बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट में एक और अर्जी, 22 लाख लोगों के नाम कटने पर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल में SIR और उससे जुड़ी लंबित सुनवाइयों को लेकर एक याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी. याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं, खासकर फॉर्म 6 और फॉर्म 7 के आवेदन प्रक्रिया में अंतर को लेकर.

Advertisement
पश्चिम बंगाल के SIR और लंबित सुनवाइयों के संबंध में एक और याचिका दायर की गई है (File Photo) पश्चिम बंगाल के SIR और लंबित सुनवाइयों के संबंध में एक और याचिका दायर की गई है (File Photo)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

पश्चिम बंगाल के SIR और लंबित सुनवाइयों के संबंध में एक और याचिका दायर की गई है. इस याचिका पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होने वाली है. याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग के खुद के आंकड़े ही SIR और वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को लेकर सवाल उठाते हैं. 

इस याचिका में लंबित अपीलों के साथ ही पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनाव और नगरपालिका चुनाव का भी हवाला दिया है. याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या वे 22 लाख लोग अपना नाम जुड़वा पाएंगे जिनकी अपीलें अब तक लंबित हैं. याचिकाकर्ता ने उस प्रेस नोट का हवाला भी दिया जिसमें 20 राज्यों में विशेष नामांकन अभियान के तहत दोबारा नामांकन करने और फॉर्म 6 भरने की बात कही गई है.

Advertisement

याचिकाकर्ता का कहना है कि आंकड़ों से संकेत मिलता है कि सात अगस्त तक पश्चिम बंगाल में कुल 34.13 लाख फॉर्म 6 आवेदनों में से सिर्फ 7.07 लाख नए नामांकन ही किए गए थे.  उनका कहना है कि फॉर्म 6 के तहत 7.26 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए. 

साथ ही, यह भी कहा गया कि लगभग 20 लाख फॉर्म 6 आवेदन या तो प्रक्रियाधीन थे या बिना किसी कार्रवाई के लंबित पड़े रहे. याचिका में कहा गया कि फॉर्म 7 के तहत नाम हटाए जाने के मामले में प्राप्त 6.39 लाख फॉर्म 7 आवेदनों में से 5.72 लाख आवेदनों के परिणामस्वरूप नाम हटा दिए गए.

यह भी पढ़ें: 'TMC के नाम और सिंबल पर तीन महीने में करें अंतिम फैसला', चुनाव आयोग को SC के निर्देश

याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि फॉर्म 6 और फॉर्म 7 के आवेदनों के नतीजों में बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है. उनका कहना है कि जहां एक ओर फॉर्म 6 के सिर्फ 20.7% आवेदनों के तहत नामांकन हुआ और 21.3% खारिज कर दिए गए, वहीं फॉर्म 7 के 89.6% आवेदनों में से सिर्फ 2.3% आवेदन खारिज हुए.

Advertisement

याचिकाकर्ता ने उठाए कई सवाल

उनका कहना है कि यह अंतर गंभीर चिंताएं खड़ी करता है. ​याचिका में यह भी कहा गया है कि SIR से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति की खबरों के बाद चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को आयोग की पूर्ण बैठक बुलाई. उसके बाद आयोग ने प्रेस नोट जारी किया. याचिका में कहा गया है कि प्रेस नोट के माध्यम से चुनाव आयोग के हालिया निर्णय SIR प्रक्रिया के कार्यान्वयन में गंभीर कमियों की ओर इशारा करते हैं और इससे पश्चिम बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरणों के भावी रुख को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है. 

​याचिका में कहा गया, फॉर्म 6 में शामिल वह अनिवार्य शर्त कि पिछली SIR मतदाता सूची में खुद के या माता-पिता/दादा-दादी के दर्ज नाम से संबंधित थी. इसे अब उन राज्यों में फॉर्म 6 से हटाया जा रहा है जहां SIR प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है. 

याचिका में कहा गया कि ​SIR पूरा होने के तुरंत बाद हटाए गए मतदाताओं के फिर से नामांकन के लिए "विशेष अभियान" की घोषणा करना, और इसके साथ ही फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को सुधारना, चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में गंभीर कमियों को उजागर करता है.

यह भी पढ़ें: बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, अब नई तारीख 5 अक्टूबर तय

Advertisement

साथ ही याचिका में यह भी कहा गया कि चुनाव आयोग यह स्पष्ट करने में विफल रहा है कि क्या पश्चिम बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष अपील दायर करने वाले 22 लाख से अधिकनाम हटाए गए मतदाता चुनाव आयोग के प्रेस नोट में दिए गए निर्देशों के अनुसार EROs के समक्ष पुनः नामांकन के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे या नहीं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »