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Ashtalakshmi: अष्टलक्ष्मी! मां लक्ष्मी के 8 स्वरूप, जानें किसकी पूजा से होगा धन लाभ

शास्त्रों में देवी लक्ष्मी के आठ अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिन्हें अष्टलक्ष्मी भी कहा जाता है. देवी के 8 अलग-अलग स्वरूप धन, अन्न, संतान, साहस, विजय और ज्ञान जैसी कामनाओं की पूर्ति के लिए जाने जाते हैं.

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जानें मां लक्ष्मी के 8 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा से क्या लाभ मिलते हैं. (Photo: ITG)
जानें मां लक्ष्मी के 8 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा से क्या लाभ मिलते हैं. (Photo: ITG)

इस साल दीवाली का त्योहार 8 नंवबर को मनाया जाएगा. दीवाली का त्योहार हर साल कार्तिक अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है. मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या तिथि पर माता लक्ष्मी की पूजा से केवल धनधान्य में वृद्धि नहीं होती है, बल्कि सुख, सौभाग्य और खुशहाली बढ़त पर रहती है. शास्त्रों में देवी लक्ष्मी के आठ अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिन्हें अष्टलक्ष्मी भी कहा जाता है. देवी के 8 अलग-अलग स्वरूप धन, अन्न, संतान, साहस, विजय और ज्ञान जैसी कामनाओं की पूर्ति के लिए जाने जाते हैं. आइए आपको इन 8 स्वरूपों के बारे में बताते हैं.

1. आदि लक्ष्मी
आदि लक्ष्मी को महालक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है. देवी के इस रूप का संबंध सृष्टि के मूल आधार और आध्यात्मिक कल्याण से जोड़ा जाता है. इन्हें जीवन के आरंभ और पालनहार के रूप में देखा जाता है. श्रीमद्देवीभागवत पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, महालक्ष्मी का त्रिदेवों की उत्पत्ति में विशेष स्थान बताया गया है. भक्त आदि लक्ष्मी की उपासना सांसारिक सुखों के साथ आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना से भी करते हैं.

2. धन लक्ष्मी
धन लक्ष्मी मां लक्ष्मी का वह स्वरूप हैं, जिनकी आराधना आर्थिक उन्नति, संपन्नता और कर्ज से मुक्ति की कामना के साथ की जाती है. धार्मिक चित्रण में उनके हाथों में कमल और धन से भरा कलश दिखाई देता है. प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान विष्णु पर कुबेर का ऋण हो गया था और धन लक्ष्मी ने उन्हें उससे मुक्ति दिलाने में सहायता की थी. इसी मान्यता के कारण धन लक्ष्मी की पूजा को आर्थिक संकट दूर करने और घर में वैभव बढ़ाने की कामना से जोड़ा जाता है.

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3. धान्य लक्ष्मी
धान्य लक्ष्मी को अन्न और कृषि की समृद्धि की देवी कहा जाता है. उनके स्वरूप जीवन में अन्न के महत्व को दर्शाता है. कुछ धार्मिक परंपराओं में उनका संबंध अन्नपूर्णा देवी से भी जोड़ा गया है. मान्यता है कि जिस घर में भोजन का सम्मान किया जाता है और अन्न को व्यर्थ नहीं गंवाया जाता है. वहां बरकत बनी रहती है. धान्य लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भोजन का आदर करना, जरूरतमंदों को अन्न देना और उसकी बर्बादी से बचना महत्वपूर्ण माना जाता है.

4. गज लक्ष्मी
गज लक्ष्मी का स्वरूप हाथियों और कमल पुष्प से जुड़ा हुआ है. उन्हें राजलक्ष्मी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी उपासना राजसत्ता, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य की प्राप्ति से संबंधित मानी जाती है. पौराणिक मान्यताओं में देवी के इस रूप को भगवान इंद्र की खोई हुई संपदा वापस पाने में सहायक बताया गया है. गज लक्ष्मी की पूजा कृषि से जुड़े लोगों के लिए भी विशेष महत्व रखती है. संतान की इच्छा रखने वाले भक्त भी उनकी आराधना करते हैं.

5. संतान लक्ष्मी
अष्टलक्ष्मी में संतान लक्ष्मी का विशेष स्थान है. देवी के इस स्वरूप की पूजा संतान की खुशहाली, दीर्घायु और परिवार के सुख की कामना से की जाती है. चित्रों में उन्हें एक बालक के साथ दिखाया जाता है. कई जगहों पर इनका स्वरूप स्कंदमाता से मिलता-जुलता बताया गया है. उनके चार हाथों में कलश, तलवार और ढाल जैसे आयुधों का उल्लेख मिलता है. देवी के आयुध उनकी रक्षक शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं. भक्त संतान लक्ष्मी से बच्चों की सुरक्षा, परिवार की उन्नति और घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.

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6. वीर लक्ष्मी
वीर लक्ष्मी को साहस, पराक्रम और विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने की शक्ति से जोड़कर देखा जाता है. देवी के इस रूप की आठ भुजाएं बताई जाती हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं. उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में सफलता और सुरक्षा के लिए केवल साधन ही नहीं, बल्कि हिम्मत और दृढ़ संकल्प भी आवश्यक हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, वीर लक्ष्मी की पूजा करने से भक्तों को चुनौतियों का सामना करने और संघर्ष में विजय पाने का आशीर्वाद मिलता है. इस स्वरूप को वीरता और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है.

7. विजया लक्ष्मी
विजया लक्ष्मी को विजया लक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है. उनका नामही जीत और सफलता का भाव दर्शाता है. देवी के इस स्वरूप की आराधना कार्यों में सफलता, बाधाओं पर विजय और लक्ष्य प्राप्ति की कामना से की जाती है. धार्मिक चित्रण में उन्हें लाल वस्त्र पहने कमल पर विराजमान और आठ भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है. उनका एक प्रमुख भाव अभय प्रदान करना है. यानी भक्तों के मन से भय दूर करना. मान्यता है कि विजया लक्ष्मी की उपासना से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिलता है.

8. विद्या लक्ष्मी
विद्या लक्ष्मी का संबंध ज्ञान, शिक्षा, कला और बौद्धिक विकास से माना जाता है. देवी के इस स्वरूप की पूजा विद्यार्थी, शिक्षक और ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाले लोग करते हैं. सफेद वस्त्र धारण करने वाली विद्या लक्ष्मी का स्वरूप मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप से मिलता-जुलता है. मान्यता है कि विद्या लक्ष्मी की आराधना से बुद्धि के विकास, सीखने की क्षमता और शिक्षा में सफलता की कामना की जाती है. देवी का यह रूप बताता है कि समृद्धि का अर्थ केवल धन-संपत्ति नहीं, बल्कि ज्ञान और विवेक भी है.

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