शादी तो चल रही लेकिन मन ही मन 'अलग' हो चुका है पार्टनर, एक्सपर्ट ने बताया मैरिड लाइफ का वॉर्निंग साइन

हम अक्सर ये लाइन सुनते हैं कि दफ्तर में जितना बोला जाए उतना ही काम करना चाहिए. लेकिन आजकल कई जोड़े इसे अपने घरों और शादी-शुदा जिंदगी में भी फॉलो करने लगे हैं. सीधे शब्दों में कहें तो बिना तलाक लिए रिश्ते से अलग हो जाना मैरिज में क्वाइट क्विटिंग कहलाता है. इसमें इंसान शादी तोड़ता नहीं है, घर भी चलाता है, लेकिन अपने पार्टनर के साथ बातचीत करना, प्यार जताना या रिश्ते को बेहतर बनाने की कोशिशें करना पूरी तरह बंद कर देता है.

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बिना लड़े-झगड़े ही शादी में आ रही है दरार (Photo: ITG) बिना लड़े-झगड़े ही शादी में आ रही है दरार (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

कॉर्पोरेट्स में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला टर्म 'क्वाइट क्विटिंग' (Quiet Quitting) अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे लोगों के निजी रिश्तों और शादीशुदा जिंदगी में भी दाखिल हो रहा है. ऑफिस में इसका मतलब होता है कि केवल उतना ही काम करना, जितना बहुत जरूरी हो, ठीक उसी तरह शादियों में इसका अर्थ रिश्ते को बिना तोड़े उसमें अपनी भावनात्मक मौजूदगी को लगभग शून्य कर देना. यानी आपको शादीशुदा जीवन में अपनी जिम्मेदारी निभानी है बिना इमोशनल एफर्ट किए.

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क्या है क्वाइट क्विटिंग का मतलब?

कैंब्रिज डिक्शनरी के मुताबिक, क्वाइट क्विटिंग उस स्थिति को कहते हैं जहां कोई कर्मचारी मानसिक और भावनात्मक रूप से अपनी नौकरी से अलग हो जाता है और वो बस अपनी उसी ड्यूटी तक सीमित रहता है जो उसे दी गई होती है. 'क्वाइट क्विटिंग' में कुछ भी नया नहीं है. यह बस एक पुरानी बात या चलन का नया नाम है.

शादियों में भी हो रहा है लागू

अब आप सोचेंगे कि ये शादीशुदा जिंदगी में कैसे लागू हो रहा है तो आपको बता दें कि रिश्तों में इस अनौपचारिक शब्द का इस्तेमाल उन जीवनसाथियों के लिए किया जाता है जो साथ तो रहते हैं, लेकिन अंदर से उनके बीच का जुड़ाव पूरी तरह खत्म हो चुका होता है. जो वैवाहिक जीवन में रोमांस, रोमांच और इमोशनल कनेक्शन के लिए जरूरी है.

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रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही एक पार्टनर के तौर पर वो भावनात्मक और शारीरिक रूप से दूर हो जाएं, फिर भी वो कपल घर के कामों और बच्चों की देखभाल जैसी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां निभाते रहते हैं.

सोशल मीडिया पर इस शब्द को लेकर काफी चर्चा हो रही है. यूजर्स ऐसे वीडियो और पोस्ट शेयर कर रहे हैं जिनमें शादी में बने रहने के बावजूद भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस करने की बात कही गई है.

झगड़ा ना होना भी खतरनाक संकेत

कैलिफॉर्निया में मारिन थेरेपी एंड काउंसलिंग सेंटर में लाइसेंस्ड मैरिज और फैमिली थेरेपिस्ट लीसा ब्रूक्स किफ्ट ने एक इंटरव्यू में कहा कि आपसी अनबन या टकराव का बिल्कुल न होना भी एक चेतावनी का संकेत हो सकता है.

लीसा ब्रूक्स किफ्ट ने कहा, यह एक गलत धारणा है कि रिश्ते में बहस न होने का मतलब है कि रिश्ता स्वस्थ है. बहुत से लोग झगड़े से बचते हैं और अपनी भावनाओं पर बात करने के बजाय उन्हें दबा देते हैं, जिससे लंबे समय में भावनात्मक सुरक्षा की नींव कमजोर हो जाती है.

