सोमवार को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष दो याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई का उल्लेख किया गया. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी एक याचिका दायर की है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि चूंकि आप सभी यहां उपस्थित हैं, आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि लोकतांत्रिक गतिविधियां अवश्य होनी चाहिए. लेकिन कम से कम सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली में यह प्रभावित नहीं होना चाहिए.
मैंने अधिकारियों से भी अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक मुद्दों में न घसीटा जाए. इंटरनेट पहुंच में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. कोर्ट की कार्यवाही में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए और न ही कोर्ट परिसर में प्रवेश में कोई रुकावट होनी चाहिए. SCBA ने कहा कि हमने स्पष्ट किया है कि वकील अदालत की कार्यवाही में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करेंगे.
याचिकाओं पर मंगलवार को होगी सुनवाई
वकीलों के प्रवेश में बाधा डालने और उनके साथ मारपीट के आरोपों पर दायर याचिकाओं पर मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई होगी. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की हिरासत से जुड़े अन्य सभी मामलों पर भी इसी दिन सुनवाई की जाएगी.
प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर दायर एक अन्य जनहित याचिका (PIL) का भी आज अदालत में उल्लेख किया गया. वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायणन ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि कोई भी प्रकाशित निषेधाज्ञा (Prohibitory Order) उपलब्ध नहीं है. मैं इस पीठ से अनुरोध करता हूं कि पुलिस को भी शांति बनाए रखने का निर्देश दिया जाए. अदालत ने हमसे अनुशासन बनाए रखने को कहा था, हम अनुरोध करते हैं कि पुलिस को भी यही निर्देश दिए जाए.
CJI ने कहा कि हर व्यक्ति, हर वकील और बार के हर सदस्य को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है. लेकिन मैं यह सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर नहीं चाहता. गोपाल शंकर नारायणन ने कहा कि उपद्रवियों के समूह लोगों पर लाठियों से हमला कर रहे हैं और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. वकीलों को घसीटा जा रहा है और हिरासत में लिया जा रहा है. हम अदालत से वकीलों की मदद के लिए आगे आने का अनुरोध करते हैं.
संजय शर्मा