असम में भीषण बाढ़ से जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित चार जिलों के लोगों के लिए सभी प्रकार के कर्ज की अदायगी पर छह महीने की मोहलत (मोराटोरियम) देने की घोषणा की है. इस बीच राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है, जबकि तीन लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को फेसबुक लाइव के जरिए इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की विशेष बैठक बुलाई गई थी. बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नाबार्ड (NABARD), भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत सभी प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
बैठक में फैसला किया गया कि शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में बाढ़ से प्रभावित लोगों को छह महीने तक अपने सभी प्रकार के ऋण की किस्तें चुकाने से राहत दी जाएगी. हालांकि यह सुविधा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो वास्तव में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. इसके लिए बैंक अपने-अपने ग्राहकों की स्थिति का आकलन करेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग बाढ़ से प्रभावित नहीं हुए हैं, वे अपनी ईएमआई पहले की तरह समय पर जमा करते रहें.
मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए ऋण चुकाने की अवधि भी बढ़ाई जाएगी. कर्ज के प्रकार के अनुसार लोन की अवधि एक वर्ष से लेकर सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ कम हो सके.
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बाढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को हुआ है. कई लोगों की दुकानें पूरी तरह तबाह हो गई हैं और उनका व्यवसाय ठप पड़ गया है. ऐसे छोटे खुदरा व्यापारियों को राहत देने के लिए बैंक बिना किसी नए गिरवी या अतिरिक्त गारंटी के उनके लोन खाते में 10 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराएंगे, ताकि वे दोबारा अपना कारोबार शुरू कर सकें.
मुख्यमंत्री ने धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए भी विशेष सहायता की घोषणा की. उन्होंने कहा कि शिवसागर और चराइदेव जिलों में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए प्रत्येक नामघर (वैष्णव संप्रदाय के पूजा स्थल) के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार की ओर से 1.5 लाख रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाएगी.
राज्य सरकार का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और उनके जीवन को सामान्य बनाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं. प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा है, जबकि बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से आर्थिक सहायता देकर प्रभावित परिवारों को दोबारा खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है.
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