Beat Report: क्या तेजस्वी के अल्टीमेटम के आगे झुकी बिहार सरकार...छात्रों पर दर्ज FIR रातोरात ली वापस

बिहार पुलिस ने प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर दर्ज कर की गई FIR रातो रात वापस ले लिया. विपक्ष का दावा है कि बिहार सरकार ने तेजस्वी यादव के प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन के अल्टीमेटम के बाद ये फैसला लिया है. वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार के आदेश के बाद यह कार्रवाई हुई है.

Advertisement
तेस्जवी यादव ने रविवार को बिहार सरकार से छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग की थी. (फोटो-PTI) तेस्जवी यादव ने रविवार को बिहार सरकार से छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग की थी. (फोटो-PTI)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

बिहार की राजनीति में सोमवार देर रात एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला. दरअसल, राज्य सरकार ने हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमों (FIR) और कानूनी कार्रवाइयों को वापस लेने का अचानक फैसला कर लिया. इस फैसले के बाद से बिहार की सियायत में नया घमासान शुरू हो गया है.

प्रशासन के छात्रों पर दर्ज FIR रातों रात वापस लेने के बाद विपक्ष के कई नेता अलग-अलग बयानबाजी कर रहे है. विपक्ष का साफ कहना है कि बिहार सरकार ने यह कदम आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव के भारी दबाव में आकर उठाया है.

Advertisement

दरअसल, पटना में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए छात्र और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव विदेश गए हुए थे. दूसरी पार्टियों और सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके लिए तेजस्वी यादव को जमकर ट्रोल भी किया था. हालांकि विदेश दौरे से लौटते ही तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया था.

तेजस्वी ने बिहार वापसी के बाद रविवार को सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर 28 जुलाई की आधी रात तक छात्रों पर से सारे केस वापस नहीं लिए गए, तो 29 जुलाई की सुबह 7 बजे से आरजेडी पूरे राज्य में एक बड़ा आंदोलन शुरू कर देगी. हालांकि इस पूरे मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि तेजस्वी की इस डेडलाइन के खत्म होने के कुछ ही घंटों के अंदर बिहार सरकार ने केस वापसी का ऐलान कर दिया.

यह भी पढ़ें: 22 साल के GenZ ने बिहार सरकार की वेबसाइट में ढूंढी बड़ी खामी, करोड़ों लोगों का आधार और पेंशन डेटा हो सकता था लीक

Advertisement

आखिर सरकार ने इतनी जल्दी क्यों घुटने टेक दिए?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार इस फैसले को पहले भी लागू कर सकती थी, क्योंकि 25 जुलाई को ही दिल्ली में छात्रों और केंद्र के बीच एक सहमति बन गई थी. इस सहमति के मुताबिक, देश भर में प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई FIR वापस ले ली जाएगा. इस पर विपक्ष का दावा है कि बिहार सरकार ने तब तक इंतजार किया जब तक तेजस्वी ने आंदोलन की धमकी नहीं दे दी.

वहीं दूसरी ओर इस हड़बड़ी के पीछे 30 जुलाई को होने वाला बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव माना जा रहा है. दरअसल, प्रदर्शनकारी छात्रों पर सबसे ज्यादा केस गांधी मैदान और कोतवाली थानों में दर्ज हुए थे, जो बांकीपुर इलाके में आते हैं. वोटिंग से ठीक दो दिन पहले छात्रों और उनके परिवारों की नाराजगी मोल लेना सरकार के लिए चुनावी रूप से भारी पड़ सकता था. इसलिए उपचुनाव से दो दिन पहले ही बिहार सरकार ने छात्रों पर दर्ज FIR को रातों-रात वापस ले लिया.

यह भी पढ़ें: बिहार में भी पेपर लीक पर बनाए गए तीन फास्ट ट्रैक कोर्ट

फिलहाल, आरजेडी इसे अपनी बहुत बड़ी राजनीतिक जीत बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि यह फैसला छात्रों के साथ बनी सहमति के तहत लिया गया है. विपक्ष के नेता या किसी के दबाव में बिहाक सरकार ने यह फैसला नहीं किया है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »