30 दिन जेल में रहे तो मंत्रियों की जाएगी कुर्सी? विधेयक पर इस दिन आ सकती है JPC रिपोर्ट

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान करने वाले विवादित 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. रिपोर्ट में इस प्रावधान को बरकरार रखते हुए दुरुपयोग रोकने के लिए कुछ सुरक्षा उपाय सुझाए जाने की संभावना है.

Advertisement
यह विधेयक संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है. (File Photo- ITG) यह विधेयक संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है. (File Photo- ITG)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:14 PM IST

देश की सियासत और शासन व्यवस्था से जुड़े विवादास्पद '130वें संविधान संशोधन विधेयक' को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) आगामी 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट संसद को सौंप सकती है. 

सूत्रों के मुताबिक, समिति अपनी रिपोर्ट में विधेयक के सबसे चर्चित और विवादित प्रावधान को बरकरार रखने की सिफारिश कर सकती है. हालांकि, इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी सुझाए जा सकते हैं.

Advertisement

इस विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले गंभीर अपराध के मामले में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वतः अपने पद से हटाया जा सके. प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार, 31वें दिन राष्ट्रपति या राज्यपाल की ओर से उसे पदमुक्त करने की प्रक्रिया लागू हो सकती है.

बताया जा रहा है कि जेपीसी अपराधों की प्रकृति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और राजनीतिक प्रतिशोध या कानून के दुरुपयोग की आशंका को कम करने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रावधान जोड़ने की सिफारिश भी कर सकती है.

यह विधेयक संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है. संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह विधेयक पिछले वर्ष अगस्त में संसद में पेश किया था. इसके बाद भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया था, जिसे विधेयक की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

Advertisement

हालांकि, इस विधेयक को लेकर शुरुआत से ही राजनीतिक विवाद बना हुआ है. कांग्रेस समेत विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन के अधिकांश सदस्यों ने यह आरोप लगाते हुए जेपीसी की कार्यवाही का बहिष्कार किया था कि सत्ता पक्ष विपक्ष के सुझावों पर गंभीरता से विचार नहीं करेगा.

विपक्ष का कहना है कि यह प्रस्ताव प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि किसी व्यक्ति को अदालत से दोषी ठहराए जाने से पहले केवल हिरासत के आधार पर संवैधानिक पद से हटाना अलोकतांत्रिक और संघीय ढांचे के विपरीत है.

वहीं, सरकार का तर्क है कि 30 दिनों की अवधि पर्याप्त है और इस दौरान संबंधित व्यक्ति को कम से कम तीन बार जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने का अवसर मिल सकता है. सरकार का मानना है कि लंबे समय तक हिरासत में रहने वाले व्यक्ति का संवैधानिक पद पर बने रहना प्रशासनिक और नैतिक दोनों दृष्टि से उचित नहीं है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »