प्लेन में फ्लश किया... फिर टॉयलेट वेस्ट कहां गया? जानिए पूरा राज

क्या कमर्शियल विमान उड़ते समय टॉयलेट वेस्ट को नीचे गिरा देते हैं? यह सवाल कई लोगों के मन में जरूर आता होगा. लेकिन असल में प्लेन में टॉयलेट वेस्ट को संभालने और ठिकाने लगाने का एक पूरा प्रोसेस होता है.

Advertisement
फ्लाइट के दौरान यह वेस्ट उसी टैंक में जमा रहता है  (Photo: ITG) फ्लाइट के दौरान यह वेस्ट उसी टैंक में जमा रहता है (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान में 30-35 हजार फीट की ऊंचाई पर फ्लश करने के बाद टॉयलेट वेस्ट आखिर जाता कहां है? क्या उसे सीधे आसमान से नीचे गिरा दिया जाता है? क्या वह उड़ते हुए विमान से बाहर फेंक दिया जाता है? आज जानते हैं इन सारे सवालों के जवाब. बेहद ही आसान तरीके से.

आधुनिक कमर्शियल एयरक्राफ्ट में टॉयलेट वेस्ट को उड़ान के दौरान बाहर नहीं फेंका जाता. इसके लिए विमान के अंदर एक खास वैक्यूम और वेस्ट स्टोरेज सिस्टम होता है, जो फ्लश करने के बाद वेस्ट को एक सील्ड होल्डिंग टैंक तक पहुंचाता है. फ्लाइट के दौरान यह वेस्ट उसी टैंक में जमा रहता है और विमान के जमीन पर उतरने के बाद इसे बाहर निकाला जाता है.

Advertisement

क्या फ्लाइट में बदबू नहीं फैलती?

इसे ऐसे समझिए. फ्लश करने के बाद वेस्ट को वैक्यूम सिस्टम तेजी से खींचकर बंद होल्डिंग टैंक में भेज देता है. यह टैंक सील्ड होता है, इसलिए उसमें जमा वेस्ट की बदबू सीधे केबिन तक नहीं पहुंचती. टॉयलेट के अंदर भी वेंटिलेशन और एयर-फिल्ट्रेशन सिस्टम होते हैं, जो हवा को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं. वैक्यूम सिस्टम वेस्ट को तेजी से टैंक तक पहुंचाता है, जिससे उसके खुले रहने और बदबू फैलने की संभावना कम होती है.

घर के टॉयलेट से कितना अलग है प्लेन का टॉयलेट?

घर के टॉयलेट को आमतौर पर पानी और गुरुत्वाकर्षण की मदद से चलाया जाता है. इसके उलट एयरक्राफ्ट टॉयलेट वैक्यूम और दबाव के अंतर का इस्तेमाल करता है.इसका एक बड़ा फायदा यह है कि कम पानी में फ्लश किया जा सकता है. साथ ही पाइपों को सिर्फ नीचे की तरफ जाने की जरूरत नहीं होती. वैक्यूम सिस्टम वेस्ट को पाइप के जरिए टैंक तक पहुंचा सकता है. यही तकनीक विमान जैसी चलती हुई मशीन में टॉयलेट सिस्टम को व्यावहारिक बनाती है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: अचानक सड़क पर उतरा प्लेन, कई कारों से टकराया, एक महिला की गई जान

फ्लश दबाते ही आखिर होता क्या है?

घर के सामान्य टॉयलेट में फ्लश करने के बाद पानी और गुरुत्वाकर्षण की मदद से वेस्ट नीचे की ओर जाता है. लेकिन हवाई जहाज में मामला थोड़ा अलग है.एयरक्राफ्ट टॉयलेट में वैक्यूम सिस्टम का इस्तेमाल होता है. जैसे ही यात्री फ्लश का बटन दबाता है, एक वाल्व खुलता है और दबाव के अंतर की वजह से वेस्ट तेजी से पाइप के जरिए होल्डिंग टैंक की ओर चला जाता है.

