मीनाक्षी मंदिर ट्रस्ट की 60 करोड़ की जमीन पर फर्जीवाड़े का मामला, CCB की FIR

अरुलमिगु मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर की सेवा के लिए बने चैरिटेबल ट्रस्ट की तकरीबन 60 करोड़ की 1.79 एकड़ ट्रस्ट भूमि के कथित तौर पर अवैध रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर के मामले में सिटी सेंट्रल क्राइम ब्रांच(CCB) ने FIR दर्ज की.

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मीनाक्षी मंदिर मीनाक्षी मंदिर

प्रमोद माधव

  • मदुरै,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST

अरुलमिगु मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर की सेवा के लिए बने चैरिटेबल ट्रस्ट की तकरीबन 60 करोड़ की 1.79 एकड़ ट्रस्ट भूमि के कथित तौर पर गैर-कानूनी रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर और गिरवी रखने के मामले में सिटी सेंट्रल क्राइम ब्रांच(CCB) ने FIR दर्ज की है. 

मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर के जॉइंट कमिश्नर और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सेल्लाथुरई और 'अराप्पोर इयक्कम' ने यह शिकायत दर्ज कराई है. इस शिकायत में कहा गया है कि 1930 में सैदापेट सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में एक वसीयत की रजिस्ट्री कराई गई थी जिसमें यह बताया गया था कि अलगार कोविल रोड पर बने अशोक विलास बंगले और उससे जुड़ा बगीचा, मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर और अलागार मंदिर की सेवा के लिए बनाए गए चैरिटेबल ट्रस्ट की संपत्ति है. इस वसीयत में संपत्ति को बस लीज़ पर देने की अनुमति दी गई थी. और इसे बेचने, गिरवी रखने और इसके मालिकाना हक को स्थानांतरित करने पर पूरी तरह मनाही थी.

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दरअसल, 24 जून 2016 को मदुरै उत्तर के पूर्व तहसीलदार अनबझगन ने कथित तौर पर इस रिकॉर्ड से मंदिर का मालिकाना हटा दिया और अवैध तरीके से पट्टा 9 लोगों के नाम कर दिया.  

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जैसे ही मामला संज्ञान में आया, राजस्व संभागीय अधिकारी ने तहसीलदार का आदेश रद्द किया और पट्टा मंदिर के नाम पर बहाल करते हुए इस बात की पुष्टि कर दी कि यह ज़मीन मंदिर ट्रस्ट की है. यह केस मद्रास हाई कोर्ट के सामने लाया गया था. मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के सामने यह मामला लाया गया था, जिसमें कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी थी.

हालांकि, FIR के मुताबिक कोर्ट के आदेश के बावजूद, 16 अप्रैल 2021 को थूथुकुडी ज़िले के मुराप्पनाडू सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में सब-रजिस्ट्रार के जरिए एक जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी रजिस्टर कराई गई थी. उस दस्तावेज़ के आधार पर, 19 जुलाई 2021 को डिंडिगुल ज़िले के वडमदुरै सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में सब-रजिस्ट्रार प्रशांत संथाना करुप्पन ने एक मॉर्गेज डीड की रजिस्ट्री की.

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बताया जा रहा है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी से पट्टा ट्रांसफर, दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन और मॉर्गेज ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए कोर्ट के आदेशों और रजिस्ट्रेशन कानूनों का उल्लंघन करके अवैध रूप से मंदिर ट्रस्ट की ज़मीन पर कब्जा करने की राजिश रची थी. हालांकि अब इस मामले में कार्रवाई तेज हो गई है. IPC की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच भी जारी है.

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