पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को एंटी पेपर लीक बिल पर बोलते हुए कहा कि 'मुझसे कई लोग पूछ रहे थे कि नीट पेपर लीक पर चुप क्यों हो? नीट पेपर लीक पर कब बोलोगे?' उन्होंने अपने चुप रहने का कारण सदन में बताया. आम आदमी पार्टी से निर्वाचित हुए और अब भारतीय जनता पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि 'पहले जब विपक्ष में था, तब सवाल उठाना मेरा काम था और मैंने वह काम ईमानदारी से किया.'
मेरा रोल बदल गया है- राघव चड्ढा
उन्होंने कहा कि अब ट्रेजरी बेंच पर हूं, ऐसे में मेरा रोल बदल गया है. अब मेरी जिम्मेदार सवाल पूछना नहीं समाधान देना है. राघव चड्ढा ने कहा कि इसलिए हमने यह तय किया था कि हम जब इस समस्या का समाधान लेकर आएंगे, मैं तब बोलूंगा और आज वह दिन है. आज हमारी सरकार इस बीमारी का इलाज लेकर आई है. उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने आकर मैं भी बोल सकता था, लेकिन नहीं. हम इस समस्या का पक्का इलाज लेकर आए हैं.
'आपका गुस्सा जायज...', नीट छात्रों से बोले राघव
राघव चड्ढा ने कहा कि 'नीट के छात्रों से कुछ कहना चाहूंगा. आपका गुस्सा जायज है, आपकी भावना जायज है. आपका दर्द जायज है. उन्होंने कहा कि आपने जब अपना दर्द बताया, पकी बात प्रधानमंत्री ने सुनी और गार्जियन की तरह सिस्टम बदला. हमारी सरकार पेपर लीक के खिलाफ पहली बार एक फ्रेमवर्क लेकर आई है. जब बात छात्रों की आई, सरकार ने सुना और काम किया.'
'छात्रों ने जिस उम्मीद के साथ अपनी बात प्रधानमंत्री के सामने रखी, तमाम एक्शन लिए गए. मात्र 75 दिन में चार्जशीट भी फास्ट ट्रैक कोर्ट में दायर करा दी गई. जांच को लटकाया नहीं. अगली बार से नीट का पेपर ओएमआर शीट नहीं, कम्प्यूटर सिस्टम से कराया जाएगा. अपराधी के मन में खौफ पैदा करने के लिए ऐसा कानून लेकर आई है, जिसके पास होने के बाद कोई अपराधी सपने में भी पेपर लीक की बात सोचेगा तो उसकी रूह कांप जाएगी.'
'पेपर लीक एक क्रॉनिक डिजीज'
अपने भाषण में राघव चड्ढा ने जवाबदेही और नैतिकता का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में यह नहीं देखा जाना चाहिए कि घटना किस राज्य में हुई, किस मंत्री के कार्यकाल में हुई या किस राजनीतिक दल की सरकार थी. उनके अनुसार पेपर लीक पूरे देश की समस्या है और इसे एक "पैन इंडिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम" तथा "क्रॉनिक डिजीज" की तरह देखा जाना चाहिए.
इसी संदर्भ में उन्होंने पंजाब का उदाहरण भी दिया. चड्ढा ने कहा कि 19 जुलाई 2026 को पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं. उनके मुताबिक परीक्षा में ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए लाइव नकल कराई जा रही थी और कथित चीटिंग सिंडिकेट अभ्यर्थियों से नकल कराने के लिए 13-13 लाख रुपये तक वसूल रहा था.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक किसी एक राज्य या दल की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. इसलिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों को ऐसे सख्त कानून का समर्थन करना चाहिए, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास परीक्षा व्यवस्था में फिर से बहाल हो सके.
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