सुप्रीम कोर्ट में इस साल चार महीने में बनेंगे तीन चीफ जस्टिस , 72 साल में होगा ऐसा दूसरी बार

पारंपरिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अपनी वरिष्ठता के आधार पर CJI के रूप में कार्यभार संभालते हैं. चीफ जस्टिस के तौर पर कोई कार्यकाल निर्धारित नहीं है.

Advertisement
देश में सुप्रीम कोर्ट 1950 में अस्तित्व में आया. देश में सुप्रीम कोर्ट 1950 में अस्तित्व में आया.

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 4:55 PM IST
  • SC से 6 महीने में 9 जज रिटायर होंगे
  • 1991 में दो महीने में तीन CJI बने थे

सुप्रीम कोर्ट में दशकों बाद ऐसा मौका आने वाला है, जब देश चार महीनों में तीन चीफ जस्टिस देखेगा. इसी साल जुलाई से नवंबर के दौरान CJI एनवी रमण के अलावा जस्टिस उदय उमेश ललित और जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ भी मुख्य न्यायाधीश बनेंगे. इस दिलचस्प संयोग के पांच साल बाद 2027 में भी देश ऐसे ही संयोग का साक्षी होगा. साल 2027 में सितंबर से अक्टूबर के दरम्यान दो महीनों में तीन चीफ जस्टिस आएंगे और जाएंगे.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड, परंपरा और प्रैक्टिस के मुताबिक 2027 में 27 सितंबर को जस्टिस विक्रम नाथ मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे और देश को पहली महिला मुख्य न्यायाधीश मिलेंगी. जस्टिस बीवी नागरत्ना 35 दिन के लिए देश की मुख्य न्यायाधीश होंगी. इसके बाद जस्टिस पीएस नरसिम्हा 31 अक्टूबर 2027 से छह महीने तीन दिन के लिए चीफ जस्टिस बनेंगे.

2027 में तीसरी बार सबसे कम समय में तीन CJI बनेंगे

बता दें कि 2027 तक इतने कम समय में तीन चीफ जस्टिस बनने का ये तीसरा मौका होगा. सुप्रीम कोर्ट 1950 में अस्तित्व में आया और उसके बाद सबसे पहले 1991 में नवंबर और दिसंबर के बीच देश में तीन अलग-अलग CJI बने थे. तब CJI रंगनाथ मिश्रा 24 नवंबर 1991 को रिटायर हुए थे. फिर जस्टिस कमल नारायण सिंह 25 नवंबर से 12 दिसंबर तक यानी कुल 18 दिन के लिए चीफ जस्टिस बने. बाद में जस्टिस एमएच कानिया चीफ जस्टिस बने और 13 दिसंबर 1991 से 17 नवंबर 1992 तक यानी 11 महीने तक इस सर्वोच्च पद पर जिम्मेदारी संभाली.

Advertisement

न्यायाधीश का 65 साल की आयु में रिटायरमेंट

पारंपरिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अपनी वरिष्ठता के आधार पर CJI के रूप में कार्यभार संभालते हैं. चीफ जस्टिस के तौर पर कोई कार्यकाल निर्धारित नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु संविधान के तहत 65 वर्ष निर्धारित की गई है. 

CJI कम से कम तीन साल के लिए होना चाहिए: अटॉर्नी जनरल

हाल ही में भारत के महान्यायवादी यानी अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वह उन परिस्थितियों का अंदाजा लगा सकते हैं जो वर्तमान CJI एनवी रमणा की सेवानिवृत्ति के साथ सामने आएंगी. वेणुगोपाल ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि प्रत्येक CJI का कार्यकाल कम से कम तीन साल होना चाहिए. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख के साथ-साथ न्यायिक और प्रशासनिक सुधार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी होते हैं. इन जिम्मेदारियों के साथ ही बड़ी संख्या में बकाया मामलों की समस्या को भी कारगर ढंग से निपटाने की आवश्यकता है.’

