डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को याचिका भेजी है. स्टालिन ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और चुनाव में बैलेट पेपर की व्यवस्था दोबारा लागू करने की भी मांग की है.
एमके स्टालिन ने वोटर लिस्ट से 97 लाख मतदाताओं के नाम हटने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इतने मतदाता सूची से गायब कैसे हो गए. स्टालिन ने कहा कि यह भी जांच होनी चाहिए कि वोटरों के नाम हटाए जाने से चुनाव के नतीजों पर कोई असर पड़ा या नहीं.
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डीएमके चीफ ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक, वोट देना कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है और हर मतदाता के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग
एमके स्टालिन की याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित पक्षपातपूर्ण आचरण को लेकर अनुच्छेद 86(2) के तहत संसदीय संदर्भ शुरू करने की मांग की गई है. उन्होंने तमिलनाडु में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने की समीक्षा के लिए अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट से संदर्भ लेने की भी अपील की है.
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इसके अलावा, स्टालिन ने SIR से पहले की वोटर लिस्ट बहाल करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि हर वोट की गिनती होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए.
प्रमोद माधव