उनका कहना है कि किसी व्यक्ति का अटैचमेंट स्टाइल यानी रिश्तों में करीबी और सहारा पाने का तरीका इस बात पर असर डाल सकता है कि वो शादीशुदा जिंदगी की मुश्किलों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं.

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उन्होंने कहा, 'जिन लोगों का 'अवॉइडेंट' (दूरी बनाए रखने वाला) स्टाइल होता है, वो शायद अपनी ही दुनिया में रहकर मुश्किल समय से बेहतर ढंग से निपट पाते हैं क्योंकि उन्हें खुद पर ही भरोसा करके काम करना ज्यादा आसान लगता है.'

एक्सपर्ट ने बताया कि जिन लोगों का सिक्योर अटैचमेंट स्टाइल होता है, उनके इस तरह के व्यवहार में बने रहने की संभावना कम होती है. क्योंकि वो अपने पार्टनर पर भरोसा करने और समस्याओं को बातचीत से सुलझाने में ज्यादा यकीन रखते हैं.

ये स्थिति कब आती है?

लीसा ब्रूक्स किफ्ट के अनुसार, ये पैटर्न कुछ हद तक शुरुआती अनुभवों से बनते हैं जिनमें भरोसा, काबिलियत और इस बात का ध्यान रखा जाता है कि क्या किसी व्यक्ति की भावनात्मक जरूरतें पूरी हुईं या नहीं.

लीसा ने कहा, अपनी थेरेपी प्रैक्टिस के दौरान मैंने ऐसे कई लोगों को देखा है जिन्होंने यह रवैया अपनाया है. उन्होंने अपनी भावनात्मक और दूसरी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की, लेकिन वो नाकाम रहे जिससे उनमें निराशा पैदा हो गई.

इतना ही नहीं लीसा ने कुछ शुरुआती संकेत भी बताए जिनसे पता चल सकता है कि पार्टनर भावनात्मक रूप से दूर हो रहा है.

खुली बातचीत में कमी
झगड़े न सुलझाना
आपसी सब्र में कमी 
जीवनसाथी की नीयत के बारे में अच्छा सोचने या उन्हें सही मानने के बजाय, उनके बारे में पहले से ही सबसे बुरा सोचना.

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अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह रिश्ता उस स्थिति में बदल सकता है जिसे पत्रकार मोनिका कोरकोरन हरेल ने ओपरा के पॉडकास्ट पर 'पैरेलल गेम्स' के रूप में डिसक्राइब किया था जिसमें छोटे बच्चे एक-दूसरे के साथ बिना जुड़े बस साथ-साथ खेलते हैं.

विवाह को सुधारने के लिए दोनों जोड़ीदारों को फिर से जुड़ने की जरूरत होती है जो एक बार एक पति या पत्नी के भावनात्मक रूप से गहराई से अलग हो जाने पर मुश्किल हो सकता है. 

उन्होंने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह से मन बना चुका है (यानी रिश्ते से बाहर निकल चुका है) तो वह रिश्ते को सुधारने के लिए तैयार नहीं होगा.'

उन्होंने यह भी कहा कि हाइपरविजिलेंस यानी मानसिक चोट या निराशा से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहने वाली स्थिति किसी व्यक्ति के लिए अपने पार्टनर में आए सकारात्मक बदलावों को पहचानना मुश्किल बना सकती है.

तो फिर क्या करें?

लीसा इसका भी जवाब देती हैं. उन्होंने कहा कि जो कपल्स अपने रिश्ते को बेहतर बनाना चाहते हैं, उनके लिए बातचीत की शुरुआत ऐसी हो जो दूसरे व्यक्ति को सुरक्षित महसूस कराए और जिसमें एक-दूसरे के प्रति परवाह दिखे.

उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि आप अपने पार्टनर से इस तरह बात कर सकते हैं, 'मुझे पता है कि आपको शायद ऐसा न लगे लेकिन आप और हमारी शादी मेरे लिए बहुत जरूरी हैं. क्या हम बैठकर बात करने के लिए कोई समय निकाल सकते हैं.' 

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