पिछले कुछ वक्त में पूर्वांचल में मंदिर दर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ लोग पहुंचे हैं. सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले जवाब से पता चला है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में पर्यटन तेजी से बढ़ा है. वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में पर्यटकों की दर्ज संख्या 2013 के 52.51 लाख से बढ़कर 2025 में 17.31 करोड़ पहुंच गई. यह करीब 3,197 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. हालांकि, विदेशी पर्यटकों की संख्या अब भी कोविड से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाई है.
पूर्वांचल में पर्यटन के आंकड़ों ने नया रिकॉर्ड बनाया है. वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में 2025 के दौरान कुल 17.31 करोड़ पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं, जबकि 2013 में यह आंकड़ा 52.51 लाख था. इस हिसाब से 2025 में हर दिन औसतन करीब 4.74 लाख पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं. वर्ष 2026 में भी पर्यटकों का आना जारी है. सितंबर 2026 में ही इन मंडलों में 98.03 लाख पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं.
ये आंकड़े पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक कार्यालय की ओर से 22 अक्टूबर 2026 को सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दिए गए जवाब में सामने आए हैं. इस कार्यालय के दायरे में तीनों मंडल आते हैं. क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्रों में वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर और सारनाथ, जबकि विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी का मंदिर शामिल हैं.
काशी विश्वनाथ: भगवान शिव की नगरी में आस्था का केंद्र
प्राचीन काशी यानी वाराणसी को दुनिया के सबसे पुराने बसे हुए शहरों में गिना जाता है. शहर के केंद्र में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, काशी की यात्रा और यहां देह त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
इतिहास में इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया और फिर इसका पुनर्निर्माण हुआ. वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था. बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखरों पर स्वर्ण परत चढ़वाने के लिए सोना दान किया.
दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ. इस कॉरिडोर ने गंगा के घाटों से मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चौड़ा और सीधा रास्ता उपलब्ध कराया. इसके बाद क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने की रफ्तार तेज हुई और दर्ज आंकड़ों के मुताबिक पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली.
सारनाथ: जहां भगवान बुद्ध ने दिया था पहला उपदेश
काशी विश्वनाथ मंदिर से करीब 10 किलोमीटर दूर सारनाथ स्थित है. बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान गौतम बुद्ध ने यहीं अपना पहला उपदेश दिया था, इसे बौद्ध धर्म में धर्मचक्र प्रवर्तन के रूप में जाना जाता है. सम्राट अशोक ने बाद में सारनाथ में स्तूपों का निर्माण कराया और चार सिंहों वाले शीर्ष से सुसज्जित एक स्तंभ स्थापित करवाया. इसी सिंह शीर्ष को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया है.
विशाल धमेख स्तूप के लिए प्रसिद्ध सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, यहां श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, जापान और अन्य देशों से बौद्ध श्रद्धालु आते हैं. जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी इस स्थान का विशेष महत्व है. वे इसे 11वें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ की जन्मस्थली मानते हैं.
मां विंध्यवासिनी: विंध्य पर्वत की आराध्य देवी
मिर्जापुर जिले में विंध्य की पहाड़ियों और गंगा नदी के संगम क्षेत्र के पास मां विंध्यवासिनी का मंदिर स्थित है. यह उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर का वध करने के बाद देवी ने विंध्य पर्वत को अपना निवास बनाया था.
यहां आने वाले श्रद्धालु त्रिकोण परिक्रमा भी करते हैं. इसमें तीन मंदिरों मां विंध्यवासिनी, मां अष्टभुजा और मां काली खोह के दर्शन शामिल हैं. नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं.
कोविड से पहले धीरे-धीरे बढ़ रहा था पर्यटन
पिछले दशक के शुरुआती वर्षों में काशी विश्वनाथ, सारनाथ और मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही थी. वर्ष 2013 में इस क्षेत्र में करीब 52 लाख पर्यटक आए थे. 2019 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 68 लाख हो गई, यानी छह वर्षों में पर्यटकों की संख्या में करीब एक-तिहाई की वृद्धि हुई.
उस समय वाराणसी के घाटों और सारनाथ में विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में दिखाई देते थे. आंकड़ों के मुताबिक, उस दौर में हर 18 पर्यटकों में से लगभग एक विदेशी होता था.
