मंदिर में भोलेनाथ से लिपटने को बेताब था 12 फीट का किंग कोबरा! जूते पर बोरा पहनकर हुआ रेस्क्यू

ओडिशा के गंजाम जिले के चिकिटी गढ़ स्थित रतनेई मंदिर में करीब 12 फीट लंबा किंग कोबरा मिलने से हड़कंप मच गया. पूजा के लिए पहुंचे पुजारी ने सांप को देखते ही वन विभाग को सूचना दी. स्नेक हेल्पलाइन टीम ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया. टीम ने जूतों के ऊपर बोरे पहनकर रेस्क्यू किया.

Advertisement
मंदिर में किंंग कोबरा देखकर सभी चौंक गए (Photo: ITG) मंदिर में किंंग कोबरा देखकर सभी चौंक गए (Photo: ITG)

अजय कुमार नाथ

  • गंजाम  ,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:03 PM IST

ओडिशा के गंजाम जिले में एक मंदिर का दरवाजा खुला तो सामने ऐसा नजारा था कि पुजारी के कदम वहीं रुक गए. मंदिर के अंदर करीब 12 फीट लंबा विशाल किंग कोबरा मौजूद था. वह मंदिर में इस तरह मौजूद था कि कुछ देर के लिए वहां का पूरा माहौल बदल गया. पुजारी ने अंदर जाने की हिम्मत नहीं की और तुरंत वन विभाग को सूचना दी.

Advertisement

मामला चिकिटी गढ़ स्थित रतनेई मंदिर का है. सूचना मिलते ही स्नेक हेल्पलाइन की टीम मौके पर पहुंची. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद विशाल किंग कोबरा को सुरक्षित पकड़ लिया गया. रेस्क्यू के दौरान टीम ने भी बेहद सावधानी बरती. मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखते हुए रेस्क्यू करने वालों ने जूते के ऊपर बोरे पहन रखे थे.

 शाम पूजा का समय था. पुजारी मंदिर पहुंचे और जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, उनकी नजर अंदर मौजूद एक विशाल सांप पर पड़ी. सांप सामान्य नहीं था. उसका आकार देखकर पुजारी के होश उड़ गए. करीब 12 फीट लंबा यह सांप किंग कोबरा था. उसे मंदिर के अंदर देखकर पुजारी ने तुरंत पीछे हटना ही बेहतर समझा. उन्होंने मंदिर में प्रवेश करने के बजाय इसकी जानकारी चिकिटी वन विभाग को दी. देखते ही देखते यह खबर आसपास भी फैल गई और मंदिर के पास लोगों की भीड़ जुटने लगी. हालांकि, लोगों को सांप के करीब जाने से रोक दिया गया. क्योंकि किंग कोबरा बेहद विषैला सांप है और उसे पकड़ने के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी खतरनाक साबित हो सकती थी.

Advertisement

वन विभाग की सूचना पर पहुंची स्नेक हेल्पलाइन

वन विभाग को सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्नेक हेल्पलाइन के सदस्य रामचंद्र साहू और उनके सहयोगी जगन्नाथ साहू मौके पर पहुंचे. दोनों ने मंदिर के अंदर मौजूद किंग कोबरा को देखकर स्थिति का आकलन किया. सांप को पकड़ना आसान नहीं था. मंदिर का स्थान, सांप का आकार और उसके स्वभाव को देखते हुए पूरी कार्रवाई बेहद सावधानी से करनी पड़ी. रेस्क्यू टीम ने धीरे-धीरे सांप को काबू करने की कोशिश शुरू की. इस दौरान करीब एक घंटे तक मशक्कत चली. आखिरकार टीम को सफलता मिली और विशाल किंग कोबरा को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया.

