चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के आधार पर दाखिल हुई है. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि SIR से जुड़े कई फैसले दूसरे दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए.
याचिका में इन फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की गई है. साथ ही पुराने फॉर्म 6 को बहाल करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने SIR के दौरान वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के तरीके की जांच के लिए SIT बनाने की मांग भी की है.
याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा मनीष गर्ग IAS और चुनाव आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अधिकारियों ने जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत तय जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया.
याचिका में कहा गया है कि SIR से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के अंदर भी मतभेद सामने आए थे. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी.
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बॉम्बे हाई कोर्ट में भी दो याचिकाएं दाखिल
महाराष्ट्र में SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इन याचिकाओं में वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. साथ ही चुनाव आयोग के अंदर मतभेद का भी जिक्र किया गया है.
कोल्हापुर बेंच में तीन स्थानीय निवासियों ने वकील असीम सरोदे की टीम के जरिए याचिका दाखिल की है. इसमें CEC ज्ञानेश कुमार के 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है. याचिका के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी.
इनमें वोटर हटाने, डेटाबेस एक्सेस, सॉफ्टवेयर में रुकावट और जुलाई में फॉर्म 6 में किए गए बदलाव शामिल हैं. याचिका में इसे CEC और Other ECs Act, 2023 की धारा 18 का उल्लंघन बताया गया है. मुंबई की प्रिंसिपल बेंच में वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ और एक अन्य निवासी ने दूसरी याचिका दाखिल की है. इसे वकील हेमंत घडीगांवकर, संदेश मोरे और हितेंद्र गांधी पेश कर रहे हैं.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ADR फैसले का हवाला दिया गया है. इसमें दावा किया गया है कि बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर पहचान पत्र मांग रहे हैं. जो वोटर घर पर नहीं मिले, उन्हें बिना सुनवाई या लिखित आदेश के गैरहाजिर, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट कैटेगरी में डाल दिया गया.
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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका मकसद चुनाव रोकना नहीं है. वे सिर्फ कानून के मुताबिक SIR की प्रक्रिया चाहते हैं. दोनों याचिकाओं में हटाए गए वोटरों के नाम वापस जोड़ने की मांग की गई है. महाराष्ट्र में SIR पर रोक लगाने की मांग भी की गई है. इसके अलावा रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति से जांच कराने की मांग की गई है.
अनीषा माथुर