राहुल गांधी को लेकर अपने बयान पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शनिवार(8 अगस्त) को सफाई दी. उन्होंने अपने बयान में कहा था कि राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम जनरेशन Z के बीच उतना असर नहीं छोड़ सका, जितना जंतर-मंतर का प्रदर्शन. थरूर ने कहा कि मीडिया उनके बयान को 'अपनी ही पार्टी या उसके नेतृत्व पर हमला' बता रहा है, जबकि उनका मकसद राजनीतिक दलों में नई पीढ़ी के लिए जगह बनाने की जरूरत पर जोर देना था.
थरूर ने शुक्रवार को महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि सभी विपक्षी दलों को यह देखना होगा कि उन्होंने जंतर-मंतर पर पिछले महीने मौजूद युवाओं के लिए अपनी पार्टियों में आने का रास्ता नहीं बनाया. उन्होंने कहा कि स्थापित राजनीतिक दल तब तक रिलेवेंट नहीं रहेंगे, जब तक वे उन नई आवाजों को नहीं सुनते, जिन्हें अब तक नहीं सुना गया है.
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर सवाल पूछे जाने पर थरूर ने माना था कि यह जंतर-मंतर के प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा. उन्होंने कहा था कि पार्टियों को खुद से पूछना चाहिए कि वे कहां चूक गईं और क्या वे जनरेशन Z की आवाज समझने में नाकाम रहीं.
बयान को गलत तरीके से पेश किया गया
शनिवार को थरूर ने कहा कि पत्रकारों ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पूरी बातचीत का वीडियो साझा करते हुए लोगों से इसे देखने और खुद फैसला करने को कहा. थरूर के कार्यालय ने भी बातचीत के एक हिस्से का वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत के युवाओं को राजनीति का सिर्फ दर्शक नहीं रहना चाहिए. राजनीतिक दलों को अपने दरवाजे खोलने, नेतृत्व तक पहुंचने के रास्ते बनाने और नई पीढ़ी को राजनीति को आकार देने की ताकत देने की जरूरत है.
थरूर ने यह भी कहा कि स्थापित पार्टियों में पदानुक्रम, पुराने राजनीतिक ढांचे और राजनीतिक नेटवर्क के बीच किसी नए युवा के लिए जगह बनाना आसान नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या युवाओं को सिर्फ बड़ी रैलियों में भीड़ बढ़ाने और जमीनी काम करने तक सीमित रखा जाएगा या उन्हें वास्तव में बदलाव लाने की भूमिका मिलेगी. उन्होंने कहा कि अगर स्थापित दल नई आवाजों को नहीं सुनेंगे, तो वे अप्रासंगिक हो जाएंगे.
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