आबादी में अव्वल हुआ इंडिया तो चिढ़ गया चीन, कहा- सिर्फ Quantity नहीं, Quality भी चाहिए

चीन से पूछा गया कि आबादी में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है. इस पर चीनी विदेश मंत्रालय ने ऐसा जवाब दिया मानो वो चिढ़ा हुआ है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वेंग वेनबिन ये जताने की कोशिश करने लगे कि सिर्फ आबादी का बढ़ना ही काफी नहीं है बल्कि बढ़ती हुई आबादी में काबिलियत भी होनी चाहिए.

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आबादी में चीन से आगे निकला भारत (फोटो- पीटीआई) आबादी में चीन से आगे निकला भारत (फोटो- पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 11:07 AM IST

बढ़ती जनसंख्या को यूं तो भारत ऐसी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मानता, लेकिन हिन्दुस्तान का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाना चीन के लिए चिढ़ने की वजह बन गया है. चीन के विदेश मंत्रालय से पूछा गया कि इंडिया अब चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़े पॉपुलेशन वाला देश बन गया है, इस पर चीन की क्या प्रतिक्रिया है? 

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इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत का नाम लिए बिना तंज कसते हुए कहा कि आबादी का फायदा सिर्फ जनसंख्या बढ़ाने से ही नहीं मिलता है बल्कि इसके लिए उस आबादी में क्वालिटी भी होनी चाहिए. चीन ने कहा कि अभी उसके पास 900 मिलियन यानी कि 90 करोड़ लोगों का वर्कफोर्स है जो चीनी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में सक्षम है. 

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 19 अप्रैल को 142.86 करोड़ की आबादी के साथ भारत अब चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश हो गया है. चीन अब 142.57 करोड़ की जनसंख्या के साथ दूसरे नंबर है. 

 'सिर्फ Quantity नहीं, Quality भी चाहिए'

इस बाबत जब चीन के विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया तो प्रवक्ता वेंग वेनबिन ने कहा, "मैं आपको बताना चाहता हूं कि जनसंख्या से होने वाला फायदा क्वांटिटी पर ही नहीं बल्कि गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है, उन्होंने कहा कि जनसंख्या तो अहम है लेकिन इसके साथ टैलेंट भी होना बहुत जरूरी है." उन्होंने कहा कि चीन की आबादी 1.4 बिलियन से अधिक है. कामकाजी उम्र के लोग 900 मिलियन के करीब हैं. इसके अलावा चीन अपनी बुजुर्ग हो रही जनसंख्या से पैदा होने वाली समस्या से निपटने के लिए भी कोशिशें कर रहा है. 

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वेंग वेनबिन ने कहा कि जैसा कि प्रीमियर ली कियांग ने बताया कि हमारी पॉपुलेशन डिविडेंड खत्म नहीं हुई है और हमारा टैलेंट डिविडेंड भी फल-फूल रहा है और विकास के लिए प्रेरणादायिक साबित हो रहा है. 

चीन को पॉपुलेशन डिविडेंड खोने का खतरा

दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने की वजह से चीन सालों तक पॉपुलेशन डिविडेंड का फायदा लेता रहा. उसे कम कीमत पर अच्छे और क्वालिटी लेबर मिलते रहे. चीन को मजदूर, हाईटेक लेबर, डॉक्टर, इंजीनियर की कमी नहीं रही. लेकिन बढ़ते जीवन दर, बुजुर्ग होती आबादी, सालों तक चली वन चाइल्स पॉलिसी की वजह से चीन की आबादी पहले तो कई सालों तक स्थिर रही और अब घटने लगी है. इसलिए चीन को सालों से मिलने वाला पॉपुलेशन डिविडेंड के खत्म होने का डर सता रहा है. 

बूढ़ा होने की राह पर चीन

गौरतलब है कि भारत में मीडियन एज 29 है, यानी हमारी आबादी का लगभग आधा हिस्सा 29 साल से कम उम्र का है. यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) के मुताबिक, भारत में 68 % लोग 15 से 64 साल तक की उम्र के हैं. यही वो आबादी से जिसे कामकाजी माना जाता है.  

वहीं अगर चीन की ओर देखें तो चीन बूढ़ा होने की राह पर है. अभी चीन की मीडियन एज 39 साल है. अगले 27 सालों में यानी 2050 तक उसकी मीडियन एज 51 हो जाएगी. इसी के साथ वर्क फोर्स को लेकर चीन की समस्या शुरू होगी.  

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इस साल मार्च में ली कियांग जब चीन के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने डेमोग्राफिक डिविडेंड का जिक्र करते हुए कहा था कि डेमोग्राफिक डिविडेंड का आकलन करते समय, हम न केवल जनसंख्या के विशाल आकार को देखेंगे बल्कि उच्च क्षमता वाले कार्यबल के पैमाने को भी देखेंगे. 

2022 में चीन का जनसांख्यिकीय संकट गहरा गया क्योंकि यहां की जनसंख्या निगेटिव फेज में प्रवेश कर गई. 2022 में चीन की जनसंख्या में साढ़े आठ लाख की गिरावट दर्ज की गई. देखने में तो ये छोटा आंकड़ा है लेकिन अगर ये ट्रेंड कायम रहा तो चीन को वर्क फोर्स पर बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. 

चीन के अनुसार, देश में पिछले साल लगभग 9.56 मिलियन नवजात पैदा हुए जो 2021 में रिकॉर्ड किए गए 10.62 मिलियन से कम है. अगर जन्म दर की बात करें तो चीन में यहां भी गिरावट दर्ज की गई है. 2021 में 1000 लोगों पर जन्म दर 7.52 था, जो कि 2022 में घटकर 6.77 हो गया. 

 

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