17 नवंबर 2021 को दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक्साइज पॉलिसी 2021-22 को लागू किया. नई पॉलिसी के तहत, शराब कारोबार से सरकार बाहर आ गई और पूरी दुकानें निजी हाथों में चली गईं. दिल्ली सरकार का दावा था कि नई शराब नीति से माफिया राज खत्म होगा और सरकार के रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी. हालांकि, ये नीति शुरू से ही विवादों में रही और जब बवाल ज्यादा बढ़ गया तो 28 जुलाई 2022 को सरकार ने इसे रद्द कर दिया.
कथित दिल्ली शराब घोटाले का खुलासा 8 जुलाई 2022 को दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार की रिपोर्ट से हुआ था (Delhi Liquor Scam).
दिल्ली की शराब नीति में कथित घोटाले के मामले में सीबीआई ने अगस्त 2022 में FIR दर्ज की थी. इस मामले में मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर, 9 कारोबारी और दो कंपनियों को आरोपी बनाया गया. सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया. इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) शामिल थे.
इसके अलावा अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे को भी आरोपी बनाया गया. इन तीनों को सिसोदिया का करीबी माना जाता है. आरोप था कि तीनों ने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब कारोबारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया.
इस घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, के. कविता और सीएम अरविंद केजरीवाल फंस गए.
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी दिनेश अरोड़ा ने संजय सिंह से मुलाकात की थी. संजय सिंह के कहने पर अरोड़ा ने दिल्ली चुनाव के लिए फंड जुटाया और 32 करोड का चेक मनीष सिसोदिया को सौंपा. इसके बदले संजय सिंह ने अरोड़ा का एक मामला सुलझाया जो एक्साइज डिपार्टमेंट के पास पेंडिंग था. संजय सिंह 4 अक्टूबर 2023 से जेल में बंद थे. 6 महीने से जेल में थे. दिल्ली शराब नीति से संबंधित घोटाला केस में संजय सिंह ईडी ने उन्हें 4 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था. आप सांसद की दलील पर सुप्रीम कोर्ट बेंच ने माना, 'संजय सिंह के कब्जे से कोई पैसा बरामद नहीं हुआ और संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2024 को जमानत दे दी.
दिल्ली की आबकारी नीति 2021-22 में कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी सीएम अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार कर लिया और रिमांड खत्म होते ही 1 अप्रैल को तिहाड़ जेल भेज दिया गया. ईडी का आरोप है कि जब एक्साइज पॉलिसी 2021-22 तैयार की जा रही थी, तब कई आरोपी केजरीवाल के संपर्क में थे.
हैदराबाद के व्यवसायी अरुण पिल्लई ने खुलासा किया है कि वो एक्साइज पॉलिसी को लेकर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर काम कर रहे थे. 26 फरवरी 2022 से मनीष सिसोदिया जेल में हैं. दिल्ली में जब नई शराब नीति लागू हुई थी, तब आबकारी विभाग सिसोदिया के पास ही था. आरोप है कि आबकारी मंत्री होने के नाते सिसोदिया ने 'मनमाने' और 'एकतरफा' फैसले लिए थे, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और शराब कारोबारियों को फायदा हुआ.
साथ ही, इस मामले में भारत राष्ट्र समिति पार्टी की सदस्य और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता भी फंस गई. ईडी का दावा है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के लिए विजय नायर और दूसरे लोगों को 'साउथ ग्रुप' ने 100 करोड़ की रिश्वत दी थी. के. कविता इस साउथ ग्रुप का हिस्सा थीं. इस ग्रुप में दक्षिण के राजनेता, नौकरशाह और कारोबारी हैं. ईडी के मुताबिक, के. कविता ने 19-20 मार्च 2021 को आरोपी विजय नायर से मुलाकात की थी. कविता को ईडी ने 15 मार्च 2024 को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में CBI याचिका सुनवाई के लिए नई बेंच बनाई है. केजरीवाल सहित संबंधित नेताओं पर अवमानना केस भी चलेगा.
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्साइज़ पॉलिसी केस से जुड़े बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट पर अरविंद केजरीवाल समेत 5 AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्रवाई शुरू की. वीडियो में जानें शराब केस से क्यों अलग हुईं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा? एक्साइज़ पॉलिसी केस में अब तक कहां का रुख करेगा ये मामला.
दिल्ली की शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत AAP नेताओं ने कोर्ट की कार्यवाही का बहिष्कार किया, जिसके बाद एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का फैसला लिया गया है. कोर्ट अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सुनवाई निष्पक्ष और कानूनी रूप से पूरी तरह संतुलित तरीके से आगे बढ़े.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शराब पीकर विधानसभा में आने का आरोप लगा है. इस बीच बीजेपी के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को बदलने की मांग की है. बीजेपी नेताओं ने मान के व्यवहार पर सवाल उठाए और उन्हें डी-एडिक्शन सेंटर भेजने की भी मांग की.
