पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए बिहार में पहली बार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं. पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने पटना, लखीसराय और पूर्णिया में तीन फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया है. इन अदालतों में पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों की त्वरित सुनवाई की जाएगी.
इन विशेष अदालतों में पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई होगी. सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाए, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और परीक्षाओं की पारदर्शिता बनी रहे.
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फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए अलग रोस्टर तैयार किया गया है. इन अदालतों में मामलों की प्राथमिकता के आधार पर नियमित सुनवाई होगी. साथ ही गवाहों के बयान और साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग भी तेजी से कराई जाएगी, जिससे मुकदमों में अनावश्यक देरी न हो.
फास्ट ट्रैक कोर्ट की किस-किस को मिली जिम्मेदारी?
सरकार ने तीनों जिलों में जजों की भी नियुक्ति कर दी है. पटना में एडीजे गौरव सिंह, लखीसराय में एडीजे सीमा भारतीय और पूर्णिया में एडीजे अमन कुमार ठाकुर को फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
बिहार में और भी कई पेपर लीक की चल रही जांच
पटना में पहले से कई चर्चित भर्ती परीक्षा घोटालों की सुनवाई चल रही है. इनमें TRE-3 शिक्षक भर्ती, सिपाही भर्ती परीक्षा, 67वीं बीपीएससी पीटी और एईडीओ पेपर लीक जैसे मामले शामिल हैं. वहीं लखीसराय में री-नीट परीक्षा में कथित धांधली का मामला सामने आया था, जबकि पूर्णिया में SSC MTS परीक्षा से जुड़े धांधली के मामलों की जांच चल रही है.
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पीएम मोदी ने दिया फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आदेश
राज्य सरकार का मानना है कि विशेष अदालतों के गठन से पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के मामलों का जल्द निपटारा होगा. इससे परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, दोषियों पर समय रहते कार्रवाई होगी और अभ्यर्थियों का भर्ती परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा. पीएम मोदी ने बीते दिनों छात्रों के प्रदर्शनों के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और मामले के जल्द निपटारे का आदेश किया था.
शशि भूषण कुमार