ऊंचाई पर विमान के बाहर और केबिन के अंदर के दबाव में अंतर होता है. यही अंतर वैक्यूम सिस्टम को काम करने में मदद करता है. जमीन पर या कम ऊंचाई पर इस प्रक्रिया में वैक्यूम जनरेटर की मदद ली जा सकती है.

फ्लश करने पर इतनी तेज आवाज क्यों आती है?

अगर आपने कभी प्लेन के टॉयलेट में फ्लश किया है, तो उसकी तेज 'सक्शन' वाली आवाज जरूर सुनी होगी. यह आवाज वैक्यूम सिस्टम के तेजी से काम करने की वजह से आती है. Flightradar24 के मुताबिक, कुछ सिस्टम में एक हाई-स्पीड टर्बाइन भी होती है, जो वेस्ट को होल्डिंग टैंक में जाने से पहले प्रोसेस करने में मदद करती है. इसका उद्देश्य पाइप में रुकावट का खतरा कम करना भी होता है.

Advertisement

वेस्ट जाता कहां है?

फ्लश करने के बाद टॉयलेट वेस्ट पाइपों के जरिए विमान के अंदर मौजूद एक खास होल्डिंग टैंक में पहुंचता है.यह टैंक बंद और सुरक्षित होता है. पूरी उड़ान के दौरान टॉयलेट का वेस्ट इसी में जमा रहता है. यानी 35 हजार फीट की ऊंचाई पर भी आपके फ्लश करने के बाद वेस्ट सीधे जमीन पर नहीं गिरता.

विमान के लैंड करने के बाद ग्राउंड सर्विस टीम विशेष उपकरणों की मदद से इस टैंक को खाली करती है. इसके बाद वेस्ट को एयरपोर्ट की संबंधित वेस्ट हैंडलिंग और ट्रीटमेंट व्यवस्था के तहत आगे निपटान के लिए भेजा जाता है.

यानी पूरा सफर कुछ ऐसा है

फ्लश करने के बाद टॉयलेट वेस्ट सबसे पहले एयरक्राफ्ट टॉयलेट से वैक्यूम सिस्टम में पहुंचता है. वहां से यह पाइपों के जरिए विमान के अंदर बने होल्डिंग टैंक में जमा हो जाता है. फ्लाइट के दौरान वेस्ट इसी सील्ड टैंक में रहता है. विमान के लैंड होने के बाद ग्राउंड सर्विस वाहन विशेष उपकरणों से इस टैंक को खाली करता है और फिर वेस्ट को आगे ट्रीटमेंट या सुरक्षित डिस्पोजल सिस्टम तक पहुंचाया जाता है. इस पूरे सिस्टम का सबसे अहम मकसद यह है कि वेस्ट को उड़ान के दौरान सुरक्षित रूप से विमान के अंदर रखा जा सके.

Advertisement

क्या प्लेन कभी आसमान से टॉयलेट वेस्ट गिराता है?

यह एक आम मिथक है कि कमर्शियल विमान उड़ते समय टॉयलेट वेस्ट को नीचे गिरा देते हैं. आधुनिक विमानों में सामान्य रूप से ऐसा नहीं होता.

वेस्ट को सील्ड होल्डिंग टैंक में रखा जाता है और जमीन पर उतरने के बाद खाली किया जाता है. हालांकि, इतिहास में बहुत दुर्लभ मामलों में टॉयलेट सिस्टम से लीकेज की घटनाएं हुई हैं. अगर ऐसा वेस्ट बहुत ऊंचाई पर लीक होकर जम जाए, तो उसे आमतौर पर 'ब्लू आइस' कहा जाता है, लेकिन ऐसे मामले सामान्य नहीं हैं और आधुनिक एयरक्राफ्ट सिस्टम इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए डिजाइन किए जाते हैं.

हवाई जहाज में फ्लश करने के बाद वेस्ट का सफर भी जमीन के टॉयलेट जितना साधारण नहीं, बल्कि 35 हजार फीट की ऊंचाई पर चलने वाली एक खास इंजीनियरिंग का हिस्सा है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »