जस्टिस स्वर्णकांता पर केजरीवाल का नया आरोप- उनके बच्चे सॉलिसिटर जनरल के लिए करते हैं काम

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा (अतिरिक्त एफिडेविट) दाखिल कर सनसनी मचा दी है. केजरीवाल ने सीधे तौर पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ पेशेवर संबंधों का हवाला देते हुए पक्षपात की गंभीर आशंका जताई है.

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा. (Photo: PTI/Delhi HC) दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा. (Photo: PTI/Delhi HC)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:57 PM IST

दिल्ली शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में अतिरिक्त एफिडेविट  (हलफनामा) दाखिल किया है. इस हलफनामे में केजरीवाल ने दावा किया है कि जस्टिस स्वर्णकांता के दोनों बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करने और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से केस आवंटित किए जाते हैं. उनका तर्क है कि तुषार मेहता इस मामले में सीबीआई (CBI) की ओर से वकील हैं, इसलिए केजरीवाल ने सवाल उठाया है कि जस्टिस शर्मा उनके खिलाफ आदेश कैसे दे सकेंगी.

केजरीवाल का कहना है कि ये हलफनामा 9 अप्रैल 2026 को सामने आई एक कानूनी रिपोर्ट के बाद दायर किया गया है. उनका आरोप है कि जस्टिस शर्मा के पुत्र और पुत्री केंद्र सरकार के पैनल वकील के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें वित्तीय लाभ मिल रहा है. केजरीवाल ने इसे हितों के टकराव का प्रत्यक्ष मामला बताते हुए जज से मामले की सुनवाई से अलग होने की मांग दोहराई है.

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बच्चों के काम पर उठाए सवाल

केजरीवाल ने अपने हलफनामे में आधिकारिक डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए कहा है कि जस्टिस शर्मा के बेटे ईशान शर्मा सुप्रीम कोर्ट के 'ग्रुप ए' पैनल वकील हैं. जबकि उनकी बेटी शम्भावी शर्मा दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पैनल में शामिल हैं.

केजरीवाल का तर्क है कि ये कोई नाममात्र के पद नहीं हैं, बल्कि केंद्र सरकार के अधीन स्थायी पेशेवर काम हैं. इनमें सरकारी कार्यभार, कोर्ट में उपस्थिति और वित्तीय लाभ शामिल हैं. जो सीधे तौर पर केंद्र सरकार के तंत्र से जुड़े हैं.

तुषार मेहता आवंटित करते हैं केस

कोर्ट में दायर हलफनामे में 13 सितंबर 2022 की अधिसूचना का जिक्र करते हुए बताया गया है कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ही पैनल वकीलों को मामले आवंटित करते हैं. केजरीवाल ने कहा कि इस मामले में तुषार मेहता खुद सीबीआई की पैरवी कर रहे हैं और उनके खिलाफ आए 'डिस्चार्ज' आदेश का विरोध कर रहे हैं. ऐसे में, जब जज के परिवार के सदस्य उसी विधि अधिकारी के माध्यम से काम प्राप्त कर रहे हैं तो निष्पक्षता की धारणा पर गंभीर चोट पहुंचती है.

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RTI जानकारी को बनाया आधार

केजरीवाल ने सोशल मीडिया रिपोर्ट और आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी को भी अपना आधार बनाया है. उन्होंने दावा किया कि साल 2023 में 2,487 मामले, 2024 में 1,784 और 2025 में 1,633 मामले जज के पुत्र को सौंपे गए थे.

केजरीवाल ने दलील दी कि केंद्र सरकार के साथ ये पेशेवर संबंध 'जीवंत, निरंतर और ठोस' हैं, न कि आकस्मिक. उन्होंने दस्तावेजों के साथ ये दिखाने की कोशिश की है कि इन लोगों का संबंध काफी गहरा है.

केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि धारणा मायने रखती है. उन्होंने कहा कि सीबीआई को न केवल निष्पक्ष होना चाहिए, बल्कि वैसा दिखना भी चाहिए. केजरीवाल के अनुसार, ये कोई साधारण मुकदमा नहीं है बल्कि एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील आपराधिक मुकदमा है. चूंकि वह केंद्र में सत्ताधारी दल के प्रमुख विरोधी हैं, इसलिए उन्हें डर है कि इस स्थिति में उन्हें न्याय नहीं मिल पाएगा.

आदेश पर आपत्ति

AAP संयोजक केजरीवाल ने हलफनामे में एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया है. उन्होंने कहा कि जब उनकी 'रिक्यूजल' (जज के हटने की) अर्जी लंबित थी, तब भी अदालत ने मुख्य मामले में प्रभावी आदेश पारित किए. केजरीवाल का मानना है कि न्यायिक मर्यादा के अनुसार जब तक हटाने की अर्जी पर फैसला न हो जाए, तब तक कोई दंडात्मक या प्रभावी आदेश नहीं दिया जाना चाहिए था. इससे उनके मन में अविश्वास और अधिक गहरा गया है कि मामला पहले से तय दिशा में जा रहा है.

हलफनामे के अंत में केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि किसी सामान्य निजी विवाद में शायद वो इसे इतनी गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन इस मामले में, जहां केंद्र के सर्वोच्च विधि अधिकारी जज के सामने पेश हो रहे हैं और जज के परिवार के सदस्य उसी तंत्र से लाभ ले रहे हैं, वहां अविश्वास को अनदेखा करना उनके लिए असंभव है. उन्होंने जस्टिस शर्मा से फिर अपील की है कि वो इस संवेदनशील मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें.

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