हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित 'शुद्धिकरण हवन' मामले में नैनीताल पुलिस ने पहली एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने बताया कि ये FIR अधिवक्ता एवं कांग्रेस कार्यकर्ता अंजू की लिखित शिकायत पर हल्द्वानी कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ की गई. पुलिस ने ये मामला बीएनएस की धारा 196, 299 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत दर्ज किया है. नैनीताल एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने मामले की विस्तृत जांच इस मामले को एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र को सौंप दी है.
नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि पुलिस को इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के लिए राज्य भर से 80 शिकायतें मिली थीं, जिनमें 19 नैनीताल जिले से थीं. शिकायतों की कानूनी जांच के बाद सबसे पहले शिकायत देने वाली अंजू की तहरीर पर हल्द्वानी कोतवाली में केस दर्ज किया गया. अंजू ही वह पहली व्यक्ति थीं, जिन्होंने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. इस मामले में बेंगलुरु में भी एक जीरो FIR दर्ज की गई है, जिसे जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने की संभावना है.
हाईकोर्ट ने निरस्त की याचिका
वहीं, सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया. कोर्ट ने कहा कि मामले में कानूनी कार्यवाही पहले से जारी है, इसलिए इस स्तर पर अतिरिक्त न्यायिक निर्देश की जरूरत नहीं है.
राज्य सरकार के महाधिवक्ता एस.एन. बाबुलकर ने अदालत को बताया कि 30 अगस्त 2026 को हल्द्वानी थाने में एफआईआर संख्या 0297/2026 दर्ज की जा चुकी है. उन्होंने ये भी बताया कि बेंगलुरु में दर्ज एक जीरो एफआईआर को जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने की संभावना है. उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत निष्पक्ष जांच करेगी और सभी सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा.
अंकित शर्मा