NCP के शीर्ष नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलें तेज हो गई थीं. हालांकि, एनसीपी ने इन तमाम खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि पार्टी में कोई अंदरूनी कलह नहीं है.
सोमवार सुबह एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस बैठक के बाद ये कयास लगाए जाने लगे कि बीजेपी एनडीए को मजबूत करने के लिए NCP के दोनों धड़ों के विलय पर विचार कर रही है.
ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार को दरकिनार किया जा रहा है. लेकिन अब NCP ने बताया कि दिल्ली की ये बैठक पहले से तय थी और पूरी पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पूरी तरह से एकजुट है.
'सुनेत्रा पवार को दरकिनार करने के दावे निराधार'
NCP के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार को दरकिनार किए जाने के दावे पूरी तरह गलत, निराधार और भ्रामक हैं.
पाटिल ने बताया कि ये मुलाकात अचानक नहीं हुई थी. इससे पहले सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार खुद अमित शाह से मिल चुके थे, जहां उन्होंने जनवरी 2026 में अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के सामने आई चुनौतियों पर चर्चा की थी. उस मुलाकात के दौरान ही सुनेत्रा पवार ने शाह को बताया था कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलेगा और इसके लिए समय मांगा गया था.
उमेश पाटिल ने कहा कि इस बैठक को बेवजह राजनीतिक रंग देने और पार्टी के भीतर मतभेद दिखाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा, 'एनसीपी महायुति गठबंधन का एक अहम घटक है और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में मजबूती से खड़ी है.' उन्होंने मीडिया से अपील की कि वो तथ्य जांचे बिना खबरें न चलाए और बैठकों को लेकर अटकलबाजी न करें.
सुनेत्रा पवार ने बुलाई बैठक
वहीं, NCP में गुटबाजी की अटकलों के बीच सुनेत्रा पवार ने मंगलवार शाम को एक बड़ी बैठक बुलाई है. उन्होंने अपने आधिकारिक आवास 'देवगिरि' में पार्टी के सभी विधायकों को बैठक के लिए बुलाया है.
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बता दें कि इसी साल जनवरी 2026 में अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली थी. जुलाई में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने उनके चुनाव की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए नए सिरे से संगठन चुनाव की मांग की थी. हालांकि, प्रफुल्ल पटेल ने उन आरोपों को खारिज कर दिया था.
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