मेरे खिलाफ पूर्वाग्रह से काम कर रहा है ईडीः विजय माल्या

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा खुद की और अपनी एक कंपनी की 1,411 रुपये की संपत्ति अटैच (कुर्क) किए जाने के एक दिन बाद शराब कारोबारी विजय माल्या ने रविवार को कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए न तो कोई औचित्य है, न ही कानूनी आधार है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां उनके खिलाफ अत्यधिक पूर्वाग्रह से काम कर रही हैं.

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विजय माल्या विजय माल्या

मोनिका शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2016,
  • अपडेटेड 1:18 AM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा खुद की और अपनी एक कंपनी की 1,411 रुपये की संपत्ति अटैच (कुर्क) किए जाने के एक दिन बाद शराब कारोबारी विजय माल्या ने रविवार को कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए न तो कोई औचित्य है, न ही कानूनी आधार है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां उनके खिलाफ अत्यधिक पूर्वाग्रह से काम कर रही हैं.

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कर्ज चुकाना मुश्किल बना रही है ईडी
ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए माल्या ने कहा, 'मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (पीएमएलए) के तहत जो है, वह किंगफिशर एयरलाइन के शुरू होने से कई साल पहले की है. ईडी द्वारा की गई सिलसिलेवार कार्रवाई के पीछे कोई औचित्य या कानूनी आधार नहीं है. ईडी बैंकों का पैसा चुकाने के लिए संसाधन जुटाने को अब और मुश्किल बना रही है.' उन्होंने एक बयान में कहा, 'विशुद्ध रूप से ऋण वसूली जैसे दीवानी विषयों को बगैर किसी आधार के अपराधिक आरोपों के साथ जोड़ा जा रहा है.'

मेरी समझ से बाहर है ईडी का एक्शन
माल्या ने कहा कि मीडिया में आई खबरें और ईडी का एक ट्वीट संकेत देता है कि ईडी ने मेरी और यूनाइटेड ब्रीवरीज होल्डिंग लिमिटेड से जुड़ी विभिन्न संपत्तियां कुर्क की हैं. यह एक सार्वजनिक कंपनी है और ईडी की किसी जांच का विषय नहीं है. माल्या ने कहा कि ईडी के ताजे कदम से लगता है कि यह ऐसे कारणों को लेकर मुझे फरार घोषित करने के लिए पीएमएलए अदालत का रूख करने का है, जो मेरी समझ से बाहर हैं.

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ईडी ने नहीं भेजा था कोई समन
उन्होंने कहा कि वह जिनिवा में बैठक के लिए भारत से निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक दो मार्च को रवाना हुए थे. उस समय नहीं हुई थी और उन्हें कोई समन जारी नहीं किया गया था. माल्या ने बताया कि सभी सरकारी एजेंसियां उन्हें पेशी से मिली पिछली छूटों को रद्द कराने के लिए विभिन्न अदालतों में जा रही हैं ताकि मेरे खिलाफ और भी गैर जमानती वारंट जारी हो सके. यह सभी मेरे प्रत्यर्पण के लिए एक मामला बनाने को लेकर एक सामूहिक प्रयास लगता है.

समाधान निकालने से बैंकों से संपर्क
उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से लगता है जैसे ये एजेंसियां अत्यधिक पूर्वाग्रह वाली जांच कर रही है और मुझे बगैर मुकदमे के पहले ही दोषी ठहरा चुकी हैं जिसके बाद मुझे खुद को बेकसूर साबित करने की जरूरत होगी. उन्होंने बताया कि वह बैंकों से संपर्क कर उनसे एक समिति नामित करने का अनुरोध कर रहे हैं जो बैठकर उनके साथ एक बार में समाधान कर लें.

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