भारत में खाने पीने की चीजों की सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ दिनों में एक के बाद एक बड़े एक्शन सामने आए हैं. बेंगलुरु में फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो के हाइपरप्योर वेयरहाउस पर छापा पड़ा, वहीं जेप्टो के गोदाम में भारी गंदगी मिलने के बाद उसे सील कर दिया गया. मुंबई में ब्लिंकिट के एक स्टोर का फूड लाइसेंस तक सस्पेंड कर दिया गया. महाराष्ट्र सरकार ने एक साल के लिए एनालॉग पनीर पर पूरी तरह बैन लगा दिया है, जबकि मध्य प्रदेश भी जल्द ऐसा ही कदम उठाने की तैयारी में है.
इसी बीच FSSAI ने पान मसाले की पैकिंग को लेकर भी नया नियम लागू कर दिया है, जिसके तहत अब पान मसाला प्लास्टिक, एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर में पैक नहीं किया जा सकेगा. दिल्ली में अब रेस्टोरेंट और होटलों को हाइजीन के आधार पर A से D तक ग्रेड दिया जाएगा और स्कूलों के मिड डे मील में इडली सांबर जैसे नए पकवान शामिल होंगे.
हरियाणा सड़कों पर मोबाइल लैब भेजकर सिर्फ 20 रुपये में लोगों के खाने की जांच करेगा. इन सभी घटनाओं को साथ रखकर देखें तो साफ लगता है कि देशभर में फूड सेफ्टी को लेकर एक नया आंदोलन खड़ा हो रहा है, जिसका सीधा असर आम लोगों खासकर युवाओं की सेहत पर पड़ने वाला है.
सबसे पहले बात क्विक कॉमर्स कंपनियों की. बेंगलुरु में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जोमैटो के सकलवारा गांव स्थित हाइपरप्योर वेयरहाउस पर अचानक छापा मारा. जांच के दौरान कोल्ड स्टोरेज एरिया में रखे सामान की जांच की गई और दालें, मसाले और अंडों के कई सैंपल सील किए गए.
इससे पहले होसकोटे में जेप्टो के वेयरहाउस पर भी छापा पड़ा था, जहां अधिकारियों को फर्श पर बिखरा कचरा, इधर उधर खुले पड़े खाने के पैकेट और बेतरतीब ढंग से रखे दूध और सॉफ्ट ड्रिंक के डिब्बे मिले. इस गंदगी को देखकर विभाग ने वेयरहाउस को सील कर दिया.
यह भी पढ़ें: अब प्लास्टिक पैकेट में नहीं बिकेगा पान मसाला, FSSAI ने बदले नियम
वहीं मुंबई में महाराष्ट्र FDA ने ब्लिंकिट के मलाड वेस्ट स्टोर पर औचक ऑडिट किया, जहां फल सब्जियों पर कॉकरोच घूमते मिले, सामान सीधे जमीन पर रखा था और एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट भी दुकान में मौजूद थे. इसके बाद स्टोर का फूड लाइसेंस ही सस्पेंड कर दिया गया.
सिर्फ प्राइवेट कंपनियां ही नहीं, सरकारी योजनाओं पर भी सवाल उठे हैं. बेंगलुरु के गोट्टीगेरे, लिंगराजपुरम और सिंगासंद्रा की इंदिरा कैंटीन रसोइयों में जांच के दौरान गलत लेबलिंग और अस्वस्थ हालात मिले, जिसके बाद गोट्टीगेरे की कैंटीन का गोदाम सील कर दिया गया.
कर्नाटक में इसी तरह के अभियान के तहत 60 होटल रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया गया और 77 सैंपल जांच के लिए भेजे गए. यानी सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह की व्यवस्थाओं में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं और अफसर अब किसी को छोड़ नहीं रहे.
FSSAI ने पान मसाले की पैकिंग को लेकर बड़ा बदलाव किया है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स पैकेजिंग अमेंडमेंट रेगुलेशन 2026 के तहत अब पान मसाला प्लास्टिक फ्री सामग्री में ही पैक करना होगा. नए नियम के मुताबिक पैकिंग में पॉलीथिन, पॉलीप्रोपिलीन, पीवीसी जैसे किसी भी सिंथेटिक पॉलीमर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. इतना ही नहीं, पैकिंग में एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर पर भी रोक लगा दी गई है.
