मणिपुर में हिंसा के बीच BSF DG ने किया दो दिवसीय दौरा, ऑपरेशनल तैयारियों का लिया जायजा, राज्यपाल-CM से भी मिले

मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र की चिंता बनी हुई है. इसी बीच BSF के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने इंफाल और चुराचांदपुर का दौरा कर सुरक्षा हालात और जवानों की तैयारियों का जायजा लिया.

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मणिपुर में BSF DG ने सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की (PTI/Representational) मणिपुर में BSF DG ने सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की (PTI/Representational)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • इंफाल,
  • 14 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:50 PM IST

मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा के बीच सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने 12 और 13 अक्टूबर को राज्य का दौरा किया. दो दिवसीय दौरे में उन्होंने इंफाल और चुराचांदपुर में सुरक्षा व्यवस्था, जवानों की तैनाती और ऑपरेशन की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से भी मुलाकात की.

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सूत्रों के मुताबिक, DG राज्य के हालात पर तैयार ग्राउंड रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भी देंगे. BSF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर  जानकारी दी कि महानिदेशक ने मौजूदा हालात को देखते हुए बल की तैनाती और ऑपरेशनल तैयारियों का जायजा लिया.  हालांकि, समीक्षा के बाद अभी तक किसी नए ऑपरेशन या तैनाती में बदलाव की घोषणा नहीं की गई है.

राज्य के अलग-अलग जिलों में BSF की करीब 100 दस्ते तैनात किए गए हैं. इनकी जिम्मेदारी हिंसा प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बनाए रखने, घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच संवेदनशील बफर जोन की निगरानी और स्थानीय प्रशासन की मदद करने की है. इसके साथ ही पुलिस, केंद्रीय बलों और प्रशासन के बीच तालमेल बनाए रखना भी अहम है.

आंतरिक के साथ अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी ध्यान

मणिपुर की सीमा म्यांमार से लगती है, इसलिए यहां आंतरिक सुरक्षा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी भी बड़ी चुनौती है. घाटी और पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से जारी तनाव के कारण सुरक्षा बलों को सतर्कता, खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई और हिंसा की घटनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देनी पड़ती है. इस दौरान प्रवीण कुमार ने चुराचांदपुर स्थित BSF के सब्सिडियरी ट्रेनिंग सेंटर का भी निरीक्षण किया.

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इसके साथ ही उन्होंने आगामी BSF दिवस समारोह की तैयारियों की समीक्षा की और कार्यक्रम को सुचारु ढंग से आयोजित करने के लिए विस्तृत योजना और संबंधित यूनिट्स के बीच तालमेल बनाए रखने को कहा.

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA), 1958 को छह महीने के लिए बढ़ाया है.  25 सितंबर 2026 को घोषणा जारी की गई , इसके मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है, लेकिन 13 पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र वाले इलाके इसके दायरे से बाहर हैं. 

इनमें इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग जिलों के क्षेत्र शामिल हैं. इनमें इंफाल, लाम्फेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई, पोरमपत, हेइंगांग, इरिलबुंग, थौबल, बिष्णुपुर, नंबोल और काकचिंग थाना आता है. यह व्यवस्था पहले वापस नहीं ली जाती, तो तय अवधि तक लागू रहेगी. 

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कई इलाकों में अब भी हिंसा की चुनौती

बिष्णुपुर-चुराचांदपुर, इंफाल पूर्व-कांगपोकपी-इंफाल पश्चिम और जिरीबाम जैसे इलाकों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं. कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी में नौ लोगों की हत्या से जुड़ी हालिया घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है. संवेदनशील इलाकों में रुक-रुककर गोलीबारी और हिंसा की आशंका के बीच सुरक्षा बलों के लिए आम लोगों की सुरक्षा और सामान्य गतिविधियां बहाल रखना अपने आप में बड़ी चुनौती है.

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मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी संघर्ष में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.  हिंसा ने सामाजिक संबंधों, प्रशासन और जनजीवन पर गहरा असर डाला है. BSF DG का दौरा राज्य में सुरक्षा बलों की तैयारियों और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल के लिहाज से बेहद अहम है. लेकिन स्थायी शांति के लिए सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना ही काफी नहीं होगा. 

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