गुजरात सरकार ने अपने वार्षिक दिवाली प्रकाशन के ऑनलाइन संस्करण से एक कविता को विश्व हिंदू परिषद की आपत्ति के बाद हया दिया है. विश्व हिंदू परिषद का आरोप था कि इस कविता में भगवान राम और भक्त संत मीरा बाई के बारे में आपत्तिजनक बातें कहीं गई थी. सरकार ने कवि अज़ीज़ तन्कारवी की कविता हटाकर उसकी जगह कवि प्रकाश 'जलाल' की कविता शामिल की.
दरअसल, राज्य के सूचना-प्रसारण विभाग द्वारा हर साल दिवाली के मौके पर प्रतिका प्रकाशित की जाती है. पत्रिका 'गुजरात दीपोत्सव अंक' के ऑनलाइन संस्करण में कवि अज़ीज़ तन्कारवी की एक रचना थी जिसे लेकर विश्व हिंदू परिषद ने आपत्ति जताई थी. अब इसे हटाकर कवि प्रकाश 'जलाल' की 'जोइये' शीर्षक वाली कविता शामिल कर दी गई है.
विश्व हिंदू परिषद ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर मांग की थी कि इस रचना को तुरंत हटाया जाए. VHP की मांग थी कि कविता के लेखक और उसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो. VHP का कहना था कि सरकारी प्रकाशन में इस तरह की रचना को शामिल करना चिंताजनक है, क्योंकि दिवाली भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से जुड़ी है.
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गुजरात VHP के प्रवक्ता हितेंद्रसिंह राजपूत ने बताया कि तन्कारवी की कविता को हटा दिया गया है. VHP के नेता ने इस कार्रवाई पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा, 'हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने हमारे अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई की और दिवाली पत्रिका से उस विवादित कविता को हटा दिया'.
इस मामले में VHP की यह भी मांग थी कि भविष्य में सरकारी प्रकाशनों में सिर्फ उन्हीं लेखकों को जगह दी जाए, जिनका देश, धर्म और संस्कृति के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण हो.
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