लद्दाख की ऊंची और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में खेती करना हमेशा से मुश्किल रहा है. सिंधु नदी यहां से गुजरती है, लेकिन कई जगह घाटियों में पानी का स्तर इतना नीचे था कि किसानों के लिए उसे पंप को जरिए खेतों तक पहुंचाना मुश्किल था. वसंत के मौसम में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.
भारत ने सिंधु नदी पर अपना पहला रॉक चेक डैम बनाया है. यह डैम बड़े बोल्डरों से तैयार किया गया है और इसे बनाने में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है.
10 फीट बढ़ा पानी का स्तर
इस चेक डैम की वजह से सिंधु नदी के पानी का स्तर करीब 10 फीट ऊपर आया है. इसका सीधा फायदा आसपास के किसानों को मिल रहा है. डैम से करीब 4 करोड़ लीटर पानी जमा हो सकता है, जिसे Igoo Phey सिंचाई नहर के जरिए सूखे गांवों के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है.
यानी जिस पानी का पहले नदी की गहराई और भौगोलिक मुश्किलों के कारण खेतों तक पहुंचाना चुनौती था, अब उसे जमा करके खेती के काम में लाया जाएगा.
यह भी पढ़ें: ग्लेशियर पिघलने से लद्दाख के किसानों की लगी लॉटरी! 12 गांवों को फायदा
भारत-पाकिस्तान के बीच पानी पर खींचतान
सिंधु नदी का पानी लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा मुद्दा रहा है. 1960 में दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि हुई थी. इसके तहत सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान के हिस्से में गया, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत के इस्तेमाल के लिए तय हुआ. पाकिस्तान की खेती और पानी की जरूरत काफी हद तक सिंधु नदी पर निर्भर है.
हालांकि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल को सिंधु जल संधि को रोक दिया. भारत ने कहा कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी.
लद्दाख में 36 चेक डैम और बनाने की योजना
लद्दाख प्रशासन अब सिंधु नदी पर ऐसे और चेक डैम बनाने की तैयारी में है. कई जगह पर काम शुरू भी हो चुका है. प्रशासन ने केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय को लद्दाख में कुल 36 चेक डैम बनाने का प्रस्ताव भी भेजा है. इनमें लेह क्षेत्र में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल क्षेत्र में 29 आरसीसी चेक डैम या वीयर शामिल हैं. इन प्रोजेक्ट्स की लागत लगभग 56 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है.
मीर फरीद