सुप्रीम कोर्ट ने वरवर राव की जमानत याचिका पर सुनवाई से किया इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने वरवर राव की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इंकार करते हुए वकील इंदिरा जयसिंह को पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में जाने को कहा है.

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वरवर राव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार (फाइल फोटो) वरवर राव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 5:08 PM IST
  • वरवर राव की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार
  • वकील इंदिरा जयसिंह से बॉम्बे हाई कोर्ट जाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी पी वरवर राव की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने वरवर राव के वकील इंदिरा जयसिंह को पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में जाने को कहा है. इससे पहले 15 अक्टूबर को पी वरवर राव की पत्नी हेमलता ने रिहाई के लिए याचिका दाखिल की थी. हेमलता ने याचिका में कहा कि राव को लगातार हिरासत में रखा जाना उनके प्रति क्रूरता और अमानवीय व्यवहार है. उन्हें मेडिकल आधार पर तत्काल जमानत पर रिहा किया जाए. 

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राव को 2018 की एलगार परिषद मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. याचिका में 81 वर्षीय राव को रिहा कर अपने परिवार के साथ हैदराबाद में रहने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था. याचिका में कहा गया कि उन्हें लगातार हिरासत में रखने से संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हनन हो रहा है. 

एनआईए कर रही है जांच
एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में वरवर राव और नौ अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआत में इस मामले की जांच पुणे पुलिस ने की थी लेकिन इस साल जनवरी में इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया. यह पूरा मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे के एल्गार परिषद सम्मेलन में विवादित भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का मानना है कि इसी भाषण के अगले दिन कोरेगांव भीमा वार स्मारक के पास हिंसा हुई थी. 

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बता दें, एनआईए ने गृह मंत्रालय के आदेश पर 24 जनवरी 2020 को यह केस लिया था. गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, एल्गार परिषद के कई सदस्य सीपीआई (माओवादी) के संपर्क में थे, जो यूएपीए के तहत प्रतिबंधित है. सूत्रों का मानना है कि भीमा कोरेगांव की साजिश बड़े स्तर पर रची गई थी. गृह मंत्रालय को यह भी शक है कि भीमा कोरेगांव में पैन इंडिया षड्यंत्र रचा गया. बड़ी साजिश की जांच के लिए अब एनआईए को केस सौंपा गया है.

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क्या है मामला?

1 जनवरी 2018 को पुणे के समीप कोरेगांव-भीमा गांव में दलित समुदाय के लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसका कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध किया था. एल्गार परिषद के सम्मेलन के दौरान इस इलाके में हिंसा भड़की थी, जिसके बाद भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी. इस हिंसा में एक शख्स की जान चली गई और कई लोग जख्मी हो गए थे, जिसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था. 

क्यों होता है हर साल कार्यक्रम?

दरअसल एक जनवरी 1818 को ब्रिटिश आर्मी और पेशवा सेना के बीच जंग हुई, जिसमें ब्रिटिश आर्मी की जीत हुई थी. दलित जाति के 500 से अधिक सैनिकों ने तब पेशवाओं की सेना में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन पेशवाओं ने उन्हें शामिल नहीं किया. फिर दलित और महार जाति के जवान ब्रिटिश सेना में शामिल हो गए और पेशवाओं को इस जंग में मात दी थी. तभी से एक जनवरी के दिन भीमा कोरेगांव में जश्न मनाया जाता है.

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