'दूसरी आजादी के लिए आपकी मदद चाहिए...', 15 अगस्त से पहले सोनम वांचुक की लोगों से अपील

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर वीडियो मैसेज पोस्ट कर कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और इस दौरान देश और उसके भविष्य के बारे में सोचते रहे. वांगचुक ने कहा कि भारत से पीछे या बराबरी पर रहने वाले कई देश आज उससे काफी आगे निकल चुके हैं. उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए प्रति व्यक्ति जीडीपी का जिक्र किया.

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सोनम वांगचुक ने छात्रों के हालिया आंदोलनों का जिक्र किया (File Photo- PTI) सोनम वांगचुक ने छात्रों के हालिया आंदोलनों का जिक्र किया (File Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:22 PM IST

सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले देशवासियों से एक 'शांत क्रांति' की शुरुआत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2047 तक एक विकसित और सम्मानित राष्ट्र बनाना है, तो देश को अपने राजनीतिक नेतृत्व को चुनने के तरीके में अमूल्य बदलाव लाना होगा।

वांगचुक ने सोशल मीडिया पर वीडियो मैसेज पोस्ट कर कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और इस दौरान देश और उसके भविष्य के बारे में सोचते रहे. उन्होंने देश के लोगों से ऐसे निस्वार्थ, निर्भीक और चरित्रवान लोगों के नाम सुझाने की अपील की है, जो भारत के भविष्य को लेकर नई सोच देने में सक्षम हों. देश की मौजूदा स्थिति को देखकर उन्हें निराशा होती है.

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'2047 में विकसित देश नहीं बने तो...'

वांगचुक ने कहा कि भारत से पीछे या बराबरी पर रहने वाले कई देश आज उससे काफी आगे निकल चुके हैं. उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए प्रति व्यक्ति जीडीपी का जिक्र किया.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो 2047 तक भारत विकसित देश बनने के लक्ष्य से दूर रह सकता है. उनके मुताबिक, देश की शिक्षा व्यवस्था पिछड़ी रही तो देश का भविष्य भी पिछड़ा रहेगा.

'पार्टियों की नहीं, व्यवस्था बदलने की जरूरत'

सोनम वांगचुक ने छात्रों के हालिया आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों ने बदलाव की मांग की और कुछ बदलाव देखने को भी मिले. उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का भी जिक्र किया, लेकिन कहा कि नए शिक्षा मंत्री से भी किसी बड़े बदलाव की उम्मीद फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है.

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उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के साथ अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारों ने कार्रवाई की. इसलिए समस्या किसी एक राजनीतिक पार्टी तक सीमित नहीं है.

वांगचुक ने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय आंदोलन के बाद सरकार बदली, लेकिन करीब 12 साल बाद भ्रष्टाचार और अन्याय नए रूप में पहले से ज्यादा बड़ी चुनौती बनकर सामने है.

'नेता सही नहीं होंगे तो देश गलत रास्ते पर जाएगा'

वांगचुक ने कहा कि देश में बड़ा बदलाव और शांतिपूर्ण क्रांति इसलिए जरूरी है, ताकि चुनावों के जरिए ऐसे नेताओं को आगे लाया जा सके जो देश को सही दिशा दे सकें. उन्होंने कहा, 'जब तक नेता सही नहीं होंगे, पूरा देश गलत रास्ते पर चलेगा.'

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि देश में आज भी कई ऐसे नेता मौजूद हैं जो ईमानदारी और सही रास्ते पर चलते हैं और ऐसे नेताओं का वह सम्मान करते हैं.

'लगभग आधे सांसदों पर आपराधिक मामले'

संसद में आपराधिक मामलों वाले सांसदों को लेकर भी वांगचुक ने चिंता जताई. उन्होंने दावा किया कि करीब आधे सांसदों पर आपराधिक मामले हैं और करीब एक तिहाई पर हत्या, दुष्कर्म और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं.

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उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी एक पार्टी या सत्ता पक्ष-विपक्ष की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश की व्यवस्था को लेकर चिंता जता रहे हैं.

वांगचुक ने कहा कि वह देश के "बेस्ट माइंड्स" को एक साथ लाकर उनसे सलाह और सुझाव लेना चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी तलाश सिर्फ ऐसे बुद्धिजीवियों की नहीं है जो केवल विचार रखते हों.

उन्होंने ऐसे लोगों के नाम सुझाने की अपील की जो निःस्वार्थ, निर्भीक, चरित्रवान और सिद्धांतों पर चलने वाले हों और देश के भविष्य के लिए कुछ करने की क्षमता रखते हों.

उन्होंने कहा कि लद्दाख में बैठे होने के कारण उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ऐसे लोगों के बारे में जानकारी नहीं है. इसलिए उन्होंने लोगों से अपने राज्य और क्षेत्र से कम से कम एक ऐसे व्यक्ति का नाम सुझाने को कहा.

'क्या हम भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू कर सकते हैं?'

वांगचुक ने लोगों से सवाल किया कि क्या मिलकर भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों के साथ देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में जाकर संवाद करना चाहते हैं और लोगों से देश के भविष्य को लेकर सुझाव लेना चाहते हैं.

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उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लोगों से इसे अपने लिए एक भेंट के तौर पर ऐसे योग्य लोगों के नाम सुझाने की अपील की.

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