मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एक बार फिर सुर्खियों और विपक्ष के निशाने पर हैं. इसकी वजह है चुनाव आयोग के कामकाज पर आई एक रिपोर्ट. इसके मुताबिक, SIR और चुनाव आयोग की कुछ प्रक्रियाओं को लेकर 2 चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में करीब 14 बार गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
अब इस रिपोर्ट और दो धड़ों में बंटे आयोग को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग खासकर ज्ञानेश कुमार और सत्ता पक्ष पर हमलावर है. इसी कड़ी में कांग्रेस ने बड़ा फैसला लिया है. सीईसी ज्ञानेश कुमार के मुद्दे को कांग्रेस अब बड़ा बनाने का मन बना लिया है.
कांग्रेस की सबसे पावरफुल कमेटी सीडब्ल्यूसी की 29 सितंबर की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा कि इस बैठक में ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस एक प्रस्ताव ला सकती है. हालांकि, इससे पहले राहुल गांधी गुरुवार को इसी मुद्दे पर एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. जबकि शुक्रवार को देश में सीईसी के खिलाफ कांग्रेस आवाज बुलंद करेगी.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर बीते दिन एक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने लिखा, वोट चोरी देश के लोगों के साथ किया जाने वाला अपराध है. ये संविधान पर सीधा हमला है. बीजेपी, संघ और चुनाव आयोग ने देशद्रोह किया है. न्याय होकर रहेगा. वहीं, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले का सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए. पूरे प्रकरण की जांच होनी चाहिए.
कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी सीईसी ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली का लंबे समय से विरोध कर रहे हैं. अलग-अलग राज्यों में हुए चुनावों में धांधली का आरोप हुए इसे वोट चोरी करार देते रहे हैं. साथ ही वो लगातार ये आरोप लगाते रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार सरकार के इशारे पर काम करते हैं.
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 10 पत्र लिखकर याद दिलाया कि वे लोकतंत्र और वोटर लिस्ट को खत्म न करें. विपक्ष के नेता राहुल गांधी कहते रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार नरेंद्र मोदी के एजेंट हैं. नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने चुनाव प्रणाली को खत्म करने की साजिश रची.
केसी ने आगे कहा, वोटर लिस्ट पूरी तरह से दिल्ली में चुनाव आयोग और IT विभाग के कंट्रोल में है. वे अपनी मर्जी से किसी का भी नाम हटा या जोड़ सकते हैं. ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं. उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए.
जबकि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, अगर रिपोर्ट की बातें और आरोप सही हैं तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं.
वहीं, बीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव किया और कहा कि विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, ये किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में हो सकता है. इस मतभेद को संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. राहुल गांधी और कांग्रेस के तमाम नेताओं के विरोध के साथ ही इस मुद्दे पर ममता बनर्जी की पार्टी भी काफी मुखर है.
पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने तक की मांग की. बनर्जी ने कहा कि उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जाना चाहिए. रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाना चाहिए.
इतना ही नहीं उनके कामकाज की कोर्ट की निगरानी में जांच हो. ज्ञानेश कुमार के सीईसी रहते हुए ही लाखों वोटर्स को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया. पश्चिम बंगाल में ही करीब 35 लाख लोग वोट नहीं डाल पाए.
राहुल गौतम