अब कंपनियां पान मसाला पैक करने के लिए कागज, पेपरबोर्ड, सेल्युलोज या टिन और कांच के डिब्बे इस्तेमाल कर सकेंगी. यह नोटिफिकेशन 10 अगस्त को जारी हुआ और इसके साथ ही यह नियम तुरंत लागू हो गया है. गौर करने वाली बात यह है कि यह सिर्फ पैकिंग से जुड़ा नियम है, पान मसाले की बिक्री पर कोई रोक नहीं लगाई गई है.
पनीर को लेकर भी बड़ा एक्शन देखने को मिला है. महाराष्ट्र सरकार ने एक साल के लिए एनालॉग यानी नकली पनीर के बनाने, बेचने और स्टोर करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है. FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के मुताबिक जांच में लिए गए 308 सैंपल में से 109 सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें से 30 को असुरक्षित पाया गया. अगर किसी की मौत असुरक्षित खाने से होती है तो दोषी को उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है.
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी कहा है कि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात में बैन लगने के बाद अब नकली पनीर मध्य प्रदेश भेजा जा सकता है, इसलिए राज्य में भी जल्द बैन लगाया जाएगा.
महाराष्ट्र FDA ने आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली 434 यूनिट का भी निरीक्षण किया, जिनमें से 135 को नोटिस दिया गया और 10 कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए. हालांकि FDA के इस तेज एक्शन पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी सवाल उठाए हैं. कैडिला फार्मास्युटिकल्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि विभाग मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल कर रहा है और होटल रेस्टोरेंट के मामलों में पहले एक्शन लेकर बाद में सवाल पूछता है.
कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी सख्त कार्रवाई से पहले कंपनी को सुनवाई का मौका जरूर दिया जाए. FDA कमिश्नर मुंढे नागपुर की मशहूर साओजी मटन डिश पर की गई अपनी टिप्पणी को लेकर भी विवादों में हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि इतना तेल वाला खाना खाने से वे खुद अस्पताल पहुंच सकते हैं. इस बयान पर स्थानीय रेस्टोरेंट मालिकों ने कड़ी नाराजगी जताई है.
सिर्फ जांच और बैन तक ही बात सीमित नहीं है, सिस्टम में भी बदलाव हो रहे हैं. दिल्ली नगर निगम ने न्यूयॉर्क शहर की तर्ज पर होटल रेस्टोरेंट के लिए हाइजीन ग्रेडिंग सिस्टम शुरू किया है, जिसमें हर जगह को 100 अंकों में परखा जाएगा और A से D तक ग्रेड दिया जाएगा. यह सर्टिफिकेट दुकान के मुख्य दरवाजे पर लगाना अनिवार्य होगा, ताकि ग्राहक अंदर जाने से पहले ही सफाई का स्तर जान सकें.
वहीं दिल्ली सरकार ने स्कूलों के पीएम पोषण मेन्यू में भी बदलाव किया है, जिसके तहत 24 अगस्त तक बच्चों को इडली सांबर परोसा जाने लगेगा और रागी हलवे की जगह गेहूं का हलवा दिया जाएगा. हरियाणा सरकार पांच पुरानी मोबाइल फूड लैब को दोबारा शुरू कर रही है और 28 नई वैन भी जोड़ रही है, जिससे आम लोग सिर्फ 20 रुपये में अपने इलाके में ही खाने की जांच करवा सकेंगे.
इन सभी कदमों को साथ में देखें तो एक साफ ट्रेंड नजर आता है. सरकारें अब सिर्फ शिकायत आने का इंतजार नहीं कर रहीं, बल्कि खुद आगे बढ़कर जांच कर रही हैं. क्विक कॉमर्स कंपनियों से लेकर सरकारी कैंटीन और स्ट्रीट फूड तक, हर जगह सफाई और क्वालिटी को लेकर सख्ती बढ़ रही है.
इसका सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ेगा, क्योंकि आज के समय में सबसे ज्यादा ऑनलाइन खाना मंगाने वाला और बाहर खाने वाला वर्ग युवा ही है. अगर यह सख्ती लगातार बनी रहती है, तो आने वाले समय में लोगों को साफ और भरोसेमंद खाना मिलना आसान हो सकता है, हालांकि कोर्ट की टिप्पणी यह भी बताती है कि जांच एजेंसियों को नियमों के दायरे में रहकर ही काम करना होगा.
अनुराग कश्यप