धर्मेंद्र प्रधान फिर हुए एक्टिव, Gen Z के बीच दिखे... क्या कमबैक करने का है प्लान?

छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते इस्तीफा देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एक नई रणनीति के तहत सीधे छात्रों और Gen Z के बीच अपनी पैठ बनाने में जुट गए हैं. ओडिशा की जीएम यूनिवर्सिटी से लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ संवाद कर युवा राजनीति की नब्ज समझने में जुटे हैं.

Advertisement
धर्मेंद्र प्रधान का छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम (Photo-X) धर्मेंद्र प्रधान का छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम (Photo-X)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

पेपर लीक मामले पर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था. मंत्री पद की कुर्सी छोड़ने के बाद वे एक बार फिर राजनीतिक पिच पर सक्रिय हो गए हैं. इस बार वे एक नई रणनीति के तहत सीधे छात्रों और Gen Z (युवा पीढ़ी) के साथ संवाद करते नजर आ रहे हैं.

Advertisement

इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान सबसे पहले 9 अगस्त को ओडिशा की जीएम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे. इसके बाद गुरुवार को वे दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में छात्रों के साथ नजर आए. इसके अलावा लखनऊ में एक फाइव स्टार होटल के कार्यक्रम में भी शामिल होने पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात बृजभूषण शरण सिंह सहित पार्टी के कई बड़े नेताओं से हुई.

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को यह कहते हुए इस्तीफा दिया था कि वे छात्रों के भविष्य की रक्षा करना चाहते हैं और नहीं चाहते कि राष्ट्रविरोधी ताकतें इन विरोध प्रदर्शनों का अनुचित लाभ उठाएं. अब जीएम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम से लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी  के छात्रों के बीच उनकी उपस्थिति साफ दर्शाती है कि वे युवा राजनीति की नब्ज को समझने और साधने की कवायद में जुटे हैं.

जीएम यूनिवर्सिटी से डीयू के छात्रों तक का सफर

Advertisement

भाजपा सांसद धर्मेंद्र प्रधान 9 अगस्त को भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने Gen Z से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने यह खुलकर स्वीकार किया कि Gen Z एक ऐसी सामाजिक और राजनीतिक ताकत है, जिसे खारिज या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्ट कहा था कि देश के युवाओं के संकल्प और उम्मीदों के सामने शिक्षा मंत्री पद की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं.

गुरुवार को उन्होंने डीयू के छात्रों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने डीयू के छात्र श्रीकृष्णा रंजन पात्रा द्वारा लिखित पुस्तक 'द भारत मॉडल: नेविगेटिंग द 21स्ट सेंचुरी' का विमोचन किया. यह पुस्तक 21वीं सदी में 'विकसित भारत' की यात्रा और उसमें युवाओं की भूमिका पर केंद्रित है। सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने पुस्तक विमोचन की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा कीं, जिनमें वे डीयू के छात्रों के बीच बैठकर आत्मीय संवाद करते दिखे.

युवाओं के साथ सीधे संवाद की रणनीति

धर्मेंद्र प्रधान की हालिया सियासी गतिविधियों में एक खास पैटर्न नजर आ रहा है. दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच पहुंचकर युवा छात्र की पुस्तक का विमोचन करना इसी रणनीति का हिस्सा है. उन्होंने भुवनेश्वर में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि युवाओं के विरोध को दबाने या उनका विरोध करने के बजाय उन्हें समझना, उनकी आकांक्षाओं को सही दिशा देना और उन्हें गुमराह होने से बचाना समय की मांग है.

Advertisement

भाजपा सांसद ने कहा कि भले ही Gen Z की जिद के कारण परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हुईं, लेकिन उन्हें यह अहसास हुआ कि नई पीढ़ी का विरोध करने के बजाय उनके दृष्टिकोण को समझने की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'भले ही कुछ लोगों ने Gen Z को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन मंत्री पद मेरे लिए कभी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं था.' इस तरह वे युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देकर यह संदेश दे रहे हैं कि वे युवाओं की सोच, उनके करियर और उनकी रचनात्मकता के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं.

दूसरी तरफ, लखनऊ में फाइव स्टार होटल के उद्घाटन जैसे नागरिक और व्यावसायिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी यह साबित करती है कि वे केवल बौद्धिक या राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि युवाओं के रोजगार, उद्यमिता और आधुनिक शहरी संस्कृति के साथ भी अपना जुड़ाव बनाए रखना चाहते हैं.

छात्रों के साथ जुड़ाव और भविष्य का रोडमैप

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले धर्मेंद्र प्रधान के लिए छात्र राजनीति कोई नई बात नहीं है. वे परिसर की कार्यप्रणाली और छात्र असंतोष के समीकरणों से भलीभांति परिचित हैं. वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों और हालिया छात्र आंदोलनों के बाद, Gen Z के बीच उनकी यह निरंतर आवाजाही केवल एक संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी रणनीति है.

Advertisement

Gen Z पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक भाषणों के बजाय सीधे संवाद, सहानुभूति और रचनात्मक प्रोत्साहन को अधिक प्राथमिकता देती है. यही वजह है कि धर्मेंद्र प्रधान इसी शैली को अपनाकर युवाओं के बीच अपनी पैठ को न केवल बनाए रख रहे हैं, बल्कि उसे नए सिरे से मजबूत कर रहे हैं. इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी भी उनके समर्थन में पूरी तरह खड़ी दिख रही है.

मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जब वे संसद पहुंचे, तो भाजपा सांसदों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया, अब जिस तरह से धर्मेंद्र प्रधान सक्रिय नजर आ रहे हैं, उसके सियासी अर्थ एकदम स्पष्ट है,जिसके चलते सवाल उठने लगे हैं कि क्या कमबैक करने का प्लान है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »