उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गए TSPC के बृजेश गंझू की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस घटना से झारखंड के नक्सली संगठनों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है. इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए TSPC ने झारखंड के सात जिलों में तीन दिनों के 'बंद' का ऐलान किया है.
संगठन की ओर से जारी किए गए बयानों के मुताबिक, 24 सितंबर से लेकर 26 सितंबर तक चतरा, हजारीबाग, पलामू, लातेहार, गढ़वा, लोहरदगा और गुमला जिलों में 'बंदी' लागू रहेगी.
संगठन के जोनल कमांडर नथुनी के नाम से जारी पत्र में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं. पत्र में दावा किया गया है कि एनकाउंटर से कुछ दिन पहले यानी 10 सितंबर को बृजेश गंझू की बातचीत रीजनल कमांडर शशिकांत और जोनल कमांडर नथुनी से हुई थी.
क्या है पूरा मामला?
संगठन का आरोप है कि इसके बाद 16 सितंबर को पुलिस ने हजारीबाग के केरेडारी इलाके के जंगलों से बृजेश गंझू को पकड़ लिया था और अपने साथ ले गई थी. काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो बाद में ये खबर आई कि 20 सितंबर को वाराणसी में उसे पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया है.
'पुलिस ने कानून अपने हाथ में लिया'
नक्सली संगठन ने इस पूरी कार्रवाई को साजिश के तहत फर्जी एनकाउंटर बताया है. बयान में सवाल उठाया गया है कि आखिर पुलिस बार-बार कानून को अपने हाथ में क्यों ले रही है? संगठन ने इसके लिए सीधे तौर पर झारखंड सरकार और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है.
इसके साथ ही संगठन ने इस पूरे मामले पर हाई कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने और घटना की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग की है.
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बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद से झारखंड के इन सात जिलों में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस बल को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है. बंद के ऐलान को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है.
सत्यजीत कुमार