महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद एक पुलिस अधिकारी की बहादुरी की खूब चर्चा हो रही है. ये अधिकारी हैं महाराष्ट्र पुलिस के इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्र. हमले के वक्त संतोष ने जिस तेजी से प्रतिक्रिया दी, उसने हमलावर और सुखबीर बादल के बीच एक सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी. हमलावर का वार बादल के हाथ पर लगा और उनकी जान बच गई.
घटना के अगले दिन सुखबीर बादल की पत्नी और पंजाब के बठिंडा से लोकसभा सांसद हरसिमरत कौर बादल घायल इंस्पेक्टर संतोष से मिलने अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने उनका हाल जाना और उनकी बहादुरी के लिए धन्यवाद दिया. बाद में हरसिमरत ने सोशल मीडिया पर इंस्पेक्टर संतोष के लिए भावुक संदेश भी लिखा.
पहले समझिए, पूरा मामला क्या है?
घटना 13 अगस्त की है. सुखबीर सिंह बादल महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा माता साहिब में पहुंचे थे. उनका वहां धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम था.
दोपहर करीब 1:45 से 1:50 बजे के बीच जब सुखबीर बादल गुरुद्वारे से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति उनकी तरफ बढ़ा.
पुलिस के मुताबिक, हमलावर ने अपनी शॉल के नीचे कृपाण छिपा रखी थी. वह सुखबीर बादल के बेहद करीब पहुंच गया और उन पर हमला करने की कोशिश की. लेकिन तभी सुरक्षा में तैनात इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्र की नजर उस पर पड़ गई. उन्होंने बिना समय गंवाए हमलावर को रोकने की कोशिश की. यही वो चंद सेकंड थे, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया.
संतोष ने बीच में आकर रोका हमलावर
हमलावर सुखबीर बादल पर वार करने की कोशिश कर रहा था. तभी इंस्पेक्टर संतोष ने उसके हाथ को रोकने की कोशिश की और खुद सुखबीर बादल और हमलावर के बीच आ गए. इस दौरान हमलावर का वार बदल गया और सुखबीर बादल के हाथ पर चोट लगी. इंस्पेक्टर संतोष के हाथ में भी चोट आई. हमलावर को मौके पर ही पकड़ लिया गया. उसकी पहचान जसपाल सिंह के तौर पर हुई है. पुलिस के मुताबिक वह निहंग सिख है और गुरुद्वारे में काम करता था.
कौन हैं इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्र?
संतोष वैजनाथ केंद्र महाराष्ट्र पुलिस के अनुभवी अधिकारी हैं. उन्होंने 2001 में कॉन्स्टेबल के तौर पर पुलिस सेवा शुरू की थी. इसके बाद अपनी सेवा के दौरान लगातार प्रमोशन हासिल करते हुए इंस्पेक्टर के पद तक पहुंचे. VIP सुरक्षा ड्यूटी के दौरान उनकी जिम्मेदारी बेहद संवेदनशील थी. हमले के वक्त उनके पास सोचने या योजना बनाने का समय नहीं था. उन्होंने बाद में हरसिमरत कौर को बताया कि उनके पास प्रतिक्रिया देने के लिए सिर्फ एक सेकंड का बेहद छोटा समय था. संतोष वैजनाथ ने कहा कि उन्होंने वही किया जिसके लिए पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जाती है यानी अपना फर्ज निभाया.
'मैंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया'
अस्पताल में जब हरसिमरत कौर इंस्पेक्टर संतोष से मिलीं तो उन्होंने उनकी बहादुरी के लिए धन्यवाद दिया. हरसिमरत ने उनसे पूछा कि क्या वह उनके लिए आभार के तौर पर कुछ कर सकती हैं.
इंस्पेक्टर संतोष का जवाब था कि उन्होंने कुछ असाधारण नहीं किया. उनके मुताबिक, यह उनकी ड्यूटी और ट्रेनिंग का हिस्सा था. यानी जिस वक्त हमले की तस्वीरें सामने आईं और लोग इसे बहादुरी का नाम दे रहे थे, उस वक्त खुद संतोष इसे अपनी जिम्मेदारी बता रहे थे.
'आपने इंसानी ढाल बनकर बचाई जान'
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने इंस्पेक्टर संतोष की बहादुरी की तारीफ करते हुए लिखा कि नांदेड़ में हुए हमले के दौरान उन्होंने सुखबीर सिंह बादल की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी. उन्होंने लिखा कि संतोष सुखबीर बादल और हमलावर के बीच इंसानी ढाल बनकर खड़े रहे.
हरसिमरत ने उनकी बहादुरी को सलाम करते हुए कहा कि उन्होंने यह याद दिलाया कि वर्दी पहनने का असली मतलब क्या होता है- खुद से ऊपर ड्यूटी और डर से ऊपर हिम्मत. उन्होंने बादल परिवार की ओर से इंस्पेक्टर संतोष का आभार जताया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की. हरसिमरत ने इस दौरान अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ का भी धन्यवाद किया.
सुरक्षा में तैनात थी पुलिस की टीम
सुखबीर बादल के नांदेड़ दौरे को देखते हुए सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र और पंजाब पुलिस की टीम तैनात थी. उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ASP रैंक के अधिकारी के पास थी. पंजाब पुलिस के जवानों के अलावा महाराष्ट्र पुलिस की ओर से PSI/PI स्तर के अधिकारियों और अन्य पुलिसकर्मियों की टीम लगाई गई थी. इसके बावजूद हमलावर सुखबीर बादल के काफी करीब पहुंच गया. हालांकि, सुरक्षा घेरे में मौजूद इंस्पेक्टर संतोष केंद्र की सतर्कता ने हमले को बड़ा रूप लेने से रोक दिया.
हमले के बाद कई सवाल भी खड़े हुए
घटना के बाद VIP सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे हैं. आखिर हमलावर सुरक्षा घेरे के इतने करीब कैसे पहुंचा? उसके पास कृपाण कैसे पहुंची? क्या सुरक्षा जांच में कोई चूक हुई? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे.
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