तन्वी की मौत की जांच करेगी AIIMS की कमेटी, ट्रांसप्लांट के लिए किया 14 साल इंतजार

राजस्थान की 16 वर्षीय तन्वी की दिल की बीमारी के कारण दिल्ली एम्स में मौत मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है जो इलाज के पूरे क्लिनिकल कोर्स की जांच करेगी.

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दिल की बीमारी के कारण किशोरी की मौत मामले में एम्स ने गठित की जांच कमेटी. (photo: ITG) दिल की बीमारी के कारण किशोरी की मौत मामले में एम्स ने गठित की जांच कमेटी. (photo: ITG)

अमरदीप कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:25 PM IST

दिल्ली एम्स में दिल की बीमारी से पीड़ित राजस्थान की 16 वर्षीय तन्वी की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है. एम्स प्रशासन का कहना है कि कमेटी के निष्कर्ष और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही अंतिम फैसला तय होगा. तन्वी जन्म से ही वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) से पीड़ित थी. एम्स में सर्जरी के लिए 14 सालों तक लंबे इंतजार के बाद तन्वी ने मंगलवार तड़के दम तोड़ दिया.

एम्स के मुताबिक, अस्पताल में किशोरी की मौत और परिजनों के भारी आक्रोश के बाद एम्स नई दिल्ली ने आधिकारिक तौर पर जांच कमेटी का गठन किया है. ये कमेटी तन्वी के इलाज के पूरे क्लिनिकल कोर्स और उन सभी परिस्थितियों की विस्तृत जांच करेगी, जिसके तहत यह दुखद घटना घटी. एम्स के अनुसार, बच्ची कापोस्टमार्टम कराया गया है और कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.

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एम्स का पक्ष

इससे पहले एम्स के सीटीवीएस विभाग के प्रोफेसर और हेड डॉ. वी. देवागुरू द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया कि 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी ओपीडी में जांच के दौरान तन्वी को वीएसडी (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया की पुष्टि हुई थी, जिसमें फेफड़ों तक खून ले जाने वाली पल्मोनरी आर्टरीज एब्सेंट (मौजूद नहीं) होतीं. साल 2013 में डॉ. सचिन द्वारा मूल्यांकन के बाद 2018 में ये निष्कर्ष निकला कि सर्जरी संभव नहीं है और मरीज को मेडिकल मैनेजमेंट पर रखा गया. डॉ. देवागुरू और बाद में डॉ. ए. के. बिसोई ने भी मेडिकल मैनेजमेंट की सलाह दी थी.

एम्स के मुताबिक, मरीज की तबीयत बिगड़ने पर पिता के दोबारा आने के बाद उसे संभावित हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के लिए 24 अगस्त 2026 को भर्ती किया गया था. जांच प्रक्रिया के तहत एंडोस्कोपी कराई गई थी. एक सितंबर को तड़के 2:50 बजे बच्ची ने थकान और कमजोरी की शिकायत की, उसका शरीर नीला पड़ गया और ऑक्सीजन सेचुरेशन गिरकर 48% रह गया. इसके बाद बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया. इसके बाद उसे हाइपॉक्सिक स्पेल (Hypoxic Spell) हुआ, जिसके कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ.

एम्स का कहना है कि तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे को बचाया नहीं जा सका. सुबह 5:06 बजे बच्चे को हाइपॉक्सिक स्पेल के कारण मृत घोषित कर दिया गया.

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पीड़ित पिता ने लगाए गंभीर आरोप

तन्वी के पिता मुकेश कुमार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बेटी के दिल में जन्म से ही छेद था. वो 10 अक्टूबर 2012 को पहली बार एम्स कार्डियोलॉजी विभाग पहुंचे, जहां से उन्हें सीटीवीएस विभाग भेजा गया. सीटीवीएस डॉक्टरों ने सर्जरी के लिए 4 अप्रैल 2014 को सवा लाख रुपये और परिजनों से चार यूनिट खून भी जमा करा लिया. इसके बाद 2 सितंबर 2015 की तारीख दी गई, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर बेड खाली न होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया.

मुकेश कुमार के मुताबिक 16 नवंबर 2015 को अगली तारीख पर अस्पताल में इंप्लांट न होने की बात कहकर सर्जरी टाल दी गई. कंपनी के प्रतिनिधि को 30 हजार रुपये देकर इंप्लांट खरीदने को कहा गया जो उन्होंने दे दिए. दिसंबर 2015 में भर्ती करने के बाद दांतों में कीड़े लगे होने का हवाला देकर सर्जरी फिर टाल दी गई और 4 जनवरी 2016 की तारीख मिली. इसके बाद साल 2020 में कोरोना आने और उसके बाद भी लगातार सर्जरी टलती रही.

पिता का आरोप है कि पीएमओ में शिकायत देने के बाद एम्स से शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा और धमकियां मिलने लगीं. पिता ने कहा कि यदि समय से इलाज मिल जाता तो उनकी बेटी आज उनके बीच होती.

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24 अगस्त को किया भर्ती

मामला मीडिया में आने के बाद एम्स के डॉक्टरों ने 24 अगस्त को तन्वी को भर्ती किया. डॉक्टरों ने कहा कि अब दिल की सामान्य सर्जरी संभव नहीं है और हृदय व फेफड़ा प्रत्यारोपण करना पड़ेगा. सोमवार शाम को किशोरी की एंडोस्कोपी जांच की गई. इसके बाद मंगलवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि तन्वी की मौत हो गई है.

वहीं, बेटी की मौत के बाद मुकेश कुमार ने इसे महज लापरवाही नहीं, बल्कि हत्या करार दिया है. उन्होंने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस में मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है.

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