'खर्च की परवाह किए बिना इलाज करे गंगाराम अस्पताल...', एसिड अटैक पीड़िता के उपचार पर SC का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह एसिड अटैक पीड़िता को अस्पताल में भर्ती रखकर उनका इलाज खर्च की चिंता किए बिना सुनिश्चित करे.

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सुप्रीम कोर्ट ने गंगाराम अस्पताल को निर्देश दिए हैं (File Photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट ने गंगाराम अस्पताल को निर्देश दिए हैं (File Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:08 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज को लेकर अहम आदेश दिया है. अदालत ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह पीड़िता को अस्पताल में भर्ती रखकर उनका इलाज सुनिश्चित करे. कोर्ट ने कहा कि इलाज में आने वाले खर्च की परवाह किए बिना पीड़िता को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. इनमें दवाइयां, प्लास्टिक सर्जरी और जरूरत के मुताबिक अन्य उपचार भी शामिल हैं.

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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में 6 अक्टूबर को एसिड अटैक का शिकार हुई पीड़िता की याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में आरोप लगाया गया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद निजी अस्पताल पीड़िता को उचित इलाज उपलब्ध नहीं करा रहे हैं.

'इलाज में खर्च की चिंता न करे अस्पताल'

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सर गंगाराम अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया कि पीड़िता को सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं दी जाएं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलाज में कितना भी खर्च आए, उसके आधार पर पीड़िता के उपचार में कोई कमी नहीं होनी चाहिए. अदालत ने कहा कि पीड़िता को जरूरी दवाइयां, प्लास्टिक सर्जरी और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अन्य सभी प्रकार का उपचार उपलब्ध कराया जाए.

इलाज का बिल सुप्रीम कोर्ट को भेज सकेगा अस्पताल

सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल को इलाज के खर्च को लेकर भी राहत दी है. अदालत ने कहा कि सर गंगाराम अस्पताल प्रबंधन इलाज से संबंधित बिल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भेज सकता है. इसके बाद अदालत फीस के भुगतान को लेकर उचित निर्देश जारी करेगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक पीड़िता को अस्पताल में भर्ती रहकर इलाज कराने की जरूरत है, तब तक उसे डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा.

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इस आदेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि एसिड अटैक पीड़िता को इलाज के दौरान आर्थिक कारणों से किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और उसे आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहें.
 

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