झारखंड में JPSC-JSSC को लेकर छात्रों का प्रोटेस्ट 18वें दिन भी जारी है. इसी बीच सरकार और विपक्ष अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे पर सक्रिय हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए युवाओं से सुझाव मांगे. दूसरी तरफ,बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर CBI जांच से बचने का आरोप लगाया.
मुख्यमंत्री ने 'छात्रों की बात - छात्रों के साथ' संवाद अभियान की बात करते हुए बताया कि अब तक 8,500 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने अपने विचार भेजे हैं. इनमें OMR शीट, परीक्षा कैलेंडर, स्कोरकार्ड और तकनीकी पारदर्शिता लाने जैसे कई अहम बिंदु शामिल हैं. उनका कहना है कि सरकार का मकसद सिर्फ कमियां गिनना नहीं, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित सिस्टम तैयार करना है जिस पर हर युवा आंख मूंदकर भरोसा कर सके.
सदन के भीतर भी हेमंत सोरेन ने रोजगार के मुद्दे पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सरकार ने सदन चलाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन विरोधियों के ड्रामे के कारण बाधा आई. उनका दावा है कि हालिया भर्ती परीक्षाओं में 75 से 100 प्रतिशत तक चयन स्थानीय युवाओं का हुआ है, जबकि पिछली नीतियों के कारण राज्य के हक पर असर पड़ रहा था.
मरांडी ने जांच पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, विपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर राज्य सरकार की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि जैसे ही केंद्रीय एजेंसी ने मामले में कदम बढ़ाया, राज्य की एजेंसियों ने अचानक कार्रवाई का नया मोड़ दे दिया. मरांडी का दावा है कि अगर इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष CBI जांच होती है, तो कई बड़े राज बाहर आ जाएंगे, इसी वजह से सरकार इस कदम से कतरा रही है.
फिलहाल JPSC-JSSC को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है. अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. सरकार सुधार की बात कर रही है, जबकि विपक्ष जांच पर सवाल उठा रहा है. ऐसे में यह मुद्दा सिर्फ छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि झारखंड की राजनीति का भी बड़ा केंद्र बन गया है.
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