्चाई को सामने लाना था.

ASI की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर से जुड़े अवशेष और मूर्तिकला के संकेत मिलने की बात कही गई है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी न्यायालय के अधीन है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के आधार पर कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं किया जाएगा.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विवाद की स्थिति को देखते हुए धार शहर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. शहर में 8 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है. भोजशाला परिसर के आसपास नो फ्लाई ज़ोन घोषित किया गया है. शांति भंग करने अथवा कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों को यह भी चेतावनी दी गई है कि शांति भंग करने अथवा कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के विरुद्ध सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई की जाएगी.

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जिला प्रशासन ने भोजशाला क्षेत्र में बसंत पंचमी पर 300 मीटर परिधि में नो-फ्लाई जोन घोषित किया है. निर्धारित क्षेत्र में किसी भी प्रकार की उड़ान गतिविधि जैसे ड्रोन, पैराग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून, अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) अथवा अन्य किसी भी प्रकार की उड़ने वाली वस्तु का संचालन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा.

सड़कों पर मलबा, टायर और लावारिस गुमटियां रखने पर भी बैन
इसी तरह सार्वजनिक सड़कों व स्थलों पर भवन निर्माण सामग्री, मलबा, टायर और लावारिस गुमटियां रखने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. इस संबंध में जारी आदेशानुसार नगर पालिका क्षेत्र धार में निवासरत कोई भी व्यक्ति अपने भवन निर्माण सामग्री, मलबा, कण्डे, नये या पुराने टायर समेत लावारिस गुमटियां किसी भी सार्वजनिक स्थान या सड़क के किनारे खुले में नहीं रख सकेंगे. आदेश के उल्लंघन की स्थिति में नगर पालिका परिषद द्वारा उक्त सामग्री को जब्त किया जाएगा.

संयमित भाषा उपयोग संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश
बसंत पंचमी आयोजन को लेकर प्रिंटिंग प्रेसों के लिए संयमित भाषा उपयोग संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किया गया है. इसके अनुसार धार नगर के सभी प्रिंटिंग प्रेस मालिक यह सुनिश्चित करेंगे कि बसंत पंचमी आयोजन से संबंधित विज्ञापन, होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स, झण्डे एवं अन्य प्रचार-प्रसार सामग्री में संयमित एवं मर्यादित भाषा का ही उपयोग किया जाए. किसी भी धर्मावलंबी अथवा समुदाय के प्रति उत्तेजक, भड़काऊ या आपत्तिजनक सामग्री का प्रकाशन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा.

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