इस साल 6 महीने में 9 जज रिटायर होंगे

इस साल रिकॉर्ड सिर्फ चार महीनों में तीन चीफ जस्टिस बनने का ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में जजों के रिटायरमेंट का भी होगा. अगले छह महीनों में नौ जज रिटायर होंगे. इसकी शुरुआत अगले महीने जस्टिस विनीत शरण की 10 मई को सेवानिवृत्ति से होगी. उसके बाद करीब एक एक महीने के अंतराल में जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एएम खानविल्कर 7 जून और 29 जुलाई को सेवानिवृत्त होंगे. 

Advertisement

CJI रमणा अगस्त के आखिरी सप्ताह में रिटायर होंगे

CJI एनवी रमणा 26 अगस्त को सेवानिवृत्त होंगे. इसके अगले महीने जस्टिस इंदिरा बनर्जी 23 सितंबर को रिटायर होंगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या घटकर तीन रह जाएगी. जस्टिस इंदिरा बनर्जी के बाद जस्टिस हेमंत गुप्ता 16 अक्तूबर को अपना कार्यालय छोड़ेंगे. 

नई नियुक्तियों को लेकर चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में यदि 8 नवंबर तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई तो नौ रिक्तियां हो जाएंगी. परंपरा के अनुसार सेवा के आखिरी महीनों में मुख्य न्यायाधीश नई नियुक्तियां नहीं कर सकते. ऐसे में मौजूदा CJI रमणा को मई, जून और जुलाई में नियुक्तियों के लिए प्रयास करना होगा. इसके बाद जस्टिस ललित के पास नियुक्तियां करने के लिए एक माह बचेगा, क्योंकि उनका कार्यकाल दो माह से कुछ ज्यादा का ही है. 

अब तक तीन बार इस परंपरा का उल्लंघन

यहां बता दें कि रिटायर से एक माह पहले मुख्य न्यायाधीश को अगले CJI का नाम सरकार को भेजना पड़ता है. यह संस्तुति करने के बाद मुख्य न्यायाधीश नई नियुक्तियों के कोलेजियम (पांच वरिष्ठतम जजों का चयन मंडल) में बैठ सकते हैं.
चीफ जस्टिस की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर करने की परंपरा और निवर्तमान चीफ जस्टिस की ओर से उत्तराधिकारी की सिफारिश की परंपरा का उल्लंघन अब तक तीन बार हुआ है. 

Advertisement

पंडित नेहरू और इंदिरा सरकार में नियम तोड़े गए

पहली बार पंडित जवाहर नेहरू के प्रधानमंत्री कार्यकाल में फरवरी 1964 जस्टिस इमाम की वरिष्ठता को दरकिनार कर जस्टिस गजेंद्र गडकर को चीफ जस्टिस बनाया गया था. इसके सात साल बाद 1971 में पंडित नेहरू की पुत्री और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जस्टिस शेलत हेगड़े और जस्टिस ग्रोवर की वरिष्ठता और दावेदारी को नजरंदाज कर जस्टिस एएन रे को मुख्य न्यायाधीश बनाया था. इसके छह साल बाद 1977 में इंदिरा गांधी सरकार ने फिर यही मनमानी दोहराई. 

जस्टिस खन्ना के भतीजे भी 2024 में CJI के दावेदार

तब जस्टिस हंसराज खन्ना की दावेदारी को खारिज किया गया और वरिष्ठतम जज को नियुक्त करने की परंपरा को तोड़कर जस्टिस एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. उस समय इंदिरा गांधी सरकार के फैसलों को गलत बताने वाले जस्टिस एचआर खन्ना को चीफ जस्टिस नहीं बनाया गया. लेकिन अब उन्हीं जस्टिस खन्ना के भतीजे जस्टिस संजीव खन्ना दो साल बाद नवंबर 2024 से मई 2025 तक चीफ जस्टिस बनाए जाने की कतार में हैं.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »