सूखे के बीच VVIP के लिए 12.68 करोड़ की 44 गाड़ियां खरीदने को मंजूरी, महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर विपक्ष हमलावर

महाराष्ट्र सरकार ने 12.68 करोड़ रुपये की लागत से 44 नए वाहनों की खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें बुलेटप्रूफ लैंड क्रूजर भी शामिल है.

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महाराष्ट्र में सूखा की हालत है (File Photo: PTI) महाराष्ट्र में सूखा की हालत है (File Photo: PTI)

मुस्तफा शेख

  • मुंबई,
  • 14 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:33 PM IST

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे के हालात के बीच राज्य सरकार ने VVIP और राजकीय अतिथियों के लिए 12.68 करोड़ रुपये की लागत से 44 नई गाड़ियां खरीदने को मंजूरी दी है. सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है. विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि एक तरफ राज्य के किसान सूखे और फसलों के नुकसान से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार VVIP सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.

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महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल विभाग ने 9 अक्टूबर को इस खरीद को मंजूरी देने वाला शासनादेश जारी किया था. इसके मुताबिक, नई गाड़ियों की खरीद का उद्देश्य मुंबई के वर्ली में मौजूद सरकारी ट्रांसपोर्ट सर्विस के पुराने और इस्तेमाल के लायक नहीं रह गए वाहनों को बदलना है. इसके अलावा राज्य के विभिन्न जिलों में कलेक्टर कार्यालयों से जुड़े उन वाहनों को भी बदला जाएगा, जिनका इस्तेमाल VIP प्रोटोकॉल संबंधी कार्यों में किया जाता है.

4.07 करोड़ की बुलेटप्रूफ लैंड क्रूजर भी खरीदेगी सरकार

सरकार की ओर से मंजूर की गई 44 गाड़ियों में सबसे महंगी टोयोटा लैंड क्रूजर 300 है. हाईलेवल बैलिस्टिक सुरक्षा से लैस इस बख्तरबंद गाड़ी की कीमत करीब 4.07 करोड़ रुपये बताई गई है. इसके अलावा 32 टोयोटा इनोवा क्रिस्टा खरीदी जाएंगी, जिनमें प्रत्येक की अनुमानित कीमत 20.71 लाख रुपये है. दो टोयोटा फॉर्च्यूनर भी खरीदी जाएंगी, जिनकी कीमत करीब 30 लाख रुपये प्रति वाहन है.

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सरकार ने सात मारुति सुजुकी अर्टिगा खरीदने को भी मंजूरी दी है. इनमें हरएक की कीमत करीब 11.59 लाख रुपये बताई गई है. इसके साथ ही 31 लाख रुपये की एक फोर्स अर्बानिया बस और 9 लाख रुपये का एक टाटा 207 टोइंग वाहन भी खरीदा जाएगा.

सरकार के फैसले पर विपक्ष का हमला

महाराष्ट्र के कई तालुकाओं में औसत से कम बारिश होने के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं. कई इलाकों में किसानों को फसलों के नुकसान, पानी की कमी और बढ़ते आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे समय में VVIP वाहनों की खरीद को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सूखा प्रभावित किसान राहत सहायता का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सरकार सरकारी धन का इस्तेमाल महंगी गाड़ियों और VIP सुविधाओं पर कर रही है. कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार एक तरफ जनता को वित्तीय अनुशासन का संदेश देती है, जबकि दूसरी तरफ VIP गाड़ियों के लिए करोड़ों रुपये मंजूर कर रही है.

सरकार ने बताया क्यों जरूरी है नई गाड़ियों की खरीद

वहीं, सरकार के प्रतिनिधियों ने इस खर्च का बचाव किया है. उनका कहना है कि पुराने वाहनों को बदलने की प्रक्रिया कई महीने पहले ही शुरू हो चुकी थी. यह कोई अचानक लिया गया फैसला या लग्जरी सुविधाएं बढ़ाने की कोशिश नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रेग्युलर रखरखाव और पुराने वाहनों को बदलने की प्रोसेस का हिस्सा है.

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अधिकारियों के मुताबिक, प्रोटोकॉल ड्यूटी में इस्तेमाल होने वाली कई गाड़ियां अपनी निर्धारित परिचालन अवधि पूरी कर चुकी हैं. ऐसे में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की हाई सिक्योरिटी वाली यात्राओं के दौरान इन वाहनों के खराब होने का खतरा बना रहता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नई गाड़ियों की खरीद को मंजूरी दी गई है.

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