देश के चार राज्यों में बारिश और नदियों के बढ़ते पानी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. उत्तर प्रदेश में नारायणी नदी का तटबंध टूटने से गांवों पर बाढ़ का खतरा है, बिहार में गंडक के पानी से लगातार दबाव बन रहा है,ओडिशा में हालात खराब होने से लाखों लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है.
असम में बच्चे उफनती धाराओं के बीच नाव से स्कूल जाने को मजबूर हैं. यानी कहीं घरों और गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों की जिंदगी की रफ्तार थमी है, तो कहीं सड़कों पर घुटनों तक पानी होने के बावजूद रोजमर्रा की जिंदगी के लिए लोगों को जद्दोजदहद करनी पड़ रही है.
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के तमकुहीराज में पानी का बहाव तेज होने से नारायणी नदी का तटबंध टूट गया. इसके बाद चेन पट्टी और जवाही माली एहतमाली के आसपास के गांवों में पानी बढ़ने लगा.
करीब दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा बताया जा रहा है. एहतियात के तौर पर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह दी जा रही है. इसके साथ ही NDRF और SDRF को रेस्क्यू के लिए लगाया गया है.
बिहार में गंडक ने बढ़ाई चिंता
बिहार के बगहा में नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा है. वाल्मीकिनगर बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है. हाल में कोसी और गंडक के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन भी अलर्ट हुआ है.
ओडिशा में सुरक्षित जगह पर पहुंचाए गए 1.4 लाख लोग
ओडिशा के कई जिलों में बाढ़ का असर दिख रहा है. राज्य सरकार ने पिछले चार दिनों में करीब 1.4 लाख लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया है. 7,834 गांवों के निचले इलाकों से लोगों को बाहर निकाला गया है.
महानदी में भी पानी बढ़ा है और कटक, खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर और केंद्रापड़ा जैसे तटीय जिलों को अलर्ट रखा गया है. बालासोर, भद्रक, जाजपुर और मयूरभंज में भी कई इलाके जलभराव से प्रभावित हैं. अधिकारियों ने स्थानीय बाढ़ के साथ भूस्खलन के खतरे पर भी नजर रखने को कहा है.
असम में नदी पार कर स्कूल जा रहे बच्चे
असम के धेमाजी में तस्वीर और भी परेशान करने वाली है. जोनई क्षेत्र के चेंगाजन गोवाला गांव के बच्चे लाली और बुड़ी साउती नदियों को छोटी नावों से पार करके स्कूल पहुंच रहे हैं. गांव में स्थायी पुल नहीं है.
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स्थानीय लोगों के मुताबिक पानी बढ़ने पर बच्चों का स्कूल जाना और भी मुश्किल हो जाता है. ग्रामीण चंदन माझी ने बताया कि नदी में गिरने से हाल में एक बच्ची की मौत हुई और पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं. खतरे को देखते हुए ग्रामीण मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से इस इलाके में स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं.
इन चारों राज्यों में बाढ़ की गंभीरता अलग-अलग स्तर पर है. लेकिन परेशानी की जड़ एक ही है. बढ़ता पानी और उससे जूझती रोजमर्रा की जिंदगी. इन मुश्किल हालातों में कहीं प्रशासन लोगों को खतरे वाले इलाकों से बाहर निकाल रहा है, तो कहीं छोटे बच्चे हर दिन जोखिम उठाकर अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं.
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