जूते के ऊपर बोरे क्यों पहने थे रेस्क्यू करने वाले

इस रेस्क्यू की तस्वीरों और वीडियो में एक बात ने लोगों का खास ध्यान खींचा. स्नेक हेल्पलाइन के सदस्य जूते पहने हुए थे, लेकिन जूतों के ऊपर बोरे भी लपेटे हुए थे. इसके पीछे दो वजहें थीं. पहली वजह मंदिर की पवित्रता और स्वच्छता से जुड़ी थी. चूंकि रेस्क्यू एक मंदिर के अंदर किया जा रहा था, इसलिए टीम ने जूतों के ऊपर बोरे पहन लिए, ताकि मंदिर परिसर की मर्यादा और श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखा जा सके. दूसरी वजह सुरक्षा थी. किंग कोबरा के रेस्क्यू के दौरान पैरों की सुरक्षा भी जरूरी थी. जूते और उनके ऊपर बोरे एक अतिरिक्त परत की तरह काम कर रहे थे. यानी रेस्क्यू टीम ने सांप को पकड़ने के साथ-साथ मंदिर की धार्मिक भावनाओं और अपनी सुरक्षा दोनों का ध्यान रखा.

Advertisement

ढोल की आवाज पर ठहर गया सांप

रेस्क्यू के दौरान एक और दिलचस्प दृश्य देखने को मिला. मंदिर के आसपास ढोल की आवाज सुनाई दे रही थी और किंग कोबरा कुछ देर तक उस आवाज की ओर ध्यान देता नजर आया. मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य भी कौतूहल का विषय बन गया. ऐसा लग रहा था जैसे कुछ पल के लिए विशाल नाग की नजर रेस्क्यू से हटकर ढोल की तरफ टिक गई हो. हालांकि, सांप के व्यवहार को लेकर वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालना अलग विषय है. विशेषज्ञों के मुताबिक सांप इंसानों की तरह संगीत का आनंद लेते हैं, ऐसा मानना सही नहीं है. वे जमीन में होने वाले कंपन और आसपास की हलचल को महसूस कर सकते हैं. ऐसे में ढोल की आवाज से पैदा हुए कंपन पर उसकी प्रतिक्रिया संभव है.

मंदिर में कैसे पहुंचा इतना बड़ा किंग कोबरा

रेस्क्यू के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर करीब 12 फीट लंबा किंग कोबरा मंदिर के अंदर पहुंचा कैसे. इसका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है. मंदिर के आसपास हरियाली और प्राकृतिक क्षेत्र होने के कारण सांपों की मौजूदगी असामान्य नहीं मानी जाती. संभव है कि किंग कोबरा आसपास के इलाके से मंदिर में आ गया हो और वहां उसे सुरक्षित जगह मिल गई हो. किंग कोबरा आमतौर पर दूसरे सांपों को भी अपना शिकार बनाता है. हालांकि, मंदिर के अंदर उसके पहुंचने की सटीक वजह की पुष्टि नहीं हुई है. मंदिर के अंदर इतने बड़े जहरीले सांप के मिलने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया. लोगों को चिंता थी कि कहीं सांप किसी दूसरे हिस्से में न चला जाए या किसी श्रद्धालु के सामने न आ जाए. लेकिन स्नेक हेल्पलाइन की टीम के पहुंचने और सावधानी से रेस्क्यू किए जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली.

Advertisement

मंदिर में नाग का दिखना बना चर्चा का विषय

रतनेई मंदिर में 12 फीट लंबे किंग कोबरा के मिलने की घटना अब आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. किसी ने इसे भोलेनाथ के मंदिर में नाग के आने से जोड़कर देखा तो किसी के लिए यह एक असाधारण वन्यजीव रेस्क्यू की घटना रही. लेकिन इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मंदिर में मौजूद इतने बड़े और विषैले सांप को लोगों ने खुद पकड़ने की कोशिश नहीं की. वन विभाग को सूचना दी गई और प्रशिक्षित स्नेक हेल्पलाइन की मदद ली गई. यह सावधानी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि किंग कोबरा के सामने अचानक जाने या उसे छेड़ने से गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. फिलहाल करीब 12 फीट लंबे इस किंग कोबरा को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है. मंदिर में पूजा-पाठ भी सामान्य तरीके से जारी है.

 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »