महाराष्ट्र में कर्ज और आर्थिक संकट से जुड़ी आत्महत्याओं का गंभीर मुद्दा एक बार फिर सामने आया है. लातूर जिले में चार प्राइवेट फाइनेंस संस्थानों से लिए गए कर्ज और बढ़ते ब्याज से परेशान 28 साल के युवक दत्ता सूर्यकांत कुंभार ने 27 अक्टूबर को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली.
पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें युवक ने कर्ज की किस्तें चुकाने के दबाव और आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया है.
यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है, जब एक RTI (राइट टू इंफॉर्मेशन) से मिले आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच 54 महीनों में 13,928 किसानों ने खुदकुशी की है. RTI एक्टिविस्ट जितेंद्र घाडगे ने इन आंकड़ों में पारदर्शिता और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मदद दिए जाने की जरूरत पर सवाल उठाए हैं.
जानकारी के मुताबिक, मृतक दत्ता सूर्यकांत कुंभार लातूर जिले की शिरूर अनंतपाल तहसील के रानी अंकुलगा गांव के रहने वाले थे. उन्होंने चार वित्तीय संस्थानों से करीब 6 लाख 20 हजार रुपये का कर्ज लिया था. कर्ज पर बढ़ते ब्याज और EMI चुकाने के दबाव से वह काफी परेशान थे.
बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने घर में फंदे से लटककर अपनी जान दे दी. खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया. पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद किया है और मामले की जांच कर रही है.
बरामद सुसाइड नोट में दत्ता कुंभार ने खुद को कर्ज में डूबा हुआ बताया है. नोट के मुताबिक, उन्होंने इक्विटास बैंक, रिंग ऐप, HDB बैंक की निलंगा शाखा और श्रीराम फाइनेंस से कर्ज लिया था.
कर्ज माफ करने की अपील
उन्होंने नोट में कथित तौर पर लिखा कि सूखे की स्थिति के कारण वह आर्थिक संकट में फंस गए थे और कर्ज की EMI चुकाने को लेकर उन्हें परेशानी हो रही थी. नोट में उन्होंने सरकार से अपने परिवार को परेशान नहीं किए जाने, कर्ज माफ करने और परिवार को आर्थिक मुआवजा देने की अपील भी की है.
दत्ता कुंभार अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे. उनके परिवार में मां, पत्नी और दो बच्चे हैं. उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है.
यह घटना ग्रामीण इलाकों में कर्ज, खेती से जुड़ी आर्थिक अनिश्चितता और परिवारों की वित्तीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है.
इसी बीच RTI से आए आंकड़े और चिंता बढ़ा रहे हैं. यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन के RTI एक्टिविस्ट जितेंद्र घाडगे की अर्जी पर मिले डेटा के मुताबिक, जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच राज्य में कुल 13,928 किसानों ने खुदकुशी की. आंकड़ों के हिसाब से राज्य में हर दिन औसतन 8 किसानों की मौत हुई है.
RTI एक्टिविस्ट जितेंद्र घाडगे का आरोप है कि महाराष्ट्र के राहत एवं पुनर्वास विभाग ने पिछले 10 सालों में पहली बार जिलों के हिसाब से आंकड़े देने से मना कर दिया है.
घाडगे ने जिला और महीने के हिसाब से जानकारी मांगी थी, ताकि पता चल सके कि किस इलाके में यह संकट सबसे ज्यादा गहरा है.
RTI एक्टिविस्ट का कहना है कि जिलावार आंकड़े उपलब्ध नहीं होने से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि किन जिलों में संकट अधिक गंभीर है.
दीपेश त्रिपाठी