'बंगालियों का जो मन होगा वो खाएंगे', नॉनवेज न खाने वाले बयान पर धीरेंद्र शास्त्री को BJP सांसद का जवाब

पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने धीरेंद्र शास्त्री के 'बंगालियों को दुर्गा पूजा में मांसाहारी न खाने की अपील' पर प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि कोई बाहरी यह तय नहीं करेगा कि बंगाली क्या खाएं या क्या पहनें.

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धीरेंद्र शास्त्री, समिक भट्टाचार्य (Photo: PTI) धीरेंद्र शास्त्री, समिक भट्टाचार्य (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों को मांसाहारी भोजन नहीं खाना चाहिए. समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल के बाहर से आना वाला कोई भी व्यक्ति ये तय नहीं कर सकता कि राज्य के लोग क्या खाएं, या क्या पहनें. 

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धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि जो लोग धार्मिक होने का दावा करते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा पंडाल के पीछे मांसाहारी खाना बनाते हैं, उन्हें धार्मिक नहीं बल्कि पाखंडी कहा जाएगा. साथ ही, उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों से मांसाहारी खाना छोड़ने की अपील की थी. अब धीरेंद्र शास्त्री के इसी बयान पर पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रमुख समिक भट्टाचार्य ने निशाना साधा है. उनका कहना है कि किसी बाहरी व्यक्ति के कहने पर बंगालियों के खान-पान की आदतों और परंपराओं को बदला नहीं जा सकता. 

समिक भट्टाचार्य ने कहा, "मुझे अपनी मर्जी से जीने दें, बंगाली वहीं खाएंगे जो वे खाते आए हैं. क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते?"

समिक भट्टाचार्य ने कहा कि मां काली को बकरे और मांस का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है. उन्होंने कहा कि अष्टमी के दिन पूरी और नवनी के दिन बकरे का मांस खाने की बंगाल में पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है और इसे छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठाता है. 

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यह भी पढ़ें: 'पंडाल के पीछे नॉन-वेज, गंदा खाना हमको नहीं पसंद', बंगाल दुर्गा पूजा पर बोले धीरेंद्र शास्त्री

समिक भट्टाचार्य ने कहा, "हम अष्टमी पर लुची (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाना जारी रखेंगे. कोई भी बंगाल के लोगों को ये नहीं बता सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए."

बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ कहा है कि वे धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान करते हैं लेकिन उनकी निजी राय बंगाली समाज पर थोपी नहीं जा सकती. उन्होंने साफ कहा कि किसी संत या डॉक्टरों को लोगों को शाकााहरी देने की सलाह देने का अधिकार है लेकिन कोई बाहरी व्यक्ति ये तय नहीं कर सकता कि बंगाल के लोग क्या खाएंगे या क्या पहनेंगे.

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