6 अगस्त की तारीख थी. तमिलनाडु एक्सप्रेस अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी. ट्रेन के एक अनरिजर्व कोच में यात्रियों के बीच एक लाल रंग का सूटकेस रखा था. शुरुआत में किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया. लेकिन जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ी, उस सूटकेस से आने वाली बदबू तेज होती गई. आखिरकार ट्रेन जब आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पहुंची तो यात्रियों ने इसकी शिकायत पुलिस से की.
पुलिस मौके पर पहुंची. सूटकेस खोला गया. और उसके अंदर जो मिला, उसे देखकर पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए. सूटकेस में एक महिला के शव के टुकड़े थे. सिर गायब था. यानी किसी ने हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटा, उन्हें लाल सूटकेस में भरा और फिर उसे तमिलनाडु एक्सप्रेस में छोड़ दिया. पुलिस के सवाल था कि ये महिला कौन थी? उसकी हत्या कहां हुई? और आखिर शव को ट्रेन में रखकर इतने दूर आगरा तक क्यों भेजा गया?
जांच शुरू हुई तो पुलिस ने सबसे पहले ट्रेन के CCTV फुटेज और यात्रियों की गतिविधियों को खंगालना शुरू किया. पुलिस की कोशिश थी कि पता लगाया जाए कि ये सूटकेस ट्रेन में कहां और किसने रखा था. फुटेज को पीछे की तरफ खंगाला गया. कड़ियां जुड़ती गईं और जांच चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन तक पहुंच गई.
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CCTV में एक पुरुष और एक महिला दिखाई दिए. दोनों के साथ वही लाल रंग का सूटकेस था, जो बाद में आगरा कैंट स्टेशन पर मिला था. अब पुलिस को यकीन हो गया था कि मामले की शुरुआत चेन्नई से हुई है. जांच आगे बढ़ी तो दोनों की पहचान माणिकुद्दीन लस्कर और भगवती माजी के तौर पर हुई. पुलिस को पता चला कि दोनों चेन्नई के गुडुवांचेरी इलाके में किराये के एक मकान में रह रहे थे. पुलिस टीम उस मकान तक पहुंची.
यहां कहानी और खौफनाक हो गई. जब पुलिस ने मकान की तलाशी ली तो वहां भी महिला के शरीर के कटे हुए हिस्से बरामद हुए. जांच के दौरान पुलिस को एक बड़ा बर्तन भी मिला. बताया गया कि इसी तरह के बड़े बर्तन में बिरयानी पकाई जाती है. पुलिस के मुताबिक, इस बर्तन से भी महिला के शरीर के हिस्से बरामद हुए. अब मामला सिर्फ ट्रेन में मिले एक सूटकेस का नहीं रह गया था.
पुलिस के सामने हत्या की पूरी कहानी थी, जिसकी कड़ियां चेन्नई के एक किराये के मकान से निकलकर तमिलनाडु एक्सप्रेस और फिर आगरा कैंट रेलवे स्टेशन तक पहुंच रही थीं. लेकिन अहम सवाल यह था कि आखिर महिला कौन थी?
कौन थी लाल सूटकेस वाली महिला?
जांच आगे बढ़ी तो मृतका की पहचान 38 साल की हयात निशा के तौर पर हुई. पुलिस अब यह जानने में जुट गई कि हयात निशा का माणिकुद्दीन और भगवती से क्या संबंध था. हत्या किस वजह से की गई और वारदात में वास्तव में कौन-कौन शामिल था. इधर पुलिस की तलाश तेज हो चुकी थी. लेकिन आरोपी चेन्नई से निकल चुके थे.
माणिकुद्दीन लस्कर और उसकी पत्नी भगवती माजी पुलिस की पकड़ से बाहर थे. पुलिस उनकी तलाश में अलग-अलग जगहों पर दबिश दे रही थी. आखिरकार पुलिस को माणिकुद्दीन के मणिपुर में होने का सुराग मिला.
तमिलनाडु पुलिस की टीम ने मणिपुर के जिरीबाम जिले के काशिमपुर में दबिश दी और माणिकुद्दीन लस्कर को गिरफ्तार कर लिया. अब उसे ट्रांजिट वारंट पर तमिलनाडु लाया जा रहा है. तमिलनाडु पुलिस के मुताबिक, इस मामले में माणिकुद्दीन और उसकी पत्नी भगवती माजी को मुख्य आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया गया है. पुलिस अब भगवती की तलाश भी कर रही है.
एक लाल सूटकेस से शुरू हुई ये कहानी अब चेन्नई से निकलकर मणिपुर तक पहुंच चुकी है. पुलिस की जांच अभी खत्म नहीं हुई है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि हयात निशा की हत्या आखिर क्यों की गई? क्या हत्या पहले से प्लान की गई थी? शव को इतनी बेरहमी से टुकड़ों में क्यों काटा गया? लाल सूटकेस को तमिलनाडु एक्सप्रेस में रखकर आगरा तक भेजने के पीछे क्या मकसद था?
और इस पूरी वारदात में माणिकुद्दीन और भगवती के अलावा कोई तीसरा शख्स भी शामिल था या नहीं? इन सवालों के जवाब अब आरोपी से पूछताछ और आगे की पुलिस जांच में सामने आएंगे. फिलहाल इतना साफ है कि 6 अगस्त को आगरा कैंट स्टेशन पर मिले उस लाल सूटकेस ने एक ऐसी वारदात का राज खोल दिया, जिसकी शुरुआत चेन्नई से हुई थी और जिसका एक सिरा मणिपुर तक जा पहुंचा.
प्रमोद माधव