दिवाली आने वाली है. घरों में साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो गया है. हर साल लोग घरों की दीवारों को पेंट करते हैं. फिर भी सीलन और बबल आने जैसी समस्या खत्म नहीं होती है. कई बार पेंट भी समय से पहले झड़ने लग जाते हैं. इन सबके के पीछे सबसे बड़ी वजह है, पेंट करना का सही तरीका नहीं अपनाना. चलिए जानते हैं पेंट करने का सही तरीका क्या है? दीवारों पर पहले प्राइमर लगाना चाहिए या सीधे पुट्टी से शुरुआत करनी चाहिए?
पारंपरिक तरीके से दीवार पेंट करने के लिए में पहले वॉल पुट्टी लगाई जाती है, लेकिन अब यह तरीका बदल गया है. क्योंकि, नई दीवार हो या पुरानी, पेंट करने के आधुनिक तकनीक के तहत पहले प्राइमर लगाने की सलाह दी जाती है. क्योंकि, यह सरफेस को सील कर देता है. इससे दीवार की बची हुई नमी या गंदगी पुट्टी से नहीं मिलती है. एक तरह से सबसे पहले प्राइमर का एक कोट दीवार के लिए सीलर का काम करता है और गैर- जरूरी नमी को सोख लेता इस तरह पुट्टी और पेंट करने के बाद सीलन और बबल नहीं आती.
पुट्टी से पहले और बाद में भी लगाएं प्राइमर
इसलिए आधुनिक और अधिक टिकाऊ तकनीक में पुट्टी से पहले एक कोट प्राइमर लगाना बेहतर माना जाता है. इसके बाद पुट्टी का लेयर चढ़ाना चाहिए. पुट्टी लगाने के बाद फिर से एक लेयर प्राइमर करना चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया तो पुट्टी काफी ज्यादा पेंट सोखती है. कई बार हमें प्राइमर लगाना अनावश्यक खर्च लग सकता है. लेकिन, दीवारों के पेंट की लंबी उम्र और पेंट के कम खर्च के लिए प्राइमर लगाना जरूरी होता है.
इसलिए आप बाजार से सबसे महंगा पेंट खरीद कर भी ले आएं. लेकिन अगर आपकी दीवार ठीक से तैयार नहीं है, तो नतीजा निराशाजनक होगा. अगर दीवार काफी ज्यादा उबड़- खाबड़ है और आप पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी करवा रहे है. फिर भी उसके बाद सीधे पेंट करवाने से पहले प्राइमर लगाना जरूरी होता है.
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यह साफ है कि पुट्टी और पेंट से पहले और पीओपी के बाद प्राइमर लगाना जरूरी है. यह न सिर्फ दीवार की नमी को सोखता है, बल्कि आगे लगने वाले पेंट की उम्र को भी बढ़ा देता है. इससे दीवारों पर बबल और सीलन जैसी समस्या काफी कम हो जाती है.
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