भारत और चीन नेपाल में क्यों भेज रहे बेली ब्रिज.. ये होते क्या हैं?

नेपाल में भारत की ओर से काफी मात्रा में राहत सामग्री भेजी जा रही है, जिसमें बेली ब्रिज भी हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये बेली ब्रिज होते क्या हैं?

Advertisement
भारत की ओर से नेपाल को बेली ब्रिज भेजे जा रहे हैं. (Photo: X/DrSJaishankar) भारत की ओर से नेपाल को बेली ब्रिज भेजे जा रहे हैं. (Photo: X/DrSJaishankar)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत कार्य जारी है. फ्लैश फ्लड की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. अभी तक 1100 से ज्यादा लोगों को मौत हो चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता है. नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा में भारत नेपाल के साथ खड़ा है और लगातार राहत सामग्री भेज रहा है. भारत की ओर से नेपाल में कई तरह की राहत सामग्री भेजी गई है, जिसमें बेली ब्रिज भी शामिल है. भारत के साथ चीन ने भी नेपाल को बेली ब्रिज भेजकर मदद की है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ये बेली ब्रिज होते क्या हैं और बाढ़ की स्थिति में इनका क्या काम होता है?

Advertisement

दरअसल, नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली पुलों के निर्माण में मदद मांगी है. अचानक आई बाढ़ में तीन दर्जन से अधिक पुल बह जाने के बाद नेपाल ने अपने पड़ोसी देशों से मदद मांगी थी. भारत की ओर से लगातार की जा रही मदद में बेली ब्रिज भी शामिल हैं. भारत ने 7 बेली ब्रिज के साथ ही 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी नेपाल को भेजे हैं और इसके 16 ट्रक नेपाल जा चुके हैं. 

अब सवाल है कि आखिर ये बेली ब्रिज है क्या?

बेली ब्रिज (Bailey Bridge) को आसान भाषा में कहें तो यह पहले से तैयार किए गए लोहे या स्टील के हिस्सों को जोड़कर जल्दी बनाया जाने वाला पुल है. इसे खास तौर पर ऐसी जगहों पर इस्तेमाल किया जाता है, जहां बाढ़, भूस्खलन या किसी दूसरी आपदा में पुराना पुल टूट गया हो और संपर्क जल्द बहाल करना हो. ये पोर्टेबल पुल भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना आसानी से बनाए जा सकते हैं.

Advertisement

इसे अलग-अलग हिस्सों में स्टैंडर्ड आकार के स्टील पैनल, बीम, कनेक्टर और डेक होते हैं. इन्हें साइट पर ले जाकर आपस में पिन और बोल्ट से जोड़ा जाता है. जरूरत के मुताबिक ज्यादा पैनल जोड़कर पुल की लंबाई और मजबूती बढ़ाई जा सकती है. कई मामलों में पुल को नदी/खाई के एक किनारे पर असेंबल करके रोलर्स की मदद से धीरे-धीरे दूसरे किनारे की ओर धकेला यानी लॉन्च किया जाता है. 

इनकी खास बात ये है कि इन्हें बहुत तेजी से बनाया जा सकता है. इसके ज्यादातर हिस्से पहले से फैक्ट्री में तैयार होते हैं. इन्हें ट्रकों में आसानी से ले जाया जा सकता है. पारंपरिक पुल की तुलना में मौके पर निर्माण का काम काफी कम होता है. आपदा के समय लोगों, राहत सामग्री और वाहनों की आवाजाही तुरंत शुरू कराने में उपयोगी होते हैं. जरूरत के हिसाब से अलग-अलग लंबाई और भार क्षमता में बनाया जा सकता है. 

नेपाल में क्यों है जरूरी?

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से कई जगह सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है. ऐसे में स्थायी कंक्रीट पुल बनाने में लंबा समय लग सकता है. बेली ब्रिज अपेक्षाकृत जल्दी लगाया जा सकता है, इसलिए यह तत्काल कनेक्टिविटी बहाल करने का समाधान बन जाता है. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »