मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहन से जुड़ी प्रॉपर्टी के धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता गणेश चुक्कल को अदालत से बड़ी राहत मिली है. मुंबई की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने सोमवार को चुक्कल को रिहा करने का आदेश दिया. कोर्ट ने पाया कि जांच एजेंसी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और आरोपी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया.
यह मामला मुंबई के हीरानंदानी एस्टेट्स स्थित एक आवासीय फ्लैट से जुड़ा है. इस प्रॉपर्टी को लेकर धोखाधड़ी और जालसाजी की FIR दर्ज की गई थी. मामले में पवई पुलिस ने MNS नेता गणेश चुक्कल और उनके सहयोगी समीर सावंत को गिरफ्तार किया था.
विवादित संपत्ति का संबंध मेलरोनिया हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड से है. इस कंपनी के निदेशकों में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहन अलका भाटिया हीरानंदानी, कमल निरंजन हीरानंदानी और श्रीधर नारायण शामिल हैं.
2 अक्टूबर को हुई थी गिरफ्तारी
गणेश चुक्कल को 2 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें 5 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया. इसके बाद आरोपी को दोबारा अंधेरी की 66वीं मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी पुलिस हिरासत 9 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई.
इसी बीच 5 अक्टूबर को शिकायतकर्ता की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान अभियोजन पक्ष ने हाई कोर्ट को बताया कि मामले की जांच पवई पुलिस स्टेशन से मुंबई क्राइम ब्रांच की DCB CID यूनिट-10 को सौंप दी गई है.
इसके बाद 6 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 42 मिनट पर क्राइम ब्रांच ने आरोपी को अपनी हिरासत में ले लिया. हालांकि, अगले तीन दिनों तक आरोपी को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश नहीं किया गया.
क्राइम ब्रांच ने अदालत में पेश करने में की देरी
7 अक्टूबर को क्राइम ब्रांच ने अंधेरी की 66वीं अदालत को पत्र लिखकर बताया कि आरोपी को 9 अक्टूबर को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया जाएगा. इसके बाद 9 अक्टूबर को गणेश चुक्कल को एस्प्लेनेड की 37वीं अदालत में पेश किया गया.
चुक्कल की ओर से पेश वकील राजेंद्र शिरोडकर, अर्चित सखलकर, लक्ष्मण शाहपुर और निहार घाग ने अदालत में दलील दी कि जब कोई जांच एजेंसी किसी मामले की जांच अपने हाथ में लेती है, तो आरोपी को सक्षम अदालत के सामने पेश करना और आगे की हिरासत की अनुमति लेना जरूरी होता है.
वकीलों ने कहा कि इस मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. उन्होंने उच्च अदालतों के निर्देशों का हवाला देते हुए चुक्कल की हिरासत को अवैध बताया और उनकी रिहाई की मांग की.
कोर्ट ने कहा- कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत से समय मांगा. इसके बाद सोमवार को जांच अधिकारी ने हलफनामा दाखिल किया. हालांकि, अदालत को हलफनामे में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे आरोपी के वकीलों की दलीलों को खारिज किया जा सके.
एस्प्लेनेड की 37वीं अदालत ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर संबंधित अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए था. अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 और 48 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया. इसी आधार पर अदालत ने गणेश चुक्कल को एक लाख रुपये के निजी मुचलके (PR Bond) पर रिहा करने का आदेश दिया.
विद्या