कोविड महामारी से थम गई पर्यटकों की रफ्तार
कोविड महामारी ने धार्मिक पर्यटन को बुरी तरह प्रभावित किया. वर्ष 2020 में मंदिरों के बंद होने और यात्रा संबंधी पाबंदियों के कारण पर्यटकों की संख्या घटकर 10 लाख से भी कम रह गई. यह पिछले वर्ष के मुकाबले करीब सातवां हिस्सा थी.
2021 में स्थिति में कुछ सुधार हुआ और पर्यटकों की संख्या बढ़कर लगभग 31 लाख पहुंची. हालांकि, विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई. उस साल पूरे क्षेत्र में केवल करीब 2,500 विदेशी पर्यटक आए.
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद बदली तस्वीर
वर्ष 2022 में पर्यटन के आंकड़ों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला. यह काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर खुलने के बाद का पहला पूरा साल था. इस दौरान पर्यटकों की संख्या करीब 31 लाख से बढ़कर सात करोड़ से अधिक हो गई. यानी एक साल में यह संख्या 23 गुना से ज्यादा बढ़ गई. इसके बाद भी पर्यटकों के आने का सिलसिला तेजी से जारी रहा.
इन आंकड़ों के अनुसार, अब इस क्षेत्र में कोविड से पहले के मुकाबले 25 गुना से अधिक और 2013 के मुकाबले करीब 33 गुना ज्यादा पर्यटक यात्राएं दर्ज हो रही हैं.
2026 में भी जारी है पर्यटकों की भीड़
RTI के जवाब में दिए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2026 में भी पूर्वांचल के धार्मिक पर्यटन स्थलों पर श्रद्धालुओं का आना जारी है. सितंबर 2026 में वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में कुल 98.03 लाख पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं. इनमें अधिकांश घरेलू पर्यटक थे. करीब 97.80 लाख यात्राएं भारतीय पर्यटकों की रहीं, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या लगभग 19 हजार दर्ज की गई.
सितंबर 2026 में दर्ज पर्यटक यात्राओं की संख्या कोविड से पहले के किसी भी पूरे साल के आंकड़े से अधिक रही. तुलना करें तो 2019 में, जो कोविड से पहले का सबसे व्यस्त साल था, पूरे 12 महीनों में करीब 68 लाख पर्यटक आए थे.
घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ी, विदेशी पर्यटक अब भी पीछे
पूर्वांचल में पर्यटन की बढ़ोतरी मुख्य रूप से भारतीय पर्यटकों के कारण हुई है. वर्ष 2025 में घरेलू पर्यटकों की संख्या 17 करोड़ 27 लाख से अधिक रही, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 3.21 लाख दर्ज की गई. विदेशी पर्यटकों की संख्या में 2021 के मुकाबले काफी सुधार हुआ है. उस साल पूरे क्षेत्र में केवल करीब 2,600 विदेशी पर्यटक आए थे. हालांकि, 2025 में भी विदेशी पर्यटकों की संख्या कोविड से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाई.
वर्ष 2019 में इस क्षेत्र में करीब 3.50 लाख विदेशी पर्यटक आए थे, इसके मुकाबले 2025 का आंकड़ा लगभग 8 प्रतिशत कम रहा. कुल पर्यटक यात्राओं में विदेशी पर्यटकों की हिस्सेदारी भी काफी घट गई है. 2013 में यह पांच प्रतिशत से अधिक थी, जबकि 2025 में घटकर 0.2 प्रतिशत से भी कम रह गई. इसकी प्रमुख वजह घरेलू पर्यटकों की संख्या में कहीं ज्यादा तेजी से हुई बढ़ोतरी है.
बंद मंदिरों से रिकॉर्ड भीड़ तक पहुंचा पूर्वांचल
पिछले पांच वर्षों में पूर्वांचल का धार्मिक पर्यटन बंद मंदिरों और यात्रा प्रतिबंधों के दौर से निकलकर रिकॉर्ड भीड़ के दौर में पहुंच गया है. काशी विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ और मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. पर्यटन के आंकड़े क्षेत्र में घरेलू धार्मिक यात्राओं की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं.
बिश्वजीत