उत्तराखंड के नैनीताल हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने इस बहुचर्चित मामले के तीनों दोषियों की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
अब पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा. कोर्ट ने फिलहाल तीनों को किसी भी तरह की कानूनी राहत नहीं देने से साफ इंकार कर दिया है.
दो दिन चली लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला
नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले पर लगातार दो दिनों तक लंबी और गंभीर सुनवाई की. जज रवींद्र मैठाणी और जज सिद्धार्थ शाह की बेंच ने मामले की सुनवाई की. इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने रखीं.
बचाव पक्ष के वकीलों ने तीनों दोषियों की जमानत के समर्थन में तमाम तर्क पेश किए और उन्हें राहत देने की मांग की. दूसरी तरफ, अभियोजन पक्ष ने इस जमानत याचिका का बहुत जोरदार विरोध किया. अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े सभी अहम साक्ष्यों और सबूतों को अदालत के सामने रखा.
उन्होंने निचली अदालत के उस फैसले का भी हवाला दिया जिसके आधार पर दोषियों को सजा सुनाई गई थी. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.आखिर में कोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं.
क्या है पूरा मामला है?
दरअसल, मामला सितंबर 2022 का है. ऋषिकेश में पहाड़ियों के बीच बने वनंतरा रिजॉर्ट में अंकिता भंडारी रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं. 18 सितंबर 2022 को अंकिता संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थीं.
जब वह अचानक गायब हुईं, तो उनके परिवार और स्थानीय लोगों ने उनकी तलाश शुरू की. धीरे-धीरे पुलिस जांच आगे बढ़ी और मामला सिर्फ गुमशुदगी का नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या का निकला. इस खुलासे के बाद पूरे उत्तराखंड में सनसनी फैल गई. आखिरकार, 24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव चीला बैराज से बरामद किया गया.
अंकिता का शव मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रिजॉर्ट के तत्कालीन मालिक पुलकित आर्य को गिरफ्तार किया था. उसके साथ ही उसके दो साथियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भी पुलिस ने दबोच लिया.
घटना के बाद उत्तराखंड के लोगों में भारी गुस्सा और आक्रोश फूट पड़ा था. जगह-जगह प्रदर्शन हुए और जनता ने सड़कों पर उतरकर अंकिता के लिए न्याय की मांग की. लोगों का साफ कहना था कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए और उन्हें फांसी या उम्रकैद जैसी सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
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निचली अदालत से मिली थी उम्रकैद की सजा
जनता के भारी दबाव और पुलिस की मजबूत चार्जशीट के बाद यह मामला कोटद्वार की अदालत में चला. कोटद्वार की तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.
अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता की हत्या करने और इस हत्याकांड से जुड़े तमाम सबूतों को मिटाने का पूरी तरह से दोषी करार दिया था. अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास यानी उम्रकैद की सजा सुनाई थी. निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जमानत की मांग की थी.
हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने से अंकिता भंडारी के परिवार को एक बड़ी नैतिक मजबूती मिली है. अंकिता के माता-पिता और शुभचिंतक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि दोषियों को किसी भी कीमत पर राहत न मिले.
लीला सिंह बिष्ट