लाल किला हमले का मास्टरमाइंड था अल-कायदा, UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए कार बम धमाके को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में अल-कायदा को हमले से जोड़ा गया है. साथ ही संगठन के बांग्लादेश में नेटवर्क बढ़ाने, पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर आतंकी गतिविधियों और आतंकियों के AI के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी गई है.

Advertisement
दिल्ली में लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को आतंकी हमला हुआ था. (Photo- ITG) दिल्ली में लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को आतंकी हमला हुआ था. (Photo- ITG)

अरविंद ओझा / सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

दिल्ली के लाल किला इलाके में नवंबर 2025 में हुए आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम ने रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS को लाल किला हमले के पीछे जिम्मेदार संगठन बताया गया है.

रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025 से 9 जून 2026 तक की गतिविधियों पर आधारित है. अगस्त 2026 में सुरक्षा परिषद के सामने रखी गई है. यह रिपोर्ट इसलिए अहम है क्योंकि इससे पहले फरवरी में सामने आई संयुक्त राष्ट्र की पिछली रिपोर्ट में लाल किला धमाके को जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ने वाली जानकारी का भी जिक्र हुआ था. इस हमले में 11 लोगों की मौत हो गई थी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: खुद को हाफिज सईद का गुलाम बताया, भारत को भी धमकी दी... पूर्व मंत्री ने खोल दी पाकिस्तान की पोल

भारत में इस मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA कर रही है. NIA ने मई 2026 में लाल किला इलाके में हुए कार बम धमाके के मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. एजेंसी के मुताबिक, सभी आरोपी अल-कायदा से जुड़े अंसार गजवत-उल-हिंद यानी AGuH के मॉड्यूल से जुड़े थे.

NIA ने इसे AQIS यानी अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से जुड़ा संगठन बताया है. जांच में सामने आया कि आरोपी आतंकी हमले की तैयारी कर रहे थे और IED, रॉकेट आधारित विस्फोटक और ड्रोन से जुड़े प्रयोग भी किए गए थे.

छोटे-छोटे गुटों में नेटवर्क बढ़ा रहा अल-कायदा

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में AQIS के बदलते तौर-तरीकों को लेकर भी चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन अब बड़े और आसानी से पहचाने जाने वाले समूहों के बजाय छोटे-छोटे सेल और बिखरे हुए नेटवर्क के जरिए अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

Advertisement

इसके साथ ही संगठन अपने लॉजिस्टिक और फंडिंग नेटवर्क को भी मजबूत करने की कोशिश में है. रिपोर्ट में बांग्लादेश में संभावित ऑपरेशनल सेल स्थापित करने की कोशिशों को लेकर भी चिंता जताई गई है. इससे भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया में आतंकी नेटवर्क के विस्तार का खतरा बढ़ सकता है.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से AI तक, आतंक का बदलता तरीका

रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का भी जिक्र है. इसमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और सीमा पार आतंकी गतिविधियों से जुड़े खतरे पर चिंता जताई गई है. AQIS की गतिविधियों और पाकिस्तान में सक्रिय दूसरे आतंकी नेटवर्क के बीच संबंधों पर भी निगरानी की जरूरत बताई गई है.

यह भी पढ़ें: नेपाल दंगे में पाकिस्तानी मौलाना का नाम, भारतीय सीमा पर ISI की नई साजिश

आतंकियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी सुरक्षा परिषद की निगरानी टीम ने चेतावनी दी है. भारत की लाल किला धमाके की जांच में भी सामने आया था कि आरोपी जसिर बिलाल वानी ने रॉकेट और विस्फोटक तैयार करने की जानकारी के लिए यूट्यूब और चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया था. NIA के मुताबिक, वह AGuH के मॉड्यूल में तकनीकी भूमिका निभा रहा था.

संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी संगठनों की बदलती रणनीति के बीच प्रतिबंध व्यवस्था में हुए बदलावों का भी जिक्र किया है. 27 फरवरी 2026 को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समिति ने अल-नुसरा फ्रंट फॉर द पीपल ऑफ द लेवांत यानी अल-नुसरा फ्रंट की एंट्री प्रतिबंध सूची से हटा दी. इस संगठन को हयात तहरीर अल-शाम यानी HTS के नाम से भी जाना जाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »