ओडिशा के गंजाम जिले में एक मंदिर का दरवाजा खुला तो सामने ऐसा नजारा था कि पुजारी के कदम वहीं रुक गए. मंदिर के अंदर करीब 12 फीट लंबा विशाल किंग कोबरा मौजूद था. वह मंदिर में इस तरह मौजूद था कि कुछ देर के लिए वहां का पूरा माहौल बदल गया. पुजारी ने अंदर जाने की हिम्मत नहीं की और तुरंत वन विभाग को सूचना दी.
मामला चिकिटी गढ़ स्थित रतनेई मंदिर का है. सूचना मिलते ही स्नेक हेल्पलाइन की टीम मौके पर पहुंची. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद विशाल किंग कोबरा को सुरक्षित पकड़ लिया गया. रेस्क्यू के दौरान टीम ने भी बेहद सावधानी बरती. मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखते हुए रेस्क्यू करने वालों ने जूते के ऊपर बोरे पहन रखे थे.
शाम पूजा का समय था. पुजारी मंदिर पहुंचे और जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, उनकी नजर अंदर मौजूद एक विशाल सांप पर पड़ी. सांप सामान्य नहीं था. उसका आकार देखकर पुजारी के होश उड़ गए. करीब 12 फीट लंबा यह सांप किंग कोबरा था. उसे मंदिर के अंदर देखकर पुजारी ने तुरंत पीछे हटना ही बेहतर समझा. उन्होंने मंदिर में प्रवेश करने के बजाय इसकी जानकारी चिकिटी वन विभाग को दी. देखते ही देखते यह खबर आसपास भी फैल गई और मंदिर के पास लोगों की भीड़ जुटने लगी. हालांकि, लोगों को सांप के करीब जाने से रोक दिया गया. क्योंकि किंग कोबरा बेहद विषैला सांप है और उसे पकड़ने के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी खतरनाक साबित हो सकती थी.
वन विभाग की सूचना पर पहुंची स्नेक हेल्पलाइन
वन विभाग को सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्नेक हेल्पलाइन के सदस्य रामचंद्र साहू और उनके सहयोगी जगन्नाथ साहू मौके पर पहुंचे. दोनों ने मंदिर के अंदर मौजूद किंग कोबरा को देखकर स्थिति का आकलन किया. सांप को पकड़ना आसान नहीं था. मंदिर का स्थान, सांप का आकार और उसके स्वभाव को देखते हुए पूरी कार्रवाई बेहद सावधानी से करनी पड़ी. रेस्क्यू टीम ने धीरे-धीरे सांप को काबू करने की कोशिश शुरू की. इस दौरान करीब एक घंटे तक मशक्कत चली. आखिरकार टीम को सफलता मिली और विशाल किंग कोबरा को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया.
जूते के ऊपर बोरे क्यों पहने थे रेस्क्यू करने वाले
इस रेस्क्यू की तस्वीरों और वीडियो में एक बात ने लोगों का खास ध्यान खींचा. स्नेक हेल्पलाइन के सदस्य जूते पहने हुए थे, लेकिन जूतों के ऊपर बोरे भी लपेटे हुए थे. इसके पीछे दो वजहें थीं. पहली वजह मंदिर की पवित्रता और स्वच्छता से जुड़ी थी. चूंकि रेस्क्यू एक मंदिर के अंदर किया जा रहा था, इसलिए टीम ने जूतों के ऊपर बोरे पहन लिए, ताकि मंदिर परिसर की मर्यादा और श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखा जा सके. दूसरी वजह सुरक्षा थी. किंग कोबरा के रेस्क्यू के दौरान पैरों की सुरक्षा भी जरूरी थी. जूते और उनके ऊपर बोरे एक अतिरिक्त परत की तरह काम कर रहे थे. यानी रेस्क्यू टीम ने सांप को पकड़ने के साथ-साथ मंदिर की धार्मिक भावनाओं और अपनी सुरक्षा दोनों का ध्यान रखा.
ढोल की आवाज पर ठहर गया सांप
रेस्क्यू के दौरान एक और दिलचस्प दृश्य देखने को मिला. मंदिर के आसपास ढोल की आवाज सुनाई दे रही थी और किंग कोबरा कुछ देर तक उस आवाज की ओर ध्यान देता नजर आया. मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य भी कौतूहल का विषय बन गया. ऐसा लग रहा था जैसे कुछ पल के लिए विशाल नाग की नजर रेस्क्यू से हटकर ढोल की तरफ टिक गई हो. हालांकि, सांप के व्यवहार को लेकर वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालना अलग विषय है. विशेषज्ञों के मुताबिक सांप इंसानों की तरह संगीत का आनंद लेते हैं, ऐसा मानना सही नहीं है. वे जमीन में होने वाले कंपन और आसपास की हलचल को महसूस कर सकते हैं. ऐसे में ढोल की आवाज से पैदा हुए कंपन पर उसकी प्रतिक्रिया संभव है.
मंदिर में कैसे पहुंचा इतना बड़ा किंग कोबरा
रेस्क्यू के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर करीब 12 फीट लंबा किंग कोबरा मंदिर के अंदर पहुंचा कैसे. इसका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है. मंदिर के आसपास हरियाली और प्राकृतिक क्षेत्र होने के कारण सांपों की मौजूदगी असामान्य नहीं मानी जाती. संभव है कि किंग कोबरा आसपास के इलाके से मंदिर में आ गया हो और वहां उसे सुरक्षित जगह मिल गई हो. किंग कोबरा आमतौर पर दूसरे सांपों को भी अपना शिकार बनाता है. हालांकि, मंदिर के अंदर उसके पहुंचने की सटीक वजह की पुष्टि नहीं हुई है. मंदिर के अंदर इतने बड़े जहरीले सांप के मिलने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया. लोगों को चिंता थी कि कहीं सांप किसी दूसरे हिस्से में न चला जाए या किसी श्रद्धालु के सामने न आ जाए. लेकिन स्नेक हेल्पलाइन की टीम के पहुंचने और सावधानी से रेस्क्यू किए जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली.
मंदिर में नाग का दिखना बना चर्चा का विषय
रतनेई मंदिर में 12 फीट लंबे किंग कोबरा के मिलने की घटना अब आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. किसी ने इसे भोलेनाथ के मंदिर में नाग के आने से जोड़कर देखा तो किसी के लिए यह एक असाधारण वन्यजीव रेस्क्यू की घटना रही. लेकिन इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मंदिर में मौजूद इतने बड़े और विषैले सांप को लोगों ने खुद पकड़ने की कोशिश नहीं की. वन विभाग को सूचना दी गई और प्रशिक्षित स्नेक हेल्पलाइन की मदद ली गई. यह सावधानी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि किंग कोबरा के सामने अचानक जाने या उसे छेड़ने से गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. फिलहाल करीब 12 फीट लंबे इस किंग कोबरा को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है. मंदिर में पूजा-पाठ भी सामान्य तरीके से जारी है.
अजय कुमार नाथ