भोपाल में शुक्रवार को छोटे लेवल की मछली पालन व्यवस्था के लिए नेशनल एक्शन प्लान बनाया जा रहा है. योजना के तहत अगले पांच सालों में मछली उत्पादन बढ़ाकर 30 मिलियन टन करने और सी फूड एक्पोर्ट को 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है.
यूनियन फिशरीज सेक्रेटरी डॉक्टर अभिलक्ष लिखी ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि योजना में मछुआरों की आय सुधारने, वैल्यू चेन मजबूत करने, बेहतर तालमेल बनाने और मीठे पानी के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने पर जोर दिया जाएगा.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लिखी ने कहा, कि यह दस्तावेज सरकारी दफ्तरों तक सीमित ना रहकर लोगों की आजीविका में सुधार करने वाला होना चाहिए. लिखी के मुताबिक, भारत का सालाना मछली उत्पादन 19.7 मिलियन टन तक पहुंच चुका है. इसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई है, जबकि सी फूड एक्सपोर्ट 70,000 करोड़ रुपये को पार कर चुका है. उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट में साथ छोटे स्तर पर काम करने वाले मछुआरों की आय सुधारना भी जरूरी है.
उन्होंने जलवायु परिवर्तन और पानी की खराब क्वालिटी को मछली पालन के लिए बड़ी चिंता बताया. इसमें जलाशयों में ऑक्सीजन का स्तर गिरने जैसी चुनौतियां शामिल हैं. लिखी ने कहा कि योजना में जलवायु चुनौतियों का सामना करने वाले मछुआरा समुदायों के अनुभवों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. लिखी ने कहा कि भारत में अलग-अलग जगहों पर पानी की व्यवस्था, मछुआरों के समुदाय और क्षेत्रों के हिसाब से चुनौतियां अलग-अलग हैं.
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मछुआरों के अनुभवों से मिलेगी मदद
लिखी ने कहा कि यह विविधता संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के लिए अच्छा मौका है. इससे वे इलाके के हिसाब से तरीके आजमा सकते हैं और उनसे मिली सीख दूसरे इलाकों में भी लागू कर सकते हैं. देशभर के मछुआरों के अनुभव टिकाऊ मछली पालन और उनकी आजीविका सुधारने के लिए स्थानीय जरूरतों के मुताबिक तरीके बनाने में मदद कर सकते हैं.
इस योजना में नदियों, नहरों, तालाबों, झीलों, बाढ़ वाले इलाकों की गीली जमीन और ठंडे पानी वाले जगहों पर मछली पालन शामिल है. बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम के निदेशक डॉक्टर पी. कृष्णन ने कहा कि विकास के चरण में मछली पकड़ने के अधिकार, संसाधनों का सही प्रबंधन, रोजगार, काम की अच्छी स्थिति, पुरुष-महिला समानता, मछली बेचने का काम, मछली पकड़ने के बाद का व्यापार, आपदा से बचाव और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा.
संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद योजना को अमली जामा पहनाया जाएगा. इसके बाद अगले महिने इसे लागू किया जाएगा. योजना का लक्ष्य उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के साथ मछुआरों की आजीविका, संसाधनों के प्रबंधन और जलवायु संबंधी चुनौतियों पर एक साथ काम करना है.
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