महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की एक अदालत ने 12वीं क्लास के एक 17 साल के लड़के को अग्रिम जमानत दे दी है. इस लड़के पर कॉलेज की एक सहपाठी लड़की का पीछा करने और उसे परेशान करने का आरोप है. पॉक्सो एक्ट के लिए बनी विशेष अदालत ने कहा कि बोर्ड परीक्षा के दौरान लड़के को जेल भेजना और उसकी पढ़ाई रोकना उसके लिए बहुत नुकसानदायक होगा. यह आदेश सोमवार को स्पेशल जज आर.जे. पवार ने दिया.
पुलिस के मुताबिक, लड़का और लड़की कॉलेज में एक दूसरे से मिले थे और अक्सर बात करते थे. बाद में लड़की के पिता ने उसे लड़के से दूरी बनाने के लिए कहा, जिसके बाद लड़की ने बात करना बंद कर दिया. खार पुलिस में शिकायत दर्ज हुई कि इसके बाद लड़का लड़की का पीछा करने लगा और उसे बार बार कॉल करने लगा.
पुलिस का कहना है कि जब लड़के ने मिलने की जिद की और लड़की के पिता ने मना कर दिया, तो लड़के ने उन्हें गाली दी और धमकाया. लड़के के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 और 351(2) के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत केस दर्ज हुआ.
लड़के के वकील ने सारे आरोपों से इनकार किया. उनका कहना है कि सितंबर 2025 से दोनों की बातचीत आपसी सहमति से हो रही थी. वकील के मुताबिक, विवाद तब शुरू हुआ जब लड़के को पता चला कि लड़की किसी और लड़के से भी बात कर रही है, और वह इस बारे में लड़की के पिता को बताने गया था.
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वकील ने यह भी दावा किया कि यह केस बदले की भावना से दर्ज कराया गया, क्योंकि लड़की की बड़ी बहन ने पहले लड़के के पिता को धमकाया था. बचाव पक्ष ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग को परेशानी और परिवार से अलगाव से बचाने के लिए अग्रिम जमानत का अधिकार है.
जज पवार ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12(1) के तहत कानून से जूझ रहे बच्चे को जमानत देने का मजबूत आधार है. अदालत ने पाया कि इस मामले में जमानत न देने की कोई वजह नहीं बनती, क्योंकि न तो लड़के को किसी अपराधी से जोड़ने की आशंका है और न ही उसे किसी तरह का खतरा है.
जज ने कहा कि इस समय लड़के की पढ़ाई रुकना और परिवार से अलग होना उसके लिए बहुत भारी पड़ेगा. अदालत ने यह भी माना कि लड़का पहली बार किसी मामले में फंसा है और उसके खिलाफ पहले कोई केस नहीं है, इसलिए उससे पूछताछ के लिए हिरासत की जरूरत नहीं है क्योंकि सबूत ज्यादातर कागजी और गवाहों पर आधारित हैं.
अदालत ने 15 हजार रुपये के मुचलके और एक जमानती पर अग्रिम जमानत मंजूर कर दी. साथ ही सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं. लड़का अब पीड़िता से किसी भी तरह से संपर्क नहीं कर सकेगा, न उसका पीछा करेगा और न उसके पास जाएगा. उसे अदालत की इजाजत के बिना मुंबई शहर छोड़ने की भी मनाही है.
विद्या