अरविंद केजरीवाल फिलहाल कानूनी, राजनीतिक और चुनावी मोर्चों पर एक साथ जूझ रहे हैं. राघव चड्ढा से मिले जोर के झटके से उबरने की कोशिश तो है ही, दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई के मामले में भी सत्याग्रह कर रहे हैं. चुनौती दिल्ली की राजनीति में बने रहने के साथ ही, पंजाब की सत्ता बचाए रखने की भी है.
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता के साथ विवाद को लेकर सत्याग्रह का रास्ता अपनाने का फैसला लिया है. इसकी शुरुआत उन्होंने आप नेताओं के साथ दिल्ली के राजघाट पहुंचकर की. केजरीवाल ने कहा कि वो न्यायपालिका का सम्मान करते हैं जिसने उन्हें बेल दिलाई और आरोपों से मुक्त किया, लेकिन अब उन्हें 'सत्याग्रह' करना पड़ रहा है.
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि 'वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है.' इस पूरे मामले में वरिष्ठ वकील सतीष टम्टा ने अपनी राय दी है.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में बेंच बदलने के लिए याचिका दाखिल की थी. यह याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने अब पेश ही नहीं होने का ऐलान कर दिया है. केजरीवाल ने कहा है कि वह फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखते हैं.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में बरी किया था, लेकिन सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की. केजरीवाल ने जज बदलने की मांग सुप्रीम कोर्ट में की, जिसे खारिज कर दिया गया.
शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने पेश न होने का फैसला लिया. बेंच बदलने की याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने ‘सत्याग्रह’ की बात कही और सुप्रीम कोर्ट जाने का संकेत दिया.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होने, सत्याग्रह का ऐलान किया है. उन्होंने अब अपने इस फैसले के पीछे की वजह भी बताई है.
कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी तोड़ दी है, और दो तिहाई राज्यसभा सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. लेकिन, अरविंद केजरीवाल को सबसे बड़ा सरप्राइज दिया है संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने. संदीप तो आप विचारधारा और संगठन के पुराने आदमी थे. दूसरे, अशोक मित्तल को राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था.
दिल्ली आबकारी नीति मामले में आप के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सबूतों के अभाव में रिहा हो गए, उनकी रिहाई को CBI ने हाई कोर्ट में चुनौती दी जिसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही हैं. केजरीवाल ने याचिका सुन रही जज ने भी आरोप लगाया और कहा कि जस्टिस शर्मा के आदेशों में एक पैटर्न दिखता है, जिसमें ED और CBI के हर तर्क को स्वीकार किया जाता है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की सुनवाई से रिक्युज यानी अलग होने की गुजारिश की थी. हाई कोर्ट ने कहा कि महज आशंका या संदेह के आधार पर जज की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते.
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज करते हुए खुद को शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के लगाए गए आरोप केवल कयास हैं और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकते.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को वर्चुअल रूप से हाईकोर्ट में पेश होंगे. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. सीबीआई ने इन आरोपों को न्यायिक इतिहास के लिए एक खतरनाक मिसाल बताया है.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जज पर पक्षपात और विपक्ष के मामलों में तेजी से सुनवाई का आरोप लगाते हुए एक्साइज केस में निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने रीक्यूजल मामले में अपना पक्ष अदालत के सामने रख लिया है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा (अतिरिक्त एफिडेविट) दाखिल कर सनसनी मचा दी है. केजरीवाल ने सीधे तौर पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ पेशेवर संबंधों का हवाला देते हुए पक्षपात की गंभीर आशंका जताई है.
दिल्ली शराब नीति मामले में नया मोड़ आया है. AAP संयजोक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी पैरवी की. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ पर अविश्वास जताते हुए मामले की सुनवाई से अलग होने (रिक्यूजल) की मांग की. केजरीवाल ने दलील दी कि अदालती फैसलों से उनके मन में पूर्वाग्रह का डर बैठ गया है.
दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस (शराब घोटाला) में सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल दिल्ली हाई कोर्ट में खुद पेश हुए, और जिरह भी की. केस की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने रिक्युजल की अपील की है.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाई कोर्ट में एक्साइज पॉलिसी केस की सुनवाई कर रहे जज को बदलने की मांग की है. अपने केस की पैरवी के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे, और अरविंद केजरीवाल की अर्जी रिकॉर्ड पर ले ली गई - हालांकि, अपनी दलील पेश करने का मौका अरविंद केजरीवाल को मौका अगली तारीख पर